फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   संभलिए, वर्ना गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे

संभलिए, वर्ना गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे

Sat, 12 Jan 2019 12:24 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jan 2019 12:24 AM IST
विज्ञापन
संभलिए, वर्ना गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे
संभलिए, वर्ना गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे
विज्ञापन

जिले का भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है नीचे
सांथा व बेलहर ब्लॉक की सबसे खराब हालत
कम बारिश व भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन से बिगड़ रही स्थिति
फोटो
उदयभान त्रिपाठी
संतकबीरनगर। पंद्रहवीं शताब्दी में संत कबीर ने मगहर पहुंचकर इस क्षेत्र को सूखा से उबारा था। अब पांच सौ बरस बाद फिर वही हालात उत्पन्न होने लगे हैं। जिले का भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है। चार महीने में ही जिले का भूगर्भ जलस्तर करीब 20 फीट नीचे चला गया है। सांथा व बेलहर ब्लॉक में कई इंडिया मार्का हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए अतिरिक्त पाइप लगाना पड़ा है। अगर यही हालात रहे तो गर्मी के दिनों में जिले को पानी का गंभीर संकट झेलना पड़ेगा। एक तरफ राप्ती व दूसरी तरफ घाघरा नदी से घिरे संतकबीरनगर जिले के मध्य में आमी, कठिनइया व कुआनो नदियां बहती हैं। कम बारिश व अन्य कारणों से आमी, कठिनइया व कुआनो की हालत दयनीय हो चुकी है। करीब 17 लाख की आबादी वाले जनपद में पेयजल के अलावा खेतों की सिंचाई के लिए भी अत्यधिक मात्रा में भूगर्भ जल का दोहन हो रहा है। इसके चलते जलस्तर नीचे जा रहा है। आमतौर पर 15 से 20 फीट पर मिलने वाला भूगर्भ जल अब 35 फीट पर मिल रहा है। शुद्घ पेयजल के लिए जिले की 794 ग्राम पंचायतों में करीब 27 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। आमतौर पर इनकी बोरिंग 125 से 150 फीट की गहराई पर होती है। करीब दो लाख घरों में छोटे हैंडपंप लगे हैं। जलस्तर का प्रथम तल नीचे जाने के बाद बोरिंग की गहराई बढ़ानी पड़ रही है। सबसे खराब स्थिति सांथा व बेलहर ब्लॉक में है, जहां के हैंडपंपों को करीब 220 फीट तक रिबोर करना पड़ रहा है। सांथा ब्लॉक के इंदरपुर गांव में कई इंडिया मार्का हैंडपंपों की रिबोरिंग 225 फीट की गहराई तक कराई गई है। भूगर्भ जल को रिचार्ज करने के लिए जलसंचय बेहद जरूरी है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने मनरेगा के तहत गांवों में पुराने तालाबों के जीर्णोद्घार के अलावा नए तालाब खुदवाने के लिए भी प्रयास किया था। करोड़ों रुपये खर्च करके तालाब खुदवाए भी गए, लेकिन इनकी गहराई कम होने व कम बारिश के चलते ये तालाब भी बहुत उपयोगी नहीं हुए। कुओं की घटती संख्या भी जल संचय की राह में बाधक बन गया।

प्रकृति से निकटता ही एकमात्र उपाय
एएच एग्री इंटर कॉलेज दुधारा के भूगोल विभाग के अध्यापक डॉ. संजय द्विवेदी का कहना है कि प्राकृतिक जलस्रोतों के नष्ट होते स्वरूप से स्थिति ज्यादा भयावह हो रही है। सिंचाई के लिए भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन और उस अनुपात में जल संचयन की व्यवस्था नहीं होने से दिक्कतें बढ़ी हैं। इ
विज्ञापन


बोरिंग की गहराई बढ़ाई जा रही है : एक्सईएन
जल निगम के एक्सईएन वीपी सिंह का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से यह स्थिति आ रही है। सांथा व बेलहर ब्लॉक के हैंडपंपों की रिबोरिंग में अतिरिक्त पाइप लगाना पड़ रहा है। ओवरहेड टैंकों के टयूबवेल की बोरिंग अब 400 फीट तक कराई जा रही है। जब तक भूगर्भ जल को रिचार्ज नहीं किया जाएगा, स्थिति संभलने वाली नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोगों का जागरूक होना जरूरी : सीडीओ
ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत तालाबों का जीर्णोद्घार कराया गया है। लोगों को खुद भी जल संचय के प्रति जागरूक होना होगा, तभी स्थिति संभलेगी। इसके अलावा लोगों से वर्षा जल संचय के लिए खेतों की मेड़ ऊंची रखने एवं जलाशयों पर अतिक्रमण नहीं करने की अपील की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed