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सद्गुरु कबीर साहेब ने गुरु शिष्य की परंपरा को जीवित रखा
Tue, 18 Dec 2018 10:27 PM IST
राकेश पांडेय
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Tue, 18 Dec 2018 10:27 PM IST
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कार्यक्रम का दीप जलाकर शुभारंभ करते महंत विचारदास।
- फोटो : अमर उजाला
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मगहर। सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली के कबीर चौरा परिसर स्थित कबीर समाधि पर मंगलवार को सद्गुरु कबीर के 500 वें अंतर्ध्यान वर्ष के अवसर पर महंत विचारदास की अध्यक्षता में दीपोत्सव, सत्संग व विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमे मुख्य अतिथि पंथ हजूर अर्धनाम साहेब लहरतारा धाम वाराणसी रहे। कार्यक्रम में काफी संख्या में विभिन्न प्रांतों से आए साधु संतों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सद्गुरु समाधि के सामने पंथ श्री हजूर अर्धनाम साहेब व संतों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पंथ श्री हजूर अर्धनाम साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब ने गुरु शिष्य की परंपरा को जीवित रखा। गुरु ही अंधकार से उजाले की तरफ ले जाने का कार्य करता है। यहां सभी धर्म संप्रदाय के लोग दर्शन करने आते हैं। आगे कहा कि किताबी ज्ञान सिर्फ मस्तिष्क में रहता है। जब तक उसे हृदय में उतारा न जाए वह दो कौड़ी का होता है। जो मगहर में मृत्यु पाता है उसे नरक मिलता है और काशी में स्वर्ग मिलता है। उन्होंने मगहर में प्राण त्यागकर इस मिथ्या को तोड़ने का कार्य किया। नहीं तो कोई यहां बसना और मरना नहीं चाहता। जिसे शास्त्र, पंडित, बड़े लोगों ने निकाला जबकि उसे सद्गुरु कबीर ने आश्रय दिया। लहरतारा वाराणसी से पधारे संत धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर के 500 वें अंतर्ध्यान दिवस का बड़ा महत्व है। मगहर धाम पूरी दुनिया में मशहूर है। यह कौमी एकता का प्रतीक है। यहां आकर सभी दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं। यह स्थान कबीर पंथियों के लिए तीर्थस्थान है। महंत विचार दास ने कहा कि सद्गुरु कबीर की बाणी दिलों को दिलों से जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने सदैव मानवता, सांप्रदायिक एकता की बात कही है। उनके कहे हुए एक-एक शब्द पर आज रिसर्च हो रहे हैं। वह जीवन भर कुरीतियों से लड़ते रहे। इस मौके पर महंत ज्ञानप्रकाश शास्त्री, गुड्डू वर्मा, महंत देवेंद्र दास सूरत गुजरात, महंत जीवन दास, द्वारिका दास, सिन्धुमुनि साहेब, महंत शिवमुनि दास, परेम सागर दास जामनगर गुजरात आदि लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
भंडारे का आयोजन हुआ
मगहर। सद्गुरु कबीर के 500 वें वर्ष में अंतर्ध्यान दिवस पर एक विशाल भंडार का आयोजन भी किया गया। जिसमें राजस्थान, लखनऊ, बिहार, बनारस, गोंडा, हरियाणा, गोरखपुर, चौरी चौरा सहित विभिन गांवों से आए हुए कबीर पंथी साधुओं के अलावा स्थानीय लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस भंडारे का आयोजन राजस्थान प्रांत से आए संत छगनदास के द्वारा किया गया। इस मौके पर अन्तर्राष्ट्रीय सन्त पंथ हजूर अर्धनाम साहेब, महंत विचार दास, वेद प्रकाश चौबे, डॉक्टर हरिशरण शास्त्री, संत केशव दास, संत अरविंद दास शास्त्री, संत प्रेम साहेब, देवेंद्र साहेब, राजेश बर्मा, अवधेश सिंह, बनार्जीलाल अग्रहरि, विनोद दास, संत रामसरन दास, विनोद दास, रामलखनदास उर्फ लालबाबा, दिनेश कुमार, संपूर्णानंद त्रिपाठी, विजय तिवारी, राजेश कुमार चंद, मकसूद खान, नागेंद्र पासवान, रविप्रकाश पांडेय, विनोद दास, धर्मदेव साहेब, कन्हैया दास आदि मौजूद थे।
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कबीर वाणी लोगों को अंधेरे से बाहर निकालती है
मगहर। संतकबीर की निर्वाण स्थली मगहर के कबीर चौरा परिसर में मंगलवार को 500वें अंतर्ध्यान वर्ष के मौके पर जुटे संतों ने कबीर वाणी को सदमार्ग का रास्ता बताया। संतों का कहना था कि वाह्य आडम्बर व धार्मिक विवादों को समाप्त करने के लिए कबीर वाणी जरूरी है।
गुजरात प्रांत के जामनगर से आये महंत प्रेमसागर साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया था। उनकी वाणी हमें अंधेरे से उजाले की तरफ ले जाती है।
लहरतारा वाराणसी से आये महंत धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने गुरु शिष्य की परंपरा को मजबूत किया। सद्गुरु कबीर ने सदैव दोनों साम्प्रदाय को बाहरी आडम्बर पर निडर होकर फटकार लगाई थी।
कबीर कीर्ति मंदिर बनारस से आये महंत ज्ञानप्रकाश शास्त्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया आपसी मतभेद में उलझी है। इसके निराकरण के लिए कबीर साहेब की वाणी को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
कबीर चौरा मठ मगहर के संत अरविंद दास शास्त्री ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने जाती, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर मानवता व आपसी सद्भाव की बात की थी। आज भी समाज को आदर्श बनाने के लिए उनकी बातों पर अमल किया जाना जरूरी है।
प्रभात फेरी के बाद निशान साहेब का हुआ स्वागत
संतकबीरनगर। गुरूद्वारा खलीलाबाद से मंगलवार की सुबह श्री गुरु तेग बहादुर महाराज के शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में चौथे दिन प्रभातफेरी निकाली गई। इस दौरान सिख समाज के लोगों ने श्री गुरूतेग बहादुर को याद किया।
गुरुद्वारा से निकली प्रभात फेरी में शामिल लोग शबद कीर्तन करते हुए मुखलिसपुर तिराहा, मेंहदावल तिराहा होते हुए बैंक चौराहा पर पहुंची। जहा निशान साहेब का स्वागत किया गया। इसके बाद प्रभात फेरी वहां से वापस गुरुद्वारे पहुंची। जहां अरदास के बाद प्रभात फेरी का समापन हुआ। इस अवसर पर रजिंदर कौर, हरजिंदर कौर, बीबी बलवंत कौर, नीलम कौर, परमजीत कौर, गुरविंदर कौर, मनजीत कौर, शरणजीत कौर, रवनीत कौर, जोगिंदर कौर, सीमा कौर, रविंदर कौर, गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह, त्रिलोचन सिंह, जसबीर सिंह, परविंदर सिंह, मनदीप सिंह, राजपाल सिंह, सतविंदर सिंह, अमरजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, राजपाल सहित अन्य मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत सद्गुरु समाधि के सामने पंथ श्री हजूर अर्धनाम साहेब व संतों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पंथ श्री हजूर अर्धनाम साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब ने गुरु शिष्य की परंपरा को जीवित रखा। गुरु ही अंधकार से उजाले की तरफ ले जाने का कार्य करता है। यहां सभी धर्म संप्रदाय के लोग दर्शन करने आते हैं। आगे कहा कि किताबी ज्ञान सिर्फ मस्तिष्क में रहता है। जब तक उसे हृदय में उतारा न जाए वह दो कौड़ी का होता है। जो मगहर में मृत्यु पाता है उसे नरक मिलता है और काशी में स्वर्ग मिलता है। उन्होंने मगहर में प्राण त्यागकर इस मिथ्या को तोड़ने का कार्य किया। नहीं तो कोई यहां बसना और मरना नहीं चाहता। जिसे शास्त्र, पंडित, बड़े लोगों ने निकाला जबकि उसे सद्गुरु कबीर ने आश्रय दिया। लहरतारा वाराणसी से पधारे संत धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर के 500 वें अंतर्ध्यान दिवस का बड़ा महत्व है। मगहर धाम पूरी दुनिया में मशहूर है। यह कौमी एकता का प्रतीक है। यहां आकर सभी दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं। यह स्थान कबीर पंथियों के लिए तीर्थस्थान है। महंत विचार दास ने कहा कि सद्गुरु कबीर की बाणी दिलों को दिलों से जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने सदैव मानवता, सांप्रदायिक एकता की बात कही है। उनके कहे हुए एक-एक शब्द पर आज रिसर्च हो रहे हैं। वह जीवन भर कुरीतियों से लड़ते रहे। इस मौके पर महंत ज्ञानप्रकाश शास्त्री, गुड्डू वर्मा, महंत देवेंद्र दास सूरत गुजरात, महंत जीवन दास, द्वारिका दास, सिन्धुमुनि साहेब, महंत शिवमुनि दास, परेम सागर दास जामनगर गुजरात आदि लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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भंडारे का आयोजन हुआ
मगहर। सद्गुरु कबीर के 500 वें वर्ष में अंतर्ध्यान दिवस पर एक विशाल भंडार का आयोजन भी किया गया। जिसमें राजस्थान, लखनऊ, बिहार, बनारस, गोंडा, हरियाणा, गोरखपुर, चौरी चौरा सहित विभिन गांवों से आए हुए कबीर पंथी साधुओं के अलावा स्थानीय लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस भंडारे का आयोजन राजस्थान प्रांत से आए संत छगनदास के द्वारा किया गया। इस मौके पर अन्तर्राष्ट्रीय सन्त पंथ हजूर अर्धनाम साहेब, महंत विचार दास, वेद प्रकाश चौबे, डॉक्टर हरिशरण शास्त्री, संत केशव दास, संत अरविंद दास शास्त्री, संत प्रेम साहेब, देवेंद्र साहेब, राजेश बर्मा, अवधेश सिंह, बनार्जीलाल अग्रहरि, विनोद दास, संत रामसरन दास, विनोद दास, रामलखनदास उर्फ लालबाबा, दिनेश कुमार, संपूर्णानंद त्रिपाठी, विजय तिवारी, राजेश कुमार चंद, मकसूद खान, नागेंद्र पासवान, रविप्रकाश पांडेय, विनोद दास, धर्मदेव साहेब, कन्हैया दास आदि मौजूद थे।
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कबीर वाणी लोगों को अंधेरे से बाहर निकालती है
मगहर। संतकबीर की निर्वाण स्थली मगहर के कबीर चौरा परिसर में मंगलवार को 500वें अंतर्ध्यान वर्ष के मौके पर जुटे संतों ने कबीर वाणी को सदमार्ग का रास्ता बताया। संतों का कहना था कि वाह्य आडम्बर व धार्मिक विवादों को समाप्त करने के लिए कबीर वाणी जरूरी है।
गुजरात प्रांत के जामनगर से आये महंत प्रेमसागर साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया था। उनकी वाणी हमें अंधेरे से उजाले की तरफ ले जाती है।
लहरतारा वाराणसी से आये महंत धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने गुरु शिष्य की परंपरा को मजबूत किया। सद्गुरु कबीर ने सदैव दोनों साम्प्रदाय को बाहरी आडम्बर पर निडर होकर फटकार लगाई थी।
कबीर कीर्ति मंदिर बनारस से आये महंत ज्ञानप्रकाश शास्त्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया आपसी मतभेद में उलझी है। इसके निराकरण के लिए कबीर साहेब की वाणी को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
कबीर चौरा मठ मगहर के संत अरविंद दास शास्त्री ने कहा कि सद्गुरु कबीर ने जाती, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर मानवता व आपसी सद्भाव की बात की थी। आज भी समाज को आदर्श बनाने के लिए उनकी बातों पर अमल किया जाना जरूरी है।
प्रभात फेरी के बाद निशान साहेब का हुआ स्वागत
संतकबीरनगर। गुरूद्वारा खलीलाबाद से मंगलवार की सुबह श्री गुरु तेग बहादुर महाराज के शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में चौथे दिन प्रभातफेरी निकाली गई। इस दौरान सिख समाज के लोगों ने श्री गुरूतेग बहादुर को याद किया।
गुरुद्वारा से निकली प्रभात फेरी में शामिल लोग शबद कीर्तन करते हुए मुखलिसपुर तिराहा, मेंहदावल तिराहा होते हुए बैंक चौराहा पर पहुंची। जहा निशान साहेब का स्वागत किया गया। इसके बाद प्रभात फेरी वहां से वापस गुरुद्वारे पहुंची। जहां अरदास के बाद प्रभात फेरी का समापन हुआ। इस अवसर पर रजिंदर कौर, हरजिंदर कौर, बीबी बलवंत कौर, नीलम कौर, परमजीत कौर, गुरविंदर कौर, मनजीत कौर, शरणजीत कौर, रवनीत कौर, जोगिंदर कौर, सीमा कौर, रविंदर कौर, गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह, त्रिलोचन सिंह, जसबीर सिंह, परविंदर सिंह, मनदीप सिंह, राजपाल सिंह, सतविंदर सिंह, अमरजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, राजपाल सहित अन्य मौजूद रहे।