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एक अनशनकारी की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Sat, 05 Nov 2016 11:33 PM IST
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हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
- फोटो : अमर उजाला
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सांथा क्षेत्र के अतरीनानकार गांव के निलंबित कोटे की दुकान को बहाल करने के विरोध में और एसडीएम के स्थानांतरण की मांग को लेकर अतरीनानकार के ग्रामीणों का आमरण अनशन शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान एक अनशनकारी रामभेद की तबीयत अचानक खराब हो गई। उसे आनन फानन में पुलिस ने सीएचसी पर भर्ती कराया। जहा उसका इलाज चल रहा है। घटना की सूचना तहसीलदार वंदना पांडेय और नायब तहसीलदार राजेश श्रीवास्तव पहुुंचे और अनशनकारियों से वार्ता की। जिसके बाद बहाल कोटे को निरस्त करते हुए सेवाईचपार गांव के कोटेदार से कोटे को अटैच करने का आदेश दिखाया। तब जाकर ग्रामीण माने और देर शाम अनशन समाप्त कर दिया।
बतादें कि दो नवंबर से अतरीनानकार के निवासी नरेंद्र पांडेय ग्रामीणों के साथ अनशन पर बैठे थे। उनका आरोप था कि मार्च 2016 में ग्रामीणों की शिकायत पर कोटे की दुकान की जांच हुई थी। जांच में अनियमितता मिलने पर कोटा निलंबित करते हुए दूसरी जगह अटैच हुआ था। आरोप था कि एसडीएम रामजीवन कोटेेदार के प्रभाव में आ गए और पैसा लेकर निलंबित कोटे की दुकान को सात माह बाद बहाल कर दिए। एसडीएम की कार्यशैली पर जनता को विश्वास नहीं रह गया है। ऐसे में कोटे की दुकान को निरस्त करते हुए नए सिरे से चयन की प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके साथ ही एसडीएम के यहां से हटाए जाने तक आमरण अनशन जारी रखने की बात कही थी। अनशन के चौथे दिन तहसीलदार वंदना पांडेय पहुुंची और बहाल कोटे के निरस्तीकर का आदेश दिखाते हुए सेवाईचपार से अटैच होने का भी आदेश दिखाया। जिसके बाद ग्रामीणों ने अनशन समाप्त कर दिया। इस दौरान वीरेंद्र सिंह, बृजेश कुमार पांडेय, खुशियाल, राम प्रसाद सुभावती देवी, विद्यावती देवी, अमरनाथ, रामनरेश, श्यामधर, लालपरी, सरोज, राजेश्वरी, किरन, राजेश, प्रकाश, चंद्रबली, पूर्णमासी, अवधराज यादव,राम नरेश,राजेश निषाद, कैसरजहां, श्याम धर चौधरी, बालचंद, रमाकांत, प्रमोद, जगरनाथ आदि मौजूद रहे।
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बतादें कि दो नवंबर से अतरीनानकार के निवासी नरेंद्र पांडेय ग्रामीणों के साथ अनशन पर बैठे थे। उनका आरोप था कि मार्च 2016 में ग्रामीणों की शिकायत पर कोटे की दुकान की जांच हुई थी। जांच में अनियमितता मिलने पर कोटा निलंबित करते हुए दूसरी जगह अटैच हुआ था। आरोप था कि एसडीएम रामजीवन कोटेेदार के प्रभाव में आ गए और पैसा लेकर निलंबित कोटे की दुकान को सात माह बाद बहाल कर दिए। एसडीएम की कार्यशैली पर जनता को विश्वास नहीं रह गया है। ऐसे में कोटे की दुकान को निरस्त करते हुए नए सिरे से चयन की प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके साथ ही एसडीएम के यहां से हटाए जाने तक आमरण अनशन जारी रखने की बात कही थी। अनशन के चौथे दिन तहसीलदार वंदना पांडेय पहुुंची और बहाल कोटे के निरस्तीकर का आदेश दिखाते हुए सेवाईचपार से अटैच होने का भी आदेश दिखाया। जिसके बाद ग्रामीणों ने अनशन समाप्त कर दिया। इस दौरान वीरेंद्र सिंह, बृजेश कुमार पांडेय, खुशियाल, राम प्रसाद सुभावती देवी, विद्यावती देवी, अमरनाथ, रामनरेश, श्यामधर, लालपरी, सरोज, राजेश्वरी, किरन, राजेश, प्रकाश, चंद्रबली, पूर्णमासी, अवधराज यादव,राम नरेश,राजेश निषाद, कैसरजहां, श्याम धर चौधरी, बालचंद, रमाकांत, प्रमोद, जगरनाथ आदि मौजूद रहे।
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