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प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा खतरे में
Sant kabir nagar
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:30 AM IST
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बखिरा। 29 वर्ग किलोमीटर के परिक्षेत्र में फैले बखिरा पक्षी विहार में अक्टूबर से ही प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है। शिकारी भी इन दिनों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इसके बावजूद वनाधिकारी महराजगंज ने स्थानीय पक्षी विहार कार्यालय पर तैनात वन क्षेत्राधिकारी का तबादला कर दिया। रेंजर की अनुपस्थिति से झील व पक्षियों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश के अभाव में तैनात वनकर्मी दिशाहीन बने हुए हैं। जिससे दुर्लभ पक्षिओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। बखिरा झील का क्षेत्रफल काफी बड़ा होने से प्रवासी पक्षियों के प्रवास के लिए बेहद सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर सैकड़ों की संख्या में प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा प्रतिवर्ष अक्टूबर से फरवरी तक रहता है। इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई। इससे पक्षियों के शिकार पर काफी हद तक रोक भी लगी है। वर्तमान में बखिरा पक्षी विहार रेंज में तैनात क्षेत्रीय वनाधिकारी गौरीनाथ का स्थानांतरण पक्षियों के आने वाले अक्टूबर माह से एक माह पूर्व ही कर दिया गया। उनके स्थान पर नियुक्त रेंजर नवनीत कुमार आते ही दिसंबर माह तक ट्रेनिंग पर चले गए। अब बखिरा रेंज की देखभाल का जिम्मा पकड़ी रेंज के क्षेत्राधिकारी ओपी मिश्र के पास होने से स्थानीय रेंज पर तैनात वनकर्मी अनिर्णय की स्थिति में है। नतीजतन पक्षी विहार में आने वाले प्रवासी पक्षियों की देखभाल बेहतर ढंग से नहीं होने से शिकारियों के हौसले बुलंद हैं। डीएफओ महराजगंज शिवाजी राय ने बताया कि स्टाफ की कमी है। तैनात रेंजर के ट्रेनिंग में होने से पकड़ी के रेंजर को बखिरा रेंज की देखभाल का जिम्मा सौंपा गया है। पक्षियों की सुरक्षा के लिए सख्ती की जा रही है।
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