{"_id":"66512c9d5da08d08450391f4","slug":"two-applications-came-for-the-post-of-president-of-chandausi-bar-association-sambhal-news-c-204-1-chn1001-110411-2024-05-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीराम कथा : शिव शंकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीराम कथा : शिव शंकर
Sat, 25 May 2024 05:41 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 25 May 2024 05:41 AM IST
विज्ञापन
चंदौसी (संभल)। शहर के शक्ति नगर स्थित लायंस स्कूल में चल रही श्रीराम कथा में शुक्रवार को श्री राम कथा में जयकारों से पंडाल गूंज उठा। कथा सुनने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
कथा वाचक आचार्य शिवशंकर भारद्वाज ने बताया कि राम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। श्रीराम कथा के बिना काम के फंदे से नहीं बचा जा सकता। भगवान शिव ने काम का समूल नष्ट कर दिया, तो देवताओं ने उनकी वंदना की। जिसके बाद भगवान शिव ने विवाह करने की स्वीकृति दी। जिसके बाद सभी भूत प्रेत उनकी बारात में गए और भोलेनाथ का माता पार्वती के साथ विवाह संपन्न हुआ। श्रद्धा और विश्वास का गठबंधन हुआ। श्रद्धा का समर्पण विश्वास के हाथों होने से कार्तिकेय और गणेश भगवान की उत्पत्ति हुई। कार्तिकेय पुरुषार्थ और गणेश विवेक के प्रतीक है। कथा वाचक ने कहा कि इस कथा को जीवन में ग्रहण करने से मानसिक शांति मिलती है। कथा के बीच बीच में सुंदर सुंदर भजनों का गायन हुआ। जिसे सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं में किया गया। इस मौके पर भूदेव शर्मा, गोपाल अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, मिथलेश शर्मा, डीसी पांडेय, राजेंद्र सिंह, मनवीर सिंह यादव, कृष्णा सिंह, माया श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कथा वाचक आचार्य शिवशंकर भारद्वाज ने बताया कि राम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। श्रीराम कथा के बिना काम के फंदे से नहीं बचा जा सकता। भगवान शिव ने काम का समूल नष्ट कर दिया, तो देवताओं ने उनकी वंदना की। जिसके बाद भगवान शिव ने विवाह करने की स्वीकृति दी। जिसके बाद सभी भूत प्रेत उनकी बारात में गए और भोलेनाथ का माता पार्वती के साथ विवाह संपन्न हुआ। श्रद्धा और विश्वास का गठबंधन हुआ। श्रद्धा का समर्पण विश्वास के हाथों होने से कार्तिकेय और गणेश भगवान की उत्पत्ति हुई। कार्तिकेय पुरुषार्थ और गणेश विवेक के प्रतीक है। कथा वाचक ने कहा कि इस कथा को जीवन में ग्रहण करने से मानसिक शांति मिलती है। कथा के बीच बीच में सुंदर सुंदर भजनों का गायन हुआ। जिसे सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं में किया गया। इस मौके पर भूदेव शर्मा, गोपाल अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, मिथलेश शर्मा, डीसी पांडेय, राजेंद्र सिंह, मनवीर सिंह यादव, कृष्णा सिंह, माया श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन