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Sant Kabir Nagar News: बीसी सखी को कमीशन से आजीविका चलाने में हो रही मुश्किल
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। नाथनगर ब्लाॅक के ग्राम पंचायतों में नियुक्त 97 बीसी सखी को कमीशन की रकम से परिवार चलाने में दिक्कत हो रही है। इस कारण महिलाएं सिलाई और ब्यूटी पार्लर जैसे अन्य रोजगार के जरिये परिवार की आजीविका चला रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की पढ़ी-लिखी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के मकसद से हर ग्राम पंचायत में बीसी सखी की नियुक्ति हुई है। गांव की बीसी सखी को पैसे के लेनदेन के लिए योजना के जरिये सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं। इससे गांव के वृद्ध और असहाय लोगों को पैसा निकालने और जमा करने में सुविधा मिल सके।
पैसे के लेनदेन के लिए बीसी सखी को कमीशन मिलता है। मुकुंदपुर ग्राम पंचायत की बीसी सखी निर्मला यादव ने बताया कि महीने में मात्र एक हजार या बारह सौ रुपये ही कमीशन के मिल पाते हैं, क्योंकि बहुत कम लोग ही हम लोगों से पैसे का लेन-देन करते हैं।
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इतनी कम रकम में परिवार की परवरिश काफी मुश्किल होने लगी, तब सिलाई और अन्य काम करके परिवार की रोजी-रोटी चलानी पड़ रही है। नाथनगर ब्लाॅक में तैनात एनआरएलएम प्रबंधक रामेंद्र पाल ने बताया कि ब्लाॅक में 97 बीसी सखी हैं। करीब हर बीसी सखी अपना कार्य कर रही है।
शुरुआती दौर में योजना से जुड़ी इन महिलाओं को छह माह तक प्रतिमाह चार हजार रुपये मिलता है, साथ ही एक मुश्त बैंकिंग कामकाज के लिए आवश्यक उपकरण जिसमें लैपटॉप, डेस्कटॉप, माइक्रो-एटीएम और फिंगर प्रिंट स्कैनर खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 50,000 रुपये की धनराशि एकमुश्त सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाती है।
बीसी सखियों का कहना है कि पैसे के लेनदेन से बैंक से मिलने वाली रकम काफी कम होने से परिवार की आजीविका मुश्किल हो रही है।
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हरिहरपुर। नाथनगर ब्लाॅक के ग्राम पंचायतों में नियुक्त 97 बीसी सखी को कमीशन की रकम से परिवार चलाने में दिक्कत हो रही है। इस कारण महिलाएं सिलाई और ब्यूटी पार्लर जैसे अन्य रोजगार के जरिये परिवार की आजीविका चला रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की पढ़ी-लिखी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के मकसद से हर ग्राम पंचायत में बीसी सखी की नियुक्ति हुई है। गांव की बीसी सखी को पैसे के लेनदेन के लिए योजना के जरिये सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं। इससे गांव के वृद्ध और असहाय लोगों को पैसा निकालने और जमा करने में सुविधा मिल सके।
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पैसे के लेनदेन के लिए बीसी सखी को कमीशन मिलता है। मुकुंदपुर ग्राम पंचायत की बीसी सखी निर्मला यादव ने बताया कि महीने में मात्र एक हजार या बारह सौ रुपये ही कमीशन के मिल पाते हैं, क्योंकि बहुत कम लोग ही हम लोगों से पैसे का लेन-देन करते हैं।
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इतनी कम रकम में परिवार की परवरिश काफी मुश्किल होने लगी, तब सिलाई और अन्य काम करके परिवार की रोजी-रोटी चलानी पड़ रही है। नाथनगर ब्लाॅक में तैनात एनआरएलएम प्रबंधक रामेंद्र पाल ने बताया कि ब्लाॅक में 97 बीसी सखी हैं। करीब हर बीसी सखी अपना कार्य कर रही है।
शुरुआती दौर में योजना से जुड़ी इन महिलाओं को छह माह तक प्रतिमाह चार हजार रुपये मिलता है, साथ ही एक मुश्त बैंकिंग कामकाज के लिए आवश्यक उपकरण जिसमें लैपटॉप, डेस्कटॉप, माइक्रो-एटीएम और फिंगर प्रिंट स्कैनर खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 50,000 रुपये की धनराशि एकमुश्त सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाती है।
बीसी सखियों का कहना है कि पैसे के लेनदेन से बैंक से मिलने वाली रकम काफी कम होने से परिवार की आजीविका मुश्किल हो रही है।