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Sant Kabir Nagar News: ब्लड सेपरेशन यूनिट को लाइसेंस का इंतजार
Thu, 02 May 2024 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 02 May 2024 01:18 AM IST
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- एक साल पहले बनकर तैयार हुआ यूनिट, मशीनें भी आ चुकी हैं
फोटो है संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट बनकर तैयार है, लेकिन शुरू होने के लिए उसे लाइसेंस का इंतजार है। करीब एक साल बीत गया लेकिन अभी तक लाइसेंस नहीं मिलने के कारण यूनिट शुरू नहीं हो सकी है। मशीनें धूल फांक रही हैं। वहीं, मरीजों को भी इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को ब्लड कंपोनेंट यूनिट के लिए गोरखपुर व बस्ती जाना पड़ता है।
जिला अस्पताल की निगरानी में सीएचसी खलीलाबाद में जिला ब्लड बैंक स्थापित है। जहां पर लोगों को ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन यहां पर अभी तक प्लेटलेट्स आदि की सुविधा नहीं थी। ब्लड बैंक में जमा होने वाले रक्त की एक यूनिट एक ही व्यक्ति के काम आ सकती है। ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी व क्रॉयोप्रेसीपिटेट कंपोनेंट को अलग करके प्रयोग में लाने के लिए शासन से ब्लड सेपरेशन यूनिट की स्थापना को मंजूरी डेढ़ साल पहले मिली थी। भवन भी बना और मशीनें भी करीब एक साल पहले आ गईं। लेकिन यूनिट अभी चालू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रायोप्रेसीपिटेट का उपयोग हेमोफिलिया-ए या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है। एक रक्त से चार प्रकार के ब्लड इसी कंपोनेंट यूनिट में तैयार किया जाना है। लेकिन अभी तक इस यूनिट को लाइसेंस नहीं मिल पाया है। जिससे इससे संबंधित मरीजों को गोरखपुर और बस्ती जाना पड़ता है।
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ब्लड बैंक परिसर में बने ब्लड सेपरेशन यूनिट के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है। दिल्ली से टीम आनी है। उम्मीद है कि इस माह टीम आ जाएगी, उसके बाद संचालन शुरू हो जाएगा।
- डॉ. एके मिश्र, ब्लड बैंक प्रभारी
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फोटो है संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट बनकर तैयार है, लेकिन शुरू होने के लिए उसे लाइसेंस का इंतजार है। करीब एक साल बीत गया लेकिन अभी तक लाइसेंस नहीं मिलने के कारण यूनिट शुरू नहीं हो सकी है। मशीनें धूल फांक रही हैं। वहीं, मरीजों को भी इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को ब्लड कंपोनेंट यूनिट के लिए गोरखपुर व बस्ती जाना पड़ता है।
जिला अस्पताल की निगरानी में सीएचसी खलीलाबाद में जिला ब्लड बैंक स्थापित है। जहां पर लोगों को ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन यहां पर अभी तक प्लेटलेट्स आदि की सुविधा नहीं थी। ब्लड बैंक में जमा होने वाले रक्त की एक यूनिट एक ही व्यक्ति के काम आ सकती है। ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी व क्रॉयोप्रेसीपिटेट कंपोनेंट को अलग करके प्रयोग में लाने के लिए शासन से ब्लड सेपरेशन यूनिट की स्थापना को मंजूरी डेढ़ साल पहले मिली थी। भवन भी बना और मशीनें भी करीब एक साल पहले आ गईं। लेकिन यूनिट अभी चालू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
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सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रायोप्रेसीपिटेट का उपयोग हेमोफिलिया-ए या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है। एक रक्त से चार प्रकार के ब्लड इसी कंपोनेंट यूनिट में तैयार किया जाना है। लेकिन अभी तक इस यूनिट को लाइसेंस नहीं मिल पाया है। जिससे इससे संबंधित मरीजों को गोरखपुर और बस्ती जाना पड़ता है।
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ब्लड बैंक परिसर में बने ब्लड सेपरेशन यूनिट के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है। दिल्ली से टीम आनी है। उम्मीद है कि इस माह टीम आ जाएगी, उसके बाद संचालन शुरू हो जाएगा।
- डॉ. एके मिश्र, ब्लड बैंक प्रभारी