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Sant Kabir Nagar News: एक्यूआई पहुंचा 280, आसमान में छाई धुंध, बढ़ी परेशानी
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दिन में शहर में छाया रहा धुंध-संवाद
संतकबीरनगर। शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 280 पहुंच गया है। 10 दिन पहले यह 170 पर था। हवा खराब होने से लोगों की आंखों में जलन हो रही है। साथ ही गले में खराश की शिकायतें आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि मगहर के पास हाईवे के किनारे बड़े पैमाने पर कूड़ा जलाया जा रहा है। इससे हवा खराब हो गई है। चिकित्सकों का कहना है कि इस समय ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगा लें।
सोमवार की सुबह धुंध छाई रही। सुबह टहलने वाले लोगों को धुंध के चलते आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कतें हुईं। एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 280 पर पहुंच गया है, जबकि 10 दिन पहले एक्यूआई स्तर 170 पर था। इधर मार्च में गर्मी का अहसास भी हो रहा है।
26 फरवरी को एक्यूआई स्तर 165 था, लेकिन अब यह बढ़कर सोमवार को 280 पहुंच गया है। इसके चलते लोगों की आंखों में जलन हाे रही है, और आंखों में कण भी फंस रहा है। यही नहीं एलर्जी और अस्थमा के मरीजों के लिए यह धुंध परेशानी भरी है। धूप व तेज हवा के चलते धूल और जगह-जगह निर्माण के लिए रखा बालू भी उड़ रहा है।
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मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार धूल व धुआं उड़ रहा है और वायुमंडल में एक लेयर बन जा रही है। इसके कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। ऐसे में सुबह शाम टहलने वाले लोगों को बच कर रहना होगा और उन्हें मास्क लगाकर ही बाहर निकलना चाहिए। प्रदूषण के चलते लोगों की आंखों में खुजली और पानी भी निकल रहा है। ऐसे मरीज आंख के चिकित्सक के पास पहुंच भी रहे हैं और इलाज करा रहे है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन इस तरह से आंखों में जलन के 20 से 25 मरीज और सांस लेने में दिक्कत के 10 मरीज पहुंच रहे है। गोला बाजार निवासी प्रदीप अग्रहरि, मोती नगर निवासी नागेंद्र चौधरी आदि का कहना है कि सुबह के समय जब टहलने निकले तो पहले तो आंखों में जलन जैसा लगा। कुछ दूर जाकर आखों को धुलने के बाद राहत मिली, लेकिन फिर वही दिक्कत आ गई। आसमान में जैसे कोई धुएं की तरह दिख रहा था। ठंड में जैसे शीतलहर दिखती है, उसी तरह से आसमान में दिख रहा था। लोगाें ने बताया कि प्रदूषण काफी खराब है।
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एक्यूआई का मानक
- 0 से 50- अच्छा
- 51 से 100- संतोषजनक
- 101 से 200- मध्यम खराब श्रेणी में
- 201 से 300- खराब
- 301 से 400 बहुत खराब
- 401 से 500- गंभीर
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ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में उत्पन्न होने वाला स्मॉग, जिसे आमतौर पर फोटोकेमिकल स्मॉग या ''ग्रीष्मकालीन स्मॉग'' के नाम से जाना जाता है, तीव्र सूर्यप्रकाश और नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की परस्पर क्रिया से उत्पन्न होने वाला एक प्रकार का वायु प्रदूषण है। शीतकालीन स्मॉग, जिसमें धुआं और कोहरा होता है, के विपरीत, ग्रीष्मकालीन स्मॉग भूरे रंग का, धुंधला और प्रदूषकों का ऑक्सीकरणकारी मिश्रण होता है, जो गर्म, धूप वाले और स्थिर मौसम की स्थितियों में चरम पर होता। कूड़ा जलाना, धूल उड़ना आदि इसका कारक होता है और यह गर्म मौसम में सतह के ऊपर हो जाता है। यह काफी खतरनाक होता है। इससे आंखों में जलन होती है। इसके साथ ही सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है।
- डॉ. नेहा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल, एचआरपीजी कॉलेज, खलीलाबाद
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धूल और धुएं के कण शरीर का हर प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एलर्जी की शिकायत आती है। जिन्हें पहले से एलर्जी है, उनके लिए यह धुआं और दिक्कत बढ़ा देता है। ऐसे में धुएं वाली जगह जाने पर दम घुटने लगता है। तो वहीं धूल के कणों से खुजली होना सामान्य बात है इससे आंखों में जलन की शिकायत आ रही है। इस तरह के मरीज अस्पताल में आ रहे है। प्रदूषण हर तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो मास्क लगा लें। सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह के समय आ रही है। सुबह नरमी के चलते प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा रहा है। इससे दमा रोगियों पर खतरा रहा है।
-डॉ. कुमार सिद्धार्थ, वरिष्ठ फिजिशियन
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सोमवार की सुबह धुंध छाई रही। सुबह टहलने वाले लोगों को धुंध के चलते आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कतें हुईं। एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 280 पर पहुंच गया है, जबकि 10 दिन पहले एक्यूआई स्तर 170 पर था। इधर मार्च में गर्मी का अहसास भी हो रहा है।
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26 फरवरी को एक्यूआई स्तर 165 था, लेकिन अब यह बढ़कर सोमवार को 280 पहुंच गया है। इसके चलते लोगों की आंखों में जलन हाे रही है, और आंखों में कण भी फंस रहा है। यही नहीं एलर्जी और अस्थमा के मरीजों के लिए यह धुंध परेशानी भरी है। धूप व तेज हवा के चलते धूल और जगह-जगह निर्माण के लिए रखा बालू भी उड़ रहा है।
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मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार धूल व धुआं उड़ रहा है और वायुमंडल में एक लेयर बन जा रही है। इसके कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। ऐसे में सुबह शाम टहलने वाले लोगों को बच कर रहना होगा और उन्हें मास्क लगाकर ही बाहर निकलना चाहिए। प्रदूषण के चलते लोगों की आंखों में खुजली और पानी भी निकल रहा है। ऐसे मरीज आंख के चिकित्सक के पास पहुंच भी रहे हैं और इलाज करा रहे है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन इस तरह से आंखों में जलन के 20 से 25 मरीज और सांस लेने में दिक्कत के 10 मरीज पहुंच रहे है। गोला बाजार निवासी प्रदीप अग्रहरि, मोती नगर निवासी नागेंद्र चौधरी आदि का कहना है कि सुबह के समय जब टहलने निकले तो पहले तो आंखों में जलन जैसा लगा। कुछ दूर जाकर आखों को धुलने के बाद राहत मिली, लेकिन फिर वही दिक्कत आ गई। आसमान में जैसे कोई धुएं की तरह दिख रहा था। ठंड में जैसे शीतलहर दिखती है, उसी तरह से आसमान में दिख रहा था। लोगाें ने बताया कि प्रदूषण काफी खराब है।
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एक्यूआई का मानक
- 0 से 50- अच्छा
- 51 से 100- संतोषजनक
- 101 से 200- मध्यम खराब श्रेणी में
- 201 से 300- खराब
- 301 से 400 बहुत खराब
- 401 से 500- गंभीर
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ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में उत्पन्न होने वाला स्मॉग, जिसे आमतौर पर फोटोकेमिकल स्मॉग या ''ग्रीष्मकालीन स्मॉग'' के नाम से जाना जाता है, तीव्र सूर्यप्रकाश और नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की परस्पर क्रिया से उत्पन्न होने वाला एक प्रकार का वायु प्रदूषण है। शीतकालीन स्मॉग, जिसमें धुआं और कोहरा होता है, के विपरीत, ग्रीष्मकालीन स्मॉग भूरे रंग का, धुंधला और प्रदूषकों का ऑक्सीकरणकारी मिश्रण होता है, जो गर्म, धूप वाले और स्थिर मौसम की स्थितियों में चरम पर होता। कूड़ा जलाना, धूल उड़ना आदि इसका कारक होता है और यह गर्म मौसम में सतह के ऊपर हो जाता है। यह काफी खतरनाक होता है। इससे आंखों में जलन होती है। इसके साथ ही सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है।
- डॉ. नेहा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल, एचआरपीजी कॉलेज, खलीलाबाद
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धूल और धुएं के कण शरीर का हर प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एलर्जी की शिकायत आती है। जिन्हें पहले से एलर्जी है, उनके लिए यह धुआं और दिक्कत बढ़ा देता है। ऐसे में धुएं वाली जगह जाने पर दम घुटने लगता है। तो वहीं धूल के कणों से खुजली होना सामान्य बात है इससे आंखों में जलन की शिकायत आ रही है। इस तरह के मरीज अस्पताल में आ रहे है। प्रदूषण हर तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो मास्क लगा लें। सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह के समय आ रही है। सुबह नरमी के चलते प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा रहा है। इससे दमा रोगियों पर खतरा रहा है।
-डॉ. कुमार सिद्धार्थ, वरिष्ठ फिजिशियन