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खौफ के साए में ग्रामीणों ने गुजारी रात
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मदारपुर गांव में दिन में जंगली जानवर की तलाश कर रही वन विभाग की टीम।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
खौफ के साए में ग्रामीणों ने गुजारी रात
- घरों में कैद रहे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे
- लाठी लेकर टोलियों में गश्त करते रहे युवा
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। क्षेत्र के मदारपुर, गरथवलिया समेत आसपास के गांवों के लोगों ने जंगली जानवर की दहशत में पूरी रात खौफ में गुजारी। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घरों में कैद रहे। वहीं, युवा टोलियों में बंटकर लाठी और टार्च लेकर गश्त करते रहे। उधर, वन विभाग की टीम जंगली जानवर को तो अब तक पकड़ नहीं पाई है। हमला करने और पद चिह्न और हमला करने के तरीके से फिशिंग कैट बता रहे हैं।
रविवार शाम सात बजे गरथवलिया गांव में पति-पत्नी खेत में पानी चलाने के डिलेवरी पाइप बिछा रहे थे। उसी दौरान जंगली जानवर ने 50 वर्षीय रामदीन और उनकी 45 वर्षीय पत्नी उर्मिला पर हमला करके घायल कर दिया। उसके बाद शाम साढ़े सात बजे के करीब जंगली जानवर मदारपुर गांव के नहर के करीब पहुंच गया।
जंगली जानवर ने नहर पर पास मौजूद मदारपुर गांव के रहने वाले राम नरेश की दस वर्षीय बेटी अंशिका, सात वर्षीय बेटा कृष्णा और तीन वर्षीय बेटा अंश को हमला करके घायल किया।
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21 वर्षीय मोफीदा खातून व 15 वर्षीय मुशीदा खातून पुत्री अब्दुल हमीद को भी घायल किया। गांव के अंदर घुस जंगली जानवर ने घर के पास बाहर खड़े 51 वर्षीय बाबुल्लाह पुत्र अमजद अली पर हमला किया तो डर से बाबुल्लाह तालाब में कूद पड़े। इसके बाद 26 वर्षीय राजकुमार पुत्र दिलीप कुमार घर से थोड़ा दूर घूमने निकले थे। उनके ऊपर पर जंगली जानवर टूट पड़ा। राजकुमार भी जंगली जानवर से खुद का बचाव करने के लिए संघर्ष किए।
घटना की सूचना पर मदारपुर गांव में देर रात पुलिस व वन विभाग की टीम पहुंच कर जंगली जानवर की तलाश में पिंजड़ा आदि संसाधन के साथ जुटी रही। रात में डीएफओ जंगदबा प्रसाद श्रीवास्तव, मेंहदावल रेंजर सूर्य करन यादव व खलीलाबाद रेंजर राजेश कुशवाहा देर रात तक डटे रहे।
इसके बाद वन दरोगा राजेंद्र प्रसाद और वन रक्षक अवनीश पटेल मौजूद रहे।मदारपुर गांव में मेराज खान, मोहम्मद सलमान, सैफुल इस्लाम, हमीद, मोहम्मद यासिर, राम नरेश, प्रदीप कुमार, ग्राम प्रधान पति जुल्फेकार अली उर्फ भुट्ट व दरियबाद के किफायतुल्लाह पप्पू आदि ने बताया कि जंगली जानवर का खौफ इस कदर हो गया कि लोग अपने- अपने घरों में दुबक गए।
मदारपुर गांव में युवक अलग-अलग टोलियों में लाठी डंडे लेकर पूरी रात गश्त करते रहे। पूरे गांव में रात-भर जागते रहों की आवाज सुनाई दी। ग्रामीणों ने बताया कि मदारपुर के सभी घायल जिला अस्पताल से घर आ आ गए। जबकि गरथवलिया के रामदीन और उनकी उर्मिला का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा रहा है।
फिशिंग कैट होने की अंदेशा
वन दरोगा राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि देर रात तक जंगली जानवर की तलाश की गई, लेकिन जंगली जानवर दिखाई नहीं दिया। पैर के पंजे, नाखून के निशान और हमला करने के तरीके के साथ घायलों के हुलिया बताने से फिशिंग कैट लग रहा है। एसओ सर्वेश राय ने बताया कि रात में पुलिस गश्त कर लाउडस्पीकर से एनाउंसमेंट कराई। सभी को घरों में रहेने का सुझाव दिया गया।
जंगली जानवर तो पकड़ा नहीं जा सका है, लेकिन उसके हमले के तरीके और पद चिन्हों से फिशिंग कैट होने की उम्मीद है। सात दिन तक वन विभाग की टीम मदारपुर और आसपास के गांवों में कैंप करेंगी।
- जेपी श्रीवास्तव, डीएफओ
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- घरों में कैद रहे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे
- लाठी लेकर टोलियों में गश्त करते रहे युवा
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। क्षेत्र के मदारपुर, गरथवलिया समेत आसपास के गांवों के लोगों ने जंगली जानवर की दहशत में पूरी रात खौफ में गुजारी। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घरों में कैद रहे। वहीं, युवा टोलियों में बंटकर लाठी और टार्च लेकर गश्त करते रहे। उधर, वन विभाग की टीम जंगली जानवर को तो अब तक पकड़ नहीं पाई है। हमला करने और पद चिह्न और हमला करने के तरीके से फिशिंग कैट बता रहे हैं।
रविवार शाम सात बजे गरथवलिया गांव में पति-पत्नी खेत में पानी चलाने के डिलेवरी पाइप बिछा रहे थे। उसी दौरान जंगली जानवर ने 50 वर्षीय रामदीन और उनकी 45 वर्षीय पत्नी उर्मिला पर हमला करके घायल कर दिया। उसके बाद शाम साढ़े सात बजे के करीब जंगली जानवर मदारपुर गांव के नहर के करीब पहुंच गया।
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जंगली जानवर ने नहर पर पास मौजूद मदारपुर गांव के रहने वाले राम नरेश की दस वर्षीय बेटी अंशिका, सात वर्षीय बेटा कृष्णा और तीन वर्षीय बेटा अंश को हमला करके घायल किया।
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21 वर्षीय मोफीदा खातून व 15 वर्षीय मुशीदा खातून पुत्री अब्दुल हमीद को भी घायल किया। गांव के अंदर घुस जंगली जानवर ने घर के पास बाहर खड़े 51 वर्षीय बाबुल्लाह पुत्र अमजद अली पर हमला किया तो डर से बाबुल्लाह तालाब में कूद पड़े। इसके बाद 26 वर्षीय राजकुमार पुत्र दिलीप कुमार घर से थोड़ा दूर घूमने निकले थे। उनके ऊपर पर जंगली जानवर टूट पड़ा। राजकुमार भी जंगली जानवर से खुद का बचाव करने के लिए संघर्ष किए।
घटना की सूचना पर मदारपुर गांव में देर रात पुलिस व वन विभाग की टीम पहुंच कर जंगली जानवर की तलाश में पिंजड़ा आदि संसाधन के साथ जुटी रही। रात में डीएफओ जंगदबा प्रसाद श्रीवास्तव, मेंहदावल रेंजर सूर्य करन यादव व खलीलाबाद रेंजर राजेश कुशवाहा देर रात तक डटे रहे।
इसके बाद वन दरोगा राजेंद्र प्रसाद और वन रक्षक अवनीश पटेल मौजूद रहे।मदारपुर गांव में मेराज खान, मोहम्मद सलमान, सैफुल इस्लाम, हमीद, मोहम्मद यासिर, राम नरेश, प्रदीप कुमार, ग्राम प्रधान पति जुल्फेकार अली उर्फ भुट्ट व दरियबाद के किफायतुल्लाह पप्पू आदि ने बताया कि जंगली जानवर का खौफ इस कदर हो गया कि लोग अपने- अपने घरों में दुबक गए।
मदारपुर गांव में युवक अलग-अलग टोलियों में लाठी डंडे लेकर पूरी रात गश्त करते रहे। पूरे गांव में रात-भर जागते रहों की आवाज सुनाई दी। ग्रामीणों ने बताया कि मदारपुर के सभी घायल जिला अस्पताल से घर आ आ गए। जबकि गरथवलिया के रामदीन और उनकी उर्मिला का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा रहा है।
फिशिंग कैट होने की अंदेशा
वन दरोगा राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि देर रात तक जंगली जानवर की तलाश की गई, लेकिन जंगली जानवर दिखाई नहीं दिया। पैर के पंजे, नाखून के निशान और हमला करने के तरीके के साथ घायलों के हुलिया बताने से फिशिंग कैट लग रहा है। एसओ सर्वेश राय ने बताया कि रात में पुलिस गश्त कर लाउडस्पीकर से एनाउंसमेंट कराई। सभी को घरों में रहेने का सुझाव दिया गया।
जंगली जानवर तो पकड़ा नहीं जा सका है, लेकिन उसके हमले के तरीके और पद चिन्हों से फिशिंग कैट होने की उम्मीद है। सात दिन तक वन विभाग की टीम मदारपुर और आसपास के गांवों में कैंप करेंगी।
- जेपी श्रीवास्तव, डीएफओ