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Sant Kabir Nagar News: गुजर गए 47 साल, मिली तारीख पर तारीख, बुढापे में भी केस निपटारे की उम्मीद नहीं
Fri, 04 Aug 2023 11:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 04 Aug 2023 11:39 PM IST
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खलीदाबाद तहसील में बैठे फरियादी।
- वादकारियाें को महीने में दो से तीन बार मिल रही तारीखें, निस्तारण की आस में गुजर रहा वक्त
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। जमीन संबंधी विवाद का निस्तारण कराना बहुत मुश्किल है। वर्ष 1977 से शुरु हुआ मुकदमा अब तक चल ही रहा है। बुढ़ापे में भी मुकदमे के निस्तारण की उम्मीद नहीं दिख रही है। तारीख पर तारीख देखते हुए 47 साल का लंबा वक्त बीत गया। अब तो तहसील की अदालत में तारीख देखने की आदत सी पड़ गई है। खलीबाबाद तहसील में मुकदमे की पैरवी में आए वृद्ध ने यह पीड़ा बयां की।
खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के किडहिरिया गांव के रहने वाले 66 साल के राम मिलन पुत्र स्व. बंधों शुक्रवार को अपने मुकदमे की पैरवी में आए थे। खलीलाबाद तहसील के चबूतरे पर बैठक कुछ लोगों से आपस में बातचीत कर रहे थे। उसी दौरान राममिलन से मुकदमे की बात शुरु की गई तो कुछ देर के लिए वह भावुक हो गए।
पूछने पर बताया कि वर्ष 1977 में विधवा फूला देवी से पांच बीघे की जमीन का बैनामा कराए थे। उसी बैनामे की जमीन पर विक्रेता के पट्टीदारों ने अपना हक जताते हुए मुकदमा दायर कर दिया। वर्ष 1977 से मुकदमा चल रहा है। अपर एसडीएम की कोर्ट में प्रकरण है। तभी से तारीख पर तारीख मिल रही है।
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वे बताते हैं कि एक महीने में तीन बार तारीख पड़ती है। वह खेती-किसानी करते हैं। गेहूं- धान बेचकर तारीख देखने साइकिल से खलीलाबाद आते हैं। प्रत्येक तारीख पर कुल मिलाकर करीब 300 रुपये खर्च होता है। ऐसे में देखा जाए तो महीने में सिर्फ 900 रुपये तारीख देने में खर्च हो रहा है। अब तो सिर्फ तारीख ही देखना है। पता नहीं कब मुकदमे का फैसला होगा।
उन्हीं के बगल में सिकरी गांव के रहने वाले सुरेंद्र प्रसाद पुत्र सतगुरु बैठे थे। पूछने पर बताया कि वह मुकदमे की तारीख देखने आए हैं। पट्टीदार से जमीन के हिस्सेदारी का विवाद है। अपर एसडीएम के कोर्ट में उनका मुकदमा चल रहा है। करीब 30 साल से अधिक का समय बीत गया और अभी तक तारीख पर तारीख ही मिल रही है। एक महीने में दो तारीख पड़ती है और हर तारीख पर 200 रुपये खर्च होते हैं।
उसी दौरान इन लोगों से बातचीत करते देख कर दुघरा गांव के वृद्ध शिव नारायण पांडेय पहुंच गए। बताया कि वे भी मुकदमे की पैरवी में आए हैं। वसीयत का मामला है। नायब तहसीलदार की कोर्ट में प्रकरण है। वर्ष 1987 से मामला चल रहा है और तारीख पर तारीख ही पड़ रही है। महीने में तीन बार तारीख पड़ती है। टेंपो से तारीख के दिन तहसील आते हैं। हर तारीख पर 300 रुपये खर्च हो जाते हैं। उनका कहना है कि यदि नियमित कोर्ट चले तो कुछ बात आगे बढ़े। लेकिन बार- बार सिर्फ तारीख ही तारीख मिलती है और तारीख की तिथि जान कर घर जाना होता है। संवाद
कोट
महीने में अधिकारियों की दस बार बैठकें होती हैं। कहीं सड़क जाम तो कहीं अन्य विवाद की वजह से एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसील को जाना पड़ता है। अधिवक्ता भी मुकदमे में एक पन्ने की आपत्ति होती है उसे समय से दाखिल नहीं करते हैं। अधिवक्ता भी तारीख लेकर दूसरी अदालतों में मुकदमों की पैरवी करने चले जाते हैं। इसमें अधिकारियों और अधिवक्ताओं को सामजस्य बैठा कर लंबित मुकदमों के निस्तारण पर जोर देना चाहिए। सात- आठ अगस्त में अधिवक्ताओं की बैठक होनी है। इसमें यह मुद्दा रखेगे।
-रवींद्र नाथ पांडेय, अध्यक्ष तहसील बार एसोसिएशन
कोट
मुकदमों के निस्तारण गुण-दोष के आधार पर होता है। राजस्व के मामले अधिक उलझे हुए होते हैं। इस वजह से समय लगता है। अधिकारी भी समय से कोर्ट में नहीं बैठते हैं। क्योंकि उनके पास प्रशासनिक काम अधिक होता है। अधिवक्ता भी तारीख अधिक लेने पर जोर देते हैं। ऐसे में अधिवक्ता और अधिकारी दोनों जिम्मेदार हैं। इन्हें आपस में तालमेल बैठा कर लंबित मामलों को समय से निस्तारित करने पर जोर देना चाहिए।
- सुभाष चंद श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता
इंसेट
25,158 मुकदमें राजस्व न्यायालयों में हैं लंबित
संतकबीरनगर। जिले की राजस्व अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है। वादकारियों को तारीख पर तारीख मिल रही है। तहसीलों का चक्कर लगाते-लगाते वादकारी थक जा रहे हैं। लेकिन उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख ही मिल रही है। एसडीएम हो या फिर तहसीलदार, नायब तहसीलदार सभी को अधिकतर समय सामान्य शिकायतों के निस्तारण में बीत जाता है। इससे उलझे मुकदमों की सुनवाई के लिए वक्त कम मिल पाता है। जिले में राजस्व के 25,158 मुकदमे लंबित हैं।
जानकारी के अनुसार एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर, तहसीलदार न्यायिक सदर, तहसीलदार मेंहदावल और तहसीलदार धनघटा के अलावा अन्य न्यायालयों में मुकदमों का बोझ अधिक है। राजस्व के विवाद घटने की बजाए बढ़ रहे हैं। इसमें अधिकतर मामले बंटवारे के हाेते हैं। कई बार वरासत और दाखिल-खारिज के मामले भी सुलझने की बजाय उलझ जाते हैं और अधिक वक्त लग जाता है। इस बीच लोगों को अदालत को चक्कर लगाना पड़ता है।
इंसेट
जिले में लंबित मुकदमों पर एक नजर
-- डीएम कोर्ट में 92
- एडीएम राजस्व एवं वित्त कोर्ट में 166
- एडीएम न्यायिक कार्ट में 222
- अपर एसडीएम कोर्ट में 363
- एसडीएम सदर की कोर्ट में 1121
-एसडीएम मेंहदावल की कोर्ट में 597
- एसडीएम धनघटा की कोर्ट में 905
- तहसीलदार सदर की कोर्ट में 4413
- तहसील मेंहदावल की कोर्ट में 3617
- तहसीलदार धनघटा की कोर्ट में 1548
- तहसीलदार न्यायिक सदर की कोर्ट में 3222
- नायब तहसीलदार प्रथम की कोर्ट में 1172
- नायब तहसीलदार सदर द्वितीय की कोर्ट में 1360
- नायब तहसीलदार प्रथम मेंहदावल की कोर्ट में 884
- नायब तहसीलदार द्वितीय मेंहदावल की कोर्ट में 1105
- नायब तहसीलदार प्रथम धनघटा की कोर्ट में 1482
- नायब तहसीलदार द्वितीय धनघटा की कोर्ट में 940
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सात महीने में 11,483 मुकदमे हुए निस्तारित: डीएम
डीएम संदीप कुमार ने बताया कि राजस्व न्यायालयों में जनवरी से लेकर अब तक 11,448 मुकदमे निस्तारित हुए हैं। जबकि एक महीने में 1378 वाद निस्तारित किए गए। महीने भर के भीतर कुल 1949 नए वाद दायर हुए हैं। राजस्व के मुकदमों को समय से निस्तारित किए जाने पर पूरा जोर है। राजस्व परिषद का भी निर्देश है कि पुराने लंबित प्रकरणों को सूचीबद्ध करके समय से निस्तारित कराया जाए। न्यायिक प्रक्रिया के तहत की मुकदमों को गुण- दोष के आधार पर निस्तारण किया जाता है।
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शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। जमीन संबंधी विवाद का निस्तारण कराना बहुत मुश्किल है। वर्ष 1977 से शुरु हुआ मुकदमा अब तक चल ही रहा है। बुढ़ापे में भी मुकदमे के निस्तारण की उम्मीद नहीं दिख रही है। तारीख पर तारीख देखते हुए 47 साल का लंबा वक्त बीत गया। अब तो तहसील की अदालत में तारीख देखने की आदत सी पड़ गई है। खलीबाबाद तहसील में मुकदमे की पैरवी में आए वृद्ध ने यह पीड़ा बयां की।
खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के किडहिरिया गांव के रहने वाले 66 साल के राम मिलन पुत्र स्व. बंधों शुक्रवार को अपने मुकदमे की पैरवी में आए थे। खलीलाबाद तहसील के चबूतरे पर बैठक कुछ लोगों से आपस में बातचीत कर रहे थे। उसी दौरान राममिलन से मुकदमे की बात शुरु की गई तो कुछ देर के लिए वह भावुक हो गए।
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पूछने पर बताया कि वर्ष 1977 में विधवा फूला देवी से पांच बीघे की जमीन का बैनामा कराए थे। उसी बैनामे की जमीन पर विक्रेता के पट्टीदारों ने अपना हक जताते हुए मुकदमा दायर कर दिया। वर्ष 1977 से मुकदमा चल रहा है। अपर एसडीएम की कोर्ट में प्रकरण है। तभी से तारीख पर तारीख मिल रही है।
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वे बताते हैं कि एक महीने में तीन बार तारीख पड़ती है। वह खेती-किसानी करते हैं। गेहूं- धान बेचकर तारीख देखने साइकिल से खलीलाबाद आते हैं। प्रत्येक तारीख पर कुल मिलाकर करीब 300 रुपये खर्च होता है। ऐसे में देखा जाए तो महीने में सिर्फ 900 रुपये तारीख देने में खर्च हो रहा है। अब तो सिर्फ तारीख ही देखना है। पता नहीं कब मुकदमे का फैसला होगा।
उन्हीं के बगल में सिकरी गांव के रहने वाले सुरेंद्र प्रसाद पुत्र सतगुरु बैठे थे। पूछने पर बताया कि वह मुकदमे की तारीख देखने आए हैं। पट्टीदार से जमीन के हिस्सेदारी का विवाद है। अपर एसडीएम के कोर्ट में उनका मुकदमा चल रहा है। करीब 30 साल से अधिक का समय बीत गया और अभी तक तारीख पर तारीख ही मिल रही है। एक महीने में दो तारीख पड़ती है और हर तारीख पर 200 रुपये खर्च होते हैं।
उसी दौरान इन लोगों से बातचीत करते देख कर दुघरा गांव के वृद्ध शिव नारायण पांडेय पहुंच गए। बताया कि वे भी मुकदमे की पैरवी में आए हैं। वसीयत का मामला है। नायब तहसीलदार की कोर्ट में प्रकरण है। वर्ष 1987 से मामला चल रहा है और तारीख पर तारीख ही पड़ रही है। महीने में तीन बार तारीख पड़ती है। टेंपो से तारीख के दिन तहसील आते हैं। हर तारीख पर 300 रुपये खर्च हो जाते हैं। उनका कहना है कि यदि नियमित कोर्ट चले तो कुछ बात आगे बढ़े। लेकिन बार- बार सिर्फ तारीख ही तारीख मिलती है और तारीख की तिथि जान कर घर जाना होता है। संवाद
कोट
महीने में अधिकारियों की दस बार बैठकें होती हैं। कहीं सड़क जाम तो कहीं अन्य विवाद की वजह से एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसील को जाना पड़ता है। अधिवक्ता भी मुकदमे में एक पन्ने की आपत्ति होती है उसे समय से दाखिल नहीं करते हैं। अधिवक्ता भी तारीख लेकर दूसरी अदालतों में मुकदमों की पैरवी करने चले जाते हैं। इसमें अधिकारियों और अधिवक्ताओं को सामजस्य बैठा कर लंबित मुकदमों के निस्तारण पर जोर देना चाहिए। सात- आठ अगस्त में अधिवक्ताओं की बैठक होनी है। इसमें यह मुद्दा रखेगे।
-रवींद्र नाथ पांडेय, अध्यक्ष तहसील बार एसोसिएशन
कोट
मुकदमों के निस्तारण गुण-दोष के आधार पर होता है। राजस्व के मामले अधिक उलझे हुए होते हैं। इस वजह से समय लगता है। अधिकारी भी समय से कोर्ट में नहीं बैठते हैं। क्योंकि उनके पास प्रशासनिक काम अधिक होता है। अधिवक्ता भी तारीख अधिक लेने पर जोर देते हैं। ऐसे में अधिवक्ता और अधिकारी दोनों जिम्मेदार हैं। इन्हें आपस में तालमेल बैठा कर लंबित मामलों को समय से निस्तारित करने पर जोर देना चाहिए।
- सुभाष चंद श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता
इंसेट
25,158 मुकदमें राजस्व न्यायालयों में हैं लंबित
संतकबीरनगर। जिले की राजस्व अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है। वादकारियों को तारीख पर तारीख मिल रही है। तहसीलों का चक्कर लगाते-लगाते वादकारी थक जा रहे हैं। लेकिन उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख ही मिल रही है। एसडीएम हो या फिर तहसीलदार, नायब तहसीलदार सभी को अधिकतर समय सामान्य शिकायतों के निस्तारण में बीत जाता है। इससे उलझे मुकदमों की सुनवाई के लिए वक्त कम मिल पाता है। जिले में राजस्व के 25,158 मुकदमे लंबित हैं।
जानकारी के अनुसार एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर, तहसीलदार न्यायिक सदर, तहसीलदार मेंहदावल और तहसीलदार धनघटा के अलावा अन्य न्यायालयों में मुकदमों का बोझ अधिक है। राजस्व के विवाद घटने की बजाए बढ़ रहे हैं। इसमें अधिकतर मामले बंटवारे के हाेते हैं। कई बार वरासत और दाखिल-खारिज के मामले भी सुलझने की बजाय उलझ जाते हैं और अधिक वक्त लग जाता है। इस बीच लोगों को अदालत को चक्कर लगाना पड़ता है।
इंसेट
जिले में लंबित मुकदमों पर एक नजर
- एडीएम राजस्व एवं वित्त कोर्ट में 166
- एडीएम न्यायिक कार्ट में 222
- अपर एसडीएम कोर्ट में 363
- एसडीएम सदर की कोर्ट में 1121
-एसडीएम मेंहदावल की कोर्ट में 597
- एसडीएम धनघटा की कोर्ट में 905
- तहसीलदार सदर की कोर्ट में 4413
- तहसील मेंहदावल की कोर्ट में 3617
- तहसीलदार धनघटा की कोर्ट में 1548
- तहसीलदार न्यायिक सदर की कोर्ट में 3222
- नायब तहसीलदार प्रथम की कोर्ट में 1172
- नायब तहसीलदार सदर द्वितीय की कोर्ट में 1360
- नायब तहसीलदार प्रथम मेंहदावल की कोर्ट में 884
- नायब तहसीलदार द्वितीय मेंहदावल की कोर्ट में 1105
- नायब तहसीलदार प्रथम धनघटा की कोर्ट में 1482
- नायब तहसीलदार द्वितीय धनघटा की कोर्ट में 940
सात महीने में 11,483 मुकदमे हुए निस्तारित: डीएम
डीएम संदीप कुमार ने बताया कि राजस्व न्यायालयों में जनवरी से लेकर अब तक 11,448 मुकदमे निस्तारित हुए हैं। जबकि एक महीने में 1378 वाद निस्तारित किए गए। महीने भर के भीतर कुल 1949 नए वाद दायर हुए हैं। राजस्व के मुकदमों को समय से निस्तारित किए जाने पर पूरा जोर है। राजस्व परिषद का भी निर्देश है कि पुराने लंबित प्रकरणों को सूचीबद्ध करके समय से निस्तारित कराया जाए। न्यायिक प्रक्रिया के तहत की मुकदमों को गुण- दोष के आधार पर निस्तारण किया जाता है।