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स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का हाल
Updated Wed, 28 Nov 2018 12:42 AM IST
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आंकड़ों में खेल, ओडीएफ की घोषणा में पेंच
फोटो नंबर- 64- ददरा गांव में शौचालय निर्माण कार्य की जांच करते सीडीओ
फोटो नंबर-65- सेमरियांवा ब्लॉक में शौचालय निर्माण की जांच करते डीपीआरओ
जिले की 794 ग्राम पंचायतों में बनने हैं 2.33 लाख शौचालय
एमआईएस डॉटा में हो गया निर्माण कार्य, सत्यापन में मिल रहा अधूरा
जियो टैगिंग के आंकड़ों पर भी अफसरों को नहीं रहा भरोसा
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कागजी आंकड़े दुरूस्त कर जिले को ओडीएफ घोषित कराने की प्रशासनिक हड़बड़ी ही अफसरों के लिए मुसीबत बन गई है। पंचायतीराज विभाग ने एमआईएस डाटा फीड करते हुए सभी सूचीबद्घ लोगों के शौचालय निर्माण की सूचना दे दी। इसी आधार पर सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने का प्रस्ताव भी दे दिया गया। जब इनका भौतिक सत्यापन शुरू हुआ तो तमाम गांवों में अब भी लक्ष्य अपूर्ण है। अब जल्दी-जल्दी आंकड़े दुरूस्त किए जा रहे हैं।
वर्ष-2012 में जिले के सभी 794 ग्राम पंचायतों के 1605 राजस्व गांवों में शौचालय निर्माण की जानकारी के लिए शासन ने बेस लाइन सर्वे कराया था। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार उस वक्त जिले के तीन लाख 33 हजार परिवारों में से 99 हजार परिवारों में शौचालय था। शेष बचे 2.34 लाख परिवारों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय बनाना था। इस सूचीबद्घ सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही वर्ष 2014 से वृहद स्तर पर शौचालय निर्माण का अभियान शुरू हुआ। शुरूआत में शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली 12 हजार रुपये की धनराशि संख्या के आधार पर सीधे ग्राम पंचायतों को भेज दी गई। इस साल सरकार ने दो अक्तूबर को जिले को ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य तय किया। कार्य जल्दी पूरा दिखाने की हड़बड़ी में ग्राम पंचायतों के अलावा व्यक्तिगत स्तर पर भी लाभार्थियों के खाते में रुपये भेज दिए गए। जितने रुपये भेजे गए उसके हिसाब से शौचालय निर्माण शुरू मानकर डीपीआरओ कार्यालय ने अपनी प्रगति रिपोर्ट तैयार कर ली। परंतु शासन ने प्रगति रिपोर्ट की पुष्टि के लिए जब इसकी जियो टैगिंग (संपन्न हुए कार्य का फोटोग्राफ्स) का आंकड़ा मांगा शतो हालत बिगड़ गई। अक्तूबर महीने में एमआईसी डॉटा में जहां शति प्रतिशत निर्माण दिखाया जा रहा था, वहीं जियो टैगिंग में आंकड़ा 70 प्रतिशत तक ही पहुंचा।
कमिश्नर ने पकड़ ली गलती
पिछले सप्ताह कलेक्ट्रेट में जब मंडलायुक्त की अध्यक्षता में इसकी समीक्षा बैठक हुई तो उसमें पंचायतीराज विभाग ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए उसे देखते ही कमिश्नर नाराज हो गए। कमिश्नर ने जियो टैगिंग में भी करीब 44 हजार फोटो नाट अप्रूव्ड होने पर नाराजगी जताई। नाट अप्रूव्ड फोटो की यह संख्या उन लाभार्थियों की थी जिनके घर शौचालय निर्माण की संबंधित फोटो पर अफसरों को भी संदेह था और सत्यापन के बाद इनकी पुष्टि कराई जानी थी।
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दो दिन में करना था सत्यापन, बीत गया हफ्ता
शौचालय निर्माण की एमआईएस डॉटा व जियो टैगिंग का सत्यापन कराने के लिए मंडलायुक्त ने दो दिन का वक्त दिया था। परंतु पूरा सप्ताह बीतने के बाद भी अभी अफसर दौड़ लगा रहे हैं। बीते रविवार को सीडीओ हाकिम सिंह ददरा गांव का सत्यापन करने पहुंचे तो कई जगह अभी निर्माण कार्य चल रहा था। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी सांथा ब्लाक के जिन भी गांवों में गए तो वहां निर्माण कार्य चल ही रहा था। इसके अलावा अन्य अफसरों ने भी जिन गांवों की जांच की वहां आंकड़े व हकीकत में अंतर नजर आया।
सत्यापन के बाद ही ओडीएफ होगा जिला
जिले की सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ(खुले में शौच मुक्त) घोषित करने के लिए डीपीआरओ कार्यालय ने अपनी संस्तुति भेज दी है। परंतु इसके लिए आंकड़ों का सत्यापन जरूरी है। सत्यापन कार्य में 128 अफसरों की ड्यूटी लगी है। डीएम व सीडीओ लगातार मॉनीटरिंग की बात कह रहे हैं लेकिन अभी आंकड़े व हकीकत में अंतर खत्म नहीं हो रहा है।
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जल्दी पूरा हो जाएगा कार्य-डीपीआरओ
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इन गांवों के सत्यापन के लिए 128 अफसर लगे हैं। इसी महीने सत्यापन का कार्य पूर्ण करा लिया जाएगा। इनमें से कुछ गांवों का मंडलीय टीम भी सत्यापन करेगी। इसके बाद जिले को ओडीएफ घोषित किया जाएगा।
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उदयभान त्रिपाठी
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फोटो नंबर- 64- ददरा गांव में शौचालय निर्माण कार्य की जांच करते सीडीओ
फोटो नंबर-65- सेमरियांवा ब्लॉक में शौचालय निर्माण की जांच करते डीपीआरओ
जिले की 794 ग्राम पंचायतों में बनने हैं 2.33 लाख शौचालय
एमआईएस डॉटा में हो गया निर्माण कार्य, सत्यापन में मिल रहा अधूरा
जियो टैगिंग के आंकड़ों पर भी अफसरों को नहीं रहा भरोसा
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कागजी आंकड़े दुरूस्त कर जिले को ओडीएफ घोषित कराने की प्रशासनिक हड़बड़ी ही अफसरों के लिए मुसीबत बन गई है। पंचायतीराज विभाग ने एमआईएस डाटा फीड करते हुए सभी सूचीबद्घ लोगों के शौचालय निर्माण की सूचना दे दी। इसी आधार पर सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने का प्रस्ताव भी दे दिया गया। जब इनका भौतिक सत्यापन शुरू हुआ तो तमाम गांवों में अब भी लक्ष्य अपूर्ण है। अब जल्दी-जल्दी आंकड़े दुरूस्त किए जा रहे हैं।
वर्ष-2012 में जिले के सभी 794 ग्राम पंचायतों के 1605 राजस्व गांवों में शौचालय निर्माण की जानकारी के लिए शासन ने बेस लाइन सर्वे कराया था। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार उस वक्त जिले के तीन लाख 33 हजार परिवारों में से 99 हजार परिवारों में शौचालय था। शेष बचे 2.34 लाख परिवारों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय बनाना था। इस सूचीबद्घ सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही वर्ष 2014 से वृहद स्तर पर शौचालय निर्माण का अभियान शुरू हुआ। शुरूआत में शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली 12 हजार रुपये की धनराशि संख्या के आधार पर सीधे ग्राम पंचायतों को भेज दी गई। इस साल सरकार ने दो अक्तूबर को जिले को ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य तय किया। कार्य जल्दी पूरा दिखाने की हड़बड़ी में ग्राम पंचायतों के अलावा व्यक्तिगत स्तर पर भी लाभार्थियों के खाते में रुपये भेज दिए गए। जितने रुपये भेजे गए उसके हिसाब से शौचालय निर्माण शुरू मानकर डीपीआरओ कार्यालय ने अपनी प्रगति रिपोर्ट तैयार कर ली। परंतु शासन ने प्रगति रिपोर्ट की पुष्टि के लिए जब इसकी जियो टैगिंग (संपन्न हुए कार्य का फोटोग्राफ्स) का आंकड़ा मांगा शतो हालत बिगड़ गई। अक्तूबर महीने में एमआईसी डॉटा में जहां शति प्रतिशत निर्माण दिखाया जा रहा था, वहीं जियो टैगिंग में आंकड़ा 70 प्रतिशत तक ही पहुंचा।
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कमिश्नर ने पकड़ ली गलती
पिछले सप्ताह कलेक्ट्रेट में जब मंडलायुक्त की अध्यक्षता में इसकी समीक्षा बैठक हुई तो उसमें पंचायतीराज विभाग ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए उसे देखते ही कमिश्नर नाराज हो गए। कमिश्नर ने जियो टैगिंग में भी करीब 44 हजार फोटो नाट अप्रूव्ड होने पर नाराजगी जताई। नाट अप्रूव्ड फोटो की यह संख्या उन लाभार्थियों की थी जिनके घर शौचालय निर्माण की संबंधित फोटो पर अफसरों को भी संदेह था और सत्यापन के बाद इनकी पुष्टि कराई जानी थी।
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दो दिन में करना था सत्यापन, बीत गया हफ्ता
शौचालय निर्माण की एमआईएस डॉटा व जियो टैगिंग का सत्यापन कराने के लिए मंडलायुक्त ने दो दिन का वक्त दिया था। परंतु पूरा सप्ताह बीतने के बाद भी अभी अफसर दौड़ लगा रहे हैं। बीते रविवार को सीडीओ हाकिम सिंह ददरा गांव का सत्यापन करने पहुंचे तो कई जगह अभी निर्माण कार्य चल रहा था। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी सांथा ब्लाक के जिन भी गांवों में गए तो वहां निर्माण कार्य चल ही रहा था। इसके अलावा अन्य अफसरों ने भी जिन गांवों की जांच की वहां आंकड़े व हकीकत में अंतर नजर आया।
सत्यापन के बाद ही ओडीएफ होगा जिला
जिले की सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ(खुले में शौच मुक्त) घोषित करने के लिए डीपीआरओ कार्यालय ने अपनी संस्तुति भेज दी है। परंतु इसके लिए आंकड़ों का सत्यापन जरूरी है। सत्यापन कार्य में 128 अफसरों की ड्यूटी लगी है। डीएम व सीडीओ लगातार मॉनीटरिंग की बात कह रहे हैं लेकिन अभी आंकड़े व हकीकत में अंतर खत्म नहीं हो रहा है।
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जल्दी पूरा हो जाएगा कार्य-डीपीआरओ
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि सभी 794 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इन गांवों के सत्यापन के लिए 128 अफसर लगे हैं। इसी महीने सत्यापन का कार्य पूर्ण करा लिया जाएगा। इनमें से कुछ गांवों का मंडलीय टीम भी सत्यापन करेगी। इसके बाद जिले को ओडीएफ घोषित किया जाएगा।
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उदयभान त्रिपाठी