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घाघरा के जलस्तर में कमी, समस्याएं बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:29 PM IST
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चौबीस घंटे में चार सेंटीमीटर कम हुआ पानी, 16 गांव हैं बाढ़ की चपेट में, चार गांवों के लोगों ने एमबीडी बांध व रिंग बांध पर ले रखी है शरण।
- फोटो : अमर उजाला
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हैंसर। बुधवार को खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा नदी के जलस्तर में 24 घंटे में चार सेंटीमीटर की कमी आई है। नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार की शाम को 79.34 सेंटीमीटर पर आ गया था। हालांकि इस मामूली कमी से बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं कम नहीं हुई हैं। घर छोड़ कर बांध पर शरण लिए लोग पेट भरने के लिए प्रशासन के मदद की बाट जोह रहे हैं।
घाघरा नदी के बाढ़ के कारण गुनवतिया, चकदहा, ढोलबजा और सियर कला गांव के 100 से अधिक परिवार मवेशी और बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं के साथ बंधे पर खुले आसमान के नीचे शरण लिए हुए हैं। वृद्धा सरस्वती देवी ने बताया कि चार दिन से एक वक्त भोजन मिल रहा है।
पांच वर्ष के बच्चे को गोद में लिए महाबल ने बताया कि रात में बारिश के समय भीग रहे थे। सूर्यबली, जंगीलाल, रामसंवारे, पतिराजी आदि का कहना था कि घरों में पानी भरा हुआ है। जलस्तर कम होने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में एक पखवारा तक का वक्त लगेगा। लोगों का कहना है कि पशुओं के लिए चारा का भी संकट है। गंदगी के चलते बीमारी फैलने की संभावना भी बढने लगी है।
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इस संबंध में तहसीलदार वंदना पांडेय का कहना है कि राहत सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। इन लोगों के लिए सामूहिक रूप से भोजन बनवाने की व्यवस्था की जा रही थी, परंतु उन लोगों ने ही इससे इंकार कर दिया था। सबके लिए लंच पैकेट का प्रबंध कराया जा रहा है।
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घाघरा नदी के बाढ़ के कारण गुनवतिया, चकदहा, ढोलबजा और सियर कला गांव के 100 से अधिक परिवार मवेशी और बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं के साथ बंधे पर खुले आसमान के नीचे शरण लिए हुए हैं। वृद्धा सरस्वती देवी ने बताया कि चार दिन से एक वक्त भोजन मिल रहा है।
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पांच वर्ष के बच्चे को गोद में लिए महाबल ने बताया कि रात में बारिश के समय भीग रहे थे। सूर्यबली, जंगीलाल, रामसंवारे, पतिराजी आदि का कहना था कि घरों में पानी भरा हुआ है। जलस्तर कम होने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में एक पखवारा तक का वक्त लगेगा। लोगों का कहना है कि पशुओं के लिए चारा का भी संकट है। गंदगी के चलते बीमारी फैलने की संभावना भी बढने लगी है।
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इस संबंध में तहसीलदार वंदना पांडेय का कहना है कि राहत सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। इन लोगों के लिए सामूहिक रूप से भोजन बनवाने की व्यवस्था की जा रही थी, परंतु उन लोगों ने ही इससे इंकार कर दिया था। सबके लिए लंच पैकेट का प्रबंध कराया जा रहा है।