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कर्बला में फातिया के बाद दफन हुए ताजिए
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Wed, 12 Oct 2016 11:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दसवीं मोहर्रम का जुलूस बुधवार को जनपद में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाला गया। इसमें ताजियों के आगे नव युवकों की टोली, ढोल और ताशों के साथ लाठी-डंडे, गतके, तलवार, भाला आदि के कलाओं को पेश करते दिखे। वहीं वातावरण में ...या हुसैन, या हुसैन की सदाएं गूंजती रही। देर रात आबादी से बाहर कर्बला में फातिया के साथ करीब 750 ताजिए दफन किए गए।
खलीलाबाद में दसवीं मुहर्रम का जुलूस बुधवार को अंसार टोला, पठान टोला, बरदहिया बाजार, विधियानी, बंजरिया सहित अन्य मुहल्ले से ताजियों के साथ निकाला गया। मेंहदावल चौक पर सभी जुलूस आकर मिलें। इस दौरान युवाओं ने तलवारबाजी और गतके के हैरतंगेज कारनामे दिखाए तो वहीं कुछ ने ढोल, ताशा, झाल और झांझ बजाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। जबकि विभिन्न आकारों में बने ताजिए आकर्षण का केंद्र रहे। इस पर्व को मुस्लिम समाज के शिया वर्ग के अलावा सुन्नी वर्ग के लोगों ने भी उपवास रखा। हिंदुओं में भी इसे लेकर आस्था दिखी। कई लोग अपनी-अपनी मुरादों के बावत मन्नतें मांगी। जबकि मन्नतें पूरी होने वाले छोटी ताजिया बनवाकर फातिहा करवाया और इमाम हुसैन के नाम से फातिहा करवाकर शीरनी बांटी। पायक बने लोग ताजियों को हवा देते वक्त या हुसैन, या हुसैन की आवाजें लगाते देखे गए। इस दौरान जगह-जगह शरबत आदि का भी प्रबंध रहा। मगहर प्रतिनिधि के अनुसार शेरपुर, काजीपुर, इस्लामनगर, तकियाबाजार सहित अन्य स्थानों पर रखे गए ताजिए को मसनवी के कर्बला में लाकर दफन कर दिया गया। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में गड़सरपार, मुहम्मदपुर, गिरधरपुर, बेलौली, धौरहरा, अशरफाबाद, कोडऱी, मंझरिया आदि गांवों में स्थापित ताजियों को कर्बला में लाकर दफन किया गया।
लोहरैया प्रतिनिधि के अनुसार मुसलमान भाईयों ने ताजिया का जुलूस क्षेत्र टाड़ा, बारीडीहा, बभनौली, डिहवा, घोरांग, सिरसी, बेलमा, बंसवारी, बंडा, सेमरडाड़ी, रूपिन, डिहवा, शनिचरा, दुलहापार, पौली,सोनहन,रोशया बाजार, चकिया धुसवा, नावन करमा आदि स्थानों से निकालकर दफन किया गया। इस दौरान पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
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इसी तरह से मेंहदावल सहित अन्य क्षेत्रों के ताजियों को चौक से कस्बे में जुलूस निकालकर स्थानीय कर्बला में दफन किए गए। बताया जाता है कि मोहम्मद रसूलल्लाह के निवासे हजरत इमाम हु़सैन अले हिस्सलाम कर्बला की धरती पर हक के लिए लड़ते हुए अपनी जान को कुर्बान कर दिया था। तबसे उनकी याद में मोहर्रम पर मातम किया जाता है।
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खलीलाबाद में दसवीं मुहर्रम का जुलूस बुधवार को अंसार टोला, पठान टोला, बरदहिया बाजार, विधियानी, बंजरिया सहित अन्य मुहल्ले से ताजियों के साथ निकाला गया। मेंहदावल चौक पर सभी जुलूस आकर मिलें। इस दौरान युवाओं ने तलवारबाजी और गतके के हैरतंगेज कारनामे दिखाए तो वहीं कुछ ने ढोल, ताशा, झाल और झांझ बजाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। जबकि विभिन्न आकारों में बने ताजिए आकर्षण का केंद्र रहे। इस पर्व को मुस्लिम समाज के शिया वर्ग के अलावा सुन्नी वर्ग के लोगों ने भी उपवास रखा। हिंदुओं में भी इसे लेकर आस्था दिखी। कई लोग अपनी-अपनी मुरादों के बावत मन्नतें मांगी। जबकि मन्नतें पूरी होने वाले छोटी ताजिया बनवाकर फातिहा करवाया और इमाम हुसैन के नाम से फातिहा करवाकर शीरनी बांटी। पायक बने लोग ताजियों को हवा देते वक्त या हुसैन, या हुसैन की आवाजें लगाते देखे गए। इस दौरान जगह-जगह शरबत आदि का भी प्रबंध रहा। मगहर प्रतिनिधि के अनुसार शेरपुर, काजीपुर, इस्लामनगर, तकियाबाजार सहित अन्य स्थानों पर रखे गए ताजिए को मसनवी के कर्बला में लाकर दफन कर दिया गया। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में गड़सरपार, मुहम्मदपुर, गिरधरपुर, बेलौली, धौरहरा, अशरफाबाद, कोडऱी, मंझरिया आदि गांवों में स्थापित ताजियों को कर्बला में लाकर दफन किया गया।
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लोहरैया प्रतिनिधि के अनुसार मुसलमान भाईयों ने ताजिया का जुलूस क्षेत्र टाड़ा, बारीडीहा, बभनौली, डिहवा, घोरांग, सिरसी, बेलमा, बंसवारी, बंडा, सेमरडाड़ी, रूपिन, डिहवा, शनिचरा, दुलहापार, पौली,सोनहन,रोशया बाजार, चकिया धुसवा, नावन करमा आदि स्थानों से निकालकर दफन किया गया। इस दौरान पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
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इसी तरह से मेंहदावल सहित अन्य क्षेत्रों के ताजियों को चौक से कस्बे में जुलूस निकालकर स्थानीय कर्बला में दफन किए गए। बताया जाता है कि मोहम्मद रसूलल्लाह के निवासे हजरत इमाम हु़सैन अले हिस्सलाम कर्बला की धरती पर हक के लिए लड़ते हुए अपनी जान को कुर्बान कर दिया था। तबसे उनकी याद में मोहर्रम पर मातम किया जाता है।