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साहब ! अभी मैं जिंदा हूं..
Sat, 06 Apr 2019 12:07 AM IST
राकेश पांडेय
Santkabir Nagar
Santkabir Nagar
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sat, 06 Apr 2019 12:07 AM IST
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अपना पक्ष रखने एसडीएम के पास पहुंचे शेषमन।
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। सरकारी अभिलेखों में छह वर्ष पहले ही मृत बताकर भाई ने जमीन अपने नाम दर्ज करा ली थी। शुक्रवार को जिस शख्स को मृत बताया गया था वह एसडीएम कोर्ट में पेश हुआ, और कहा, साहब! मैं जिंदा हूं। शेषमन ने खुद केे जीवित होने का सुबूत देते हुए अभिलेखों में दर्ज नाम बदलने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। एसडीएम ने बताया कि इस प्रकरण में विधिक कार्रवाई चल रही है।
खलीलाबाद तहसील के उमिला गांव निवासी शेषमन कई वर्ष पहले घर छोड़कर कुरुक्षेत्र चले गए थे। वहां साधु मंडली के साथ रह रहे शेषमन का अपने रिश्तेदारों से संपर्क बना रहा। शेषमन के अनुसार तीन मार्च 2013 को उनके सगे भाई ने अभिलेखों में मृत बताकर लेखपाल से उनके हिस्से की जमीन अपने नाम वरासत करा ली। 19 अप्रैल 2014 को यह जमीन गांव के ही अन्य व्यक्ति को बेंच दी गई। जमीन बिक्री के चार वर्ष बाद रिश्तेदारों के माध्यम से इसकी जानकारी शेषमन को हुई तो उन्होंने नायब तहसीलदार कोर्ट में खुद को जीवित साबित करने के लिए मुकदमा दाखिल किया। नायब तहसीलदार ने 23 अप्रैल 2014 को शेषमन को जीवित मान लिया लेकिन विपक्षियों ने शेषमन को फर्जी बताया। मामला एसडीएम सदर एसपी सिंह के सामने आया। शुक्रवार दोपहर में शेषमन एसडीएम के चैंबर में पहुंचे और बोले कि साहब मैं शेषमन हूं और अभी जिंदा हूं।
पहचान के लिए ढाई घंटे चला सवाल-जवाब
खुद को जिंदा साबित करने एसडीएम के सामने पहुंचे शेषमन को करीब ढाई घंटे तक अपने जीवित होने का प्रमाण देना पड़ा। एसडीएम ने उनसे कई घुमावदार सवाल किए। गांव और परिवार की पहचान से जुड़े कई सवाल किए गए। शेषमन का सबका सटीक जवाब दिया। इससे एसडीएम संतुष्ट नजर आए।
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शेषमन को न्याय मिलेगा : एसडीएम
एसडीएम सदर एसपी सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में नायब तहसीलदार की कोर्ट शेषमन को जीवित मान चुकी है। उनके पास मामले में अपील की गई थी। प्रकरण से जुड़ा दूसरा पक्ष लालमन के जीवित होने की बात से इंकार कर रहा था। लालमन ने खुद को जीवित साबित करने के लिए पर्याप्त सुबूत दिए। गांव के प्रधान व अन्य लोगों से भी पुष्टि कराई गई। अब इस मामले में शेषमन को न्याय जरूर मिलेगा।
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खलीलाबाद तहसील के उमिला गांव निवासी शेषमन कई वर्ष पहले घर छोड़कर कुरुक्षेत्र चले गए थे। वहां साधु मंडली के साथ रह रहे शेषमन का अपने रिश्तेदारों से संपर्क बना रहा। शेषमन के अनुसार तीन मार्च 2013 को उनके सगे भाई ने अभिलेखों में मृत बताकर लेखपाल से उनके हिस्से की जमीन अपने नाम वरासत करा ली। 19 अप्रैल 2014 को यह जमीन गांव के ही अन्य व्यक्ति को बेंच दी गई। जमीन बिक्री के चार वर्ष बाद रिश्तेदारों के माध्यम से इसकी जानकारी शेषमन को हुई तो उन्होंने नायब तहसीलदार कोर्ट में खुद को जीवित साबित करने के लिए मुकदमा दाखिल किया। नायब तहसीलदार ने 23 अप्रैल 2014 को शेषमन को जीवित मान लिया लेकिन विपक्षियों ने शेषमन को फर्जी बताया। मामला एसडीएम सदर एसपी सिंह के सामने आया। शुक्रवार दोपहर में शेषमन एसडीएम के चैंबर में पहुंचे और बोले कि साहब मैं शेषमन हूं और अभी जिंदा हूं।
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पहचान के लिए ढाई घंटे चला सवाल-जवाब
खुद को जिंदा साबित करने एसडीएम के सामने पहुंचे शेषमन को करीब ढाई घंटे तक अपने जीवित होने का प्रमाण देना पड़ा। एसडीएम ने उनसे कई घुमावदार सवाल किए। गांव और परिवार की पहचान से जुड़े कई सवाल किए गए। शेषमन का सबका सटीक जवाब दिया। इससे एसडीएम संतुष्ट नजर आए।
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शेषमन को न्याय मिलेगा : एसडीएम
एसडीएम सदर एसपी सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में नायब तहसीलदार की कोर्ट शेषमन को जीवित मान चुकी है। उनके पास मामले में अपील की गई थी। प्रकरण से जुड़ा दूसरा पक्ष लालमन के जीवित होने की बात से इंकार कर रहा था। लालमन ने खुद को जीवित साबित करने के लिए पर्याप्त सुबूत दिए। गांव के प्रधान व अन्य लोगों से भी पुष्टि कराई गई। अब इस मामले में शेषमन को न्याय जरूर मिलेगा।