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बदलते मौसम के बीच बुखार से मासूम समेत दो की मौत
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कुढ़फतेहगढ़/गुन्नौर। जिले में मौसम में आए बदलाव के बाद एक बार फिर मौसमी बुखार का प्रकोप तेज हो गया है। कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र में पचास वर्षीय महिला की बुखार से मौत हो गई, वहीं गुन्नौर में चार साल के मासूम की बुखार ने जान ले ली। मासूम को अप्रशिक्षित चिकित्सक के यहां दिखाया गया था।
नरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में अभी भी बुखार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को थाना कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव चितौरा में रेशमवती (50) पत्नी मोहर सिंह को दो दिन पहले ही बुखार का आया था। परिजनों के अनुसार उन्हें चंदौसी के निजी नर्सिंग होम ले गए। जहां से उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। दिल्ली ले जाते समय रास्ते में ही रेशमवती की मौत हो गई।
मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। गांव के कई लोग अभी भी बुखार के चलते चंदौसी के निजी नर्सिंग होम में भर्ती हैं। अगस्त महीने में बुखार से इस गांव में तीन मौते हो चुकी है। उधर, गुन्नौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के गांव हदूदा उर्फ टिमरूआ निवासी कल्याण के चार साल के पुत्र विकास कुमार को तीन दिन से बुखार आ रहा था। परिजनों ने उसे एक अपंजीकृत डाक्टर के यहां भर्ती कर दिया।
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तभी उसकी कुछ देर में ही अचानक हालत बिगड़ गई। डाक्टर ने बाहर ले जाने की सलाह दी। परिजन जब बच्चे को लेकर अन्य अस्पताल जा रहे थे, तभी रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने अपंजीकृत चिकित्सक पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। हालांकि बाद में परिजन बिना कोई शिकायत किए ही, घर चले गए।
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नरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में अभी भी बुखार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को थाना कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव चितौरा में रेशमवती (50) पत्नी मोहर सिंह को दो दिन पहले ही बुखार का आया था। परिजनों के अनुसार उन्हें चंदौसी के निजी नर्सिंग होम ले गए। जहां से उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। दिल्ली ले जाते समय रास्ते में ही रेशमवती की मौत हो गई।
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मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। गांव के कई लोग अभी भी बुखार के चलते चंदौसी के निजी नर्सिंग होम में भर्ती हैं। अगस्त महीने में बुखार से इस गांव में तीन मौते हो चुकी है। उधर, गुन्नौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के गांव हदूदा उर्फ टिमरूआ निवासी कल्याण के चार साल के पुत्र विकास कुमार को तीन दिन से बुखार आ रहा था। परिजनों ने उसे एक अपंजीकृत डाक्टर के यहां भर्ती कर दिया।
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तभी उसकी कुछ देर में ही अचानक हालत बिगड़ गई। डाक्टर ने बाहर ले जाने की सलाह दी। परिजन जब बच्चे को लेकर अन्य अस्पताल जा रहे थे, तभी रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने अपंजीकृत चिकित्सक पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। हालांकि बाद में परिजन बिना कोई शिकायत किए ही, घर चले गए।