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स्कूलों में लगाए गए पौधों की होगी जियो टैगिंग
Tue, 28 May 2019 11:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
Santkabirnagar
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 May 2019 11:01 PM IST
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आम का पेड़
- फोटो : अमर उजाला
मेंहदावल। बीते वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लगाए गए पौधों की जियो टैगिंग शुरू हो गई है। इसके लिए वन विभाग ने एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया है। प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप के माध्यम से पौधों की जियो टैगिंग होने से पौधों की वास्तविक स्थिति का आकलन हो सकेगा।
बीईओ अशोक राय ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर विद्यालय में पांच-पांच पौधे लगाए गए थे। इन पौधों की स्थिति जानने के लिए जियो टैगिंग होनी है। इसके लिए वन विभाग ने एक खास ऐप तैयार किया है। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किए जाने का निर्देश न्याय पंचायत समन्वयकों को दिया गया है। इस ऐप के माध्यम से पौध रोपण स्थल का फोटो लिया जाएगा। ऐप स्वत: ही अक्षांश और देशांतर के साथ उसका लोकेशन अपडेट कर देगा। इस तरह प्रत्येक स्थल व पौधों की जियो टैगिंग हो जाएगी। इसके बाद वन विभाग पौधों की वास्तविक स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा। जियो टैगिंग के लिए तैयार किए गए ऐप के लिए अन्य विभागों की तरह ही बेसिक शिक्षा विभाग को भी अलग यूजर आइडी व पासवर्ड मिला है। इस बारे में क्षेत्रीय वन रक्षक एसके सिंह ने कहा कि इससे लगाए गए पौधों की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जा सकेगा। बचे पेड़-पौधों के मूल्यांकन के बाद उनका संरक्षण करने का प्रयास किया जाएगा।
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बीईओ अशोक राय ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर विद्यालय में पांच-पांच पौधे लगाए गए थे। इन पौधों की स्थिति जानने के लिए जियो टैगिंग होनी है। इसके लिए वन विभाग ने एक खास ऐप तैयार किया है। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किए जाने का निर्देश न्याय पंचायत समन्वयकों को दिया गया है। इस ऐप के माध्यम से पौध रोपण स्थल का फोटो लिया जाएगा। ऐप स्वत: ही अक्षांश और देशांतर के साथ उसका लोकेशन अपडेट कर देगा। इस तरह प्रत्येक स्थल व पौधों की जियो टैगिंग हो जाएगी। इसके बाद वन विभाग पौधों की वास्तविक स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा। जियो टैगिंग के लिए तैयार किए गए ऐप के लिए अन्य विभागों की तरह ही बेसिक शिक्षा विभाग को भी अलग यूजर आइडी व पासवर्ड मिला है। इस बारे में क्षेत्रीय वन रक्षक एसके सिंह ने कहा कि इससे लगाए गए पौधों की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जा सकेगा। बचे पेड़-पौधों के मूल्यांकन के बाद उनका संरक्षण करने का प्रयास किया जाएगा।
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