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Sant Kabir Nagar News: निर्माण के डेढ़ वर्ष बाद भी धूल फांक रहा बायो गैस संयंत्र
Sat, 06 Sep 2025 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 06 Sep 2025 12:36 AM IST
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बढ़या ठाठर स्थित बायो गैस परियोजना बंद पड़ा-संवाद
मेंहदावल। विकास खंड के बढ़या में बनाई गई बायोगैस संयंत्र योजना का अभी तक संचालन नहीं शुरू कराया गया। कुछ समय पहले परियोजना का ट्राॅयल किया गया, लेकिन पाइप फटने के बाद इसका संचालन शुरू नहीं हुआ। इसके कारण परियोजना का कार्य नहीं शुरू हो पा रहा है।
इससे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल है। जिम्मेदार हर माह बढ़या पहुंचते हैं, लेकिन परियोजना का संचालन कराने को लेकर गंभीर नहीं है। इसको लेकर स्थानीय लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं। मेंहदावल के बढ़या गांव में स्थित स्थाई गौशाला में डेढ़ वर्ष पूर्व लगभग 30 लाख रुपये की लागत से बायोगैस संयंत्र परियोजना स्थापित की गई थी। इस योजना का उद्देश्य था कि गोशाला से निकलने वाले गोबर का बेहतर प्रयोग हो सकेगा।
इससे गोशाला की आय भी बढ़ेगी, लेकिन धन आवंटित होने के बाद तकनीकी सहयोग संस्था ने इसका निर्माण तेजी से करा दिया। 10 वर्ष बाद भी परियोजना का संचालन शुरू नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि बायो गैस संयंत्र परियोजना स्थापित होने के बाद इसके सफल संचालन की आस थी, लेकिन समय बीत रहा है। जिम्मेदार परियोजना का ट्राॅयल नहीं करा रहे हैं। जिससे गोशाला से निकलने वाले गोबर का बेहतर उपयोग नहीं हो पा रहा है। लोगों ने जल्द से जल्द परियोजना का ट्राॅयल कराते हुए इसके संचालन की मांग की है।
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इससे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल है। जिम्मेदार हर माह बढ़या पहुंचते हैं, लेकिन परियोजना का संचालन कराने को लेकर गंभीर नहीं है। इसको लेकर स्थानीय लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं। मेंहदावल के बढ़या गांव में स्थित स्थाई गौशाला में डेढ़ वर्ष पूर्व लगभग 30 लाख रुपये की लागत से बायोगैस संयंत्र परियोजना स्थापित की गई थी। इस योजना का उद्देश्य था कि गोशाला से निकलने वाले गोबर का बेहतर प्रयोग हो सकेगा।
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इससे गोशाला की आय भी बढ़ेगी, लेकिन धन आवंटित होने के बाद तकनीकी सहयोग संस्था ने इसका निर्माण तेजी से करा दिया। 10 वर्ष बाद भी परियोजना का संचालन शुरू नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि बायो गैस संयंत्र परियोजना स्थापित होने के बाद इसके सफल संचालन की आस थी, लेकिन समय बीत रहा है। जिम्मेदार परियोजना का ट्राॅयल नहीं करा रहे हैं। जिससे गोशाला से निकलने वाले गोबर का बेहतर उपयोग नहीं हो पा रहा है। लोगों ने जल्द से जल्द परियोजना का ट्राॅयल कराते हुए इसके संचालन की मांग की है।
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