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रिक्तियों की भरमार, कैसे प्री प्राइमरी बनेंगे आंगनबाड़ी केंद्र

Tue, 05 Oct 2021 11:15 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 11:15 PM IST
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रिक्तियों की भरमार, कैसे प्री प्राइमरी बनेंगे आंगनबाड़ी केंद्र
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जिले में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में सीडीपीओ के छह पदों समेत कुल 657 पद रिक्त
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल यानी प्री-प्राइमरी की तरह संचालित किया जाना है। अफसर भी इसकी तैयारी में जुटे हुए हैं। जिले में 1765 केंद्र संचालित हो रहे हैं। इसमें सीडीपीओ के छह पदों समेत कुल 657 पद रिक्त हैं। सूत्रों की मानें तो इस कारण योजनाओं की बेहतर ढंग से निगरानी व संचालन में भी दिक्कत हो रही है। ऐेसे बेहतर ढंग से केंद्रों शिक्षा कैसे दी जाएगी यह समझ से परे है। केंद्रों पर छह माह से छह वर्ष तक के 1,25,550 बच्चे पंजीकृत हैं।
प्री-प्राइमरी के रूप में संचालन व डाटा संबंधी फीडिंग के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के साथ ही स्मार्टफोन भी दिया जा रहा है। जिले में संचालित 1765 आंगनबाड़ी केंद्रों में 15 से अधिक केंद्र या तो पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं या फिर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर से संचालित। जिले में सीडीपीओ के दस पदों के सापेक्ष चार की तैनाती है। मुख्यसेविका के 58 पद सृजित हैं। जिसमें से 17 की ही तैनात हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के 610 पद रिक्त हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से तीन वर्ष तक के 80399 बच्चे और तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 45161 बच्चे नामांकित है। 36880 गर्भवती धात्री महिलाएं और 2131 किशोरियां पंजीकृत है। जिले में अतिकुपोषित बच्चे 565 और कुपोषित बच्चों की संख्या 2206 है। ऐसे में जब अधिकारी से लेकर कर्मचारी के काफी संख्या में पद रिक्त हैं तो आखिर सुचारू रूप से योजनाओं का संचालन व निगरानी कैसे होती होगी। यह लाख टके का सवाल है। समीक्षा बैठक में डीएम ने नए आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण की धीमी गति पर भी नाराजगी जहिर करते डीपीओ को खुद निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रेषित करने का निर्देश दिया है।
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डीपीओ विजयश्री ने कहा कि शासन की मंशा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री- प्राइमरी के रूप में संचालित किया जाए। यह सच है कि जिले में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका के रिक्त 610 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होते ही रिक्त पदों की पूर्ति हो जाएगी। योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक ढंग से हो, इसके लिए पूरा प्रयास रहता है।
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नामांकित बच्चों को दी जाती हैं ये सुविधाएं
केंद्रों पर नामांकित छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों के लिए महीने में एक किलो ग्राम चने की दाल, आधा लीटर रिफाइंड, एक किलोग्राम चावल और एक किलोग्राम गेहूं दिया जाता है। इसमें जुलाई से परिवर्तित करके एक किलोग्राम गेहूं की जगह एक किलोग्राम दलिया जाने की रणनीति बनी है। तीन वर्ष से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए आधा किलोग्राम चने की दाल, आधा किलोग्राम चावल, आधा किलोग्राम गेहूं दिए जाने का प्रावधान है। गर्भवती धात्री महिलाओं को एक किलोग्राम चने की दाल, एक किलोग्राम चावल, एक किलोग्राम गेहूं और आधा लीटर रिफाइंड दिया जाता है। वहीं कुपोषित बच्चों के लिए डेढ़ किलोग्राम गेहूं , डेढ़ किलो चावल, दो किलोग्राम चने की दाल व आधा लीटर रिफाइंड तेल दिया जाता है।
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