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संभल के हस्तशिल्प को जेटली ने दी थी टैक्स में राहत
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अब सिर्फ यादें शेष- वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली के साथ बैठे संभल के संजय सांख्यधर। साथ में हैं यूप?
- फोटो : SAMBHAL
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संभल। संभल के हस्तशिल्प को जीएसटी दर में कमी करके एक बड़ी छूट का तोहफा वित्त मंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने दिया था। शायद इसी वजह से हस्तशिल्प उद्यमी उनके निधन से बहुत दुखी हैं। जैसे ही शनिवार की दोपहर उनके निधन की सूचना कई हस्तशिल्प उद्यमियों को मिली तो वह सदमे में आ गए। उद्यमियों ने शोक व्यक्त किया और कहा कि देश ने एक कामयाब नेता खो दिया।
केंद्र सरकार में वित्तमंत्री और रक्षा मंत्री जैसे अहम पदों पर रहे अरुण जेटली वैसे तो कभी संभल नहीं आए लेकिन उनका जुड़ाव संभल से बना हुआ था। संभल निवासी भाजपा पदाधिकारी संजय सांख्यधर और पूनम सांख्यधर का उनके घर आना जाना था। दिल्ली में जब भी संजय सांख्यधर जाते थे वह अरुण जेटली से मिलना नहीं भूलते थे। एक और अहम बात यह थी कि संजय सांख्यधर की भले ही संक्षिप्त मुलाकात हो पर वह हर बार कोई न कोई मुद्दा जरूर उठाते थे।
उन्होंने हस्तशिल्प को जीएसटी मुक्त करने की मांग की। एक मौका तो ऐसा था जब संभल के लोगों में नितिन गर्ग और नीरज अग्रवाल संजय सांख्यधर के साथ थे। संजय सांख्यधर ने हस्तशिल्प पर जीएसटी खत्म न होने की स्थिति में कर की दर कम करने की मांग रखी। इस पर अरुण जेटली ने तत्काल ही जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष को लिखित आदेश दिए और इसके सात दिनों में ही संभल में बनने वाला हड्डी सींग का हस्तशिल्प 28 प्रतिशत से घटकर 12 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आ गया। जबकि मुरादाबाद के हस्तशिल्प को कर की दर घटवाने में छह महीने लग गया था। इसलिए संभल के हस्तशिल्पी अरुण जेटली को हमेशा याद करते हैं।
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संभल में सेना की छावनी बनाने के लिए भी हुई थी पैरवी
संभल। भाजपा नेता संजय सांख्यधर ने संभल जिले में रक्षा विभाग की खाली पड़ी जमीन पर सैनिकों की छावनी बनाए जाने का प्रस्ताव भी जेटली के समक्ष रखा था। इसके अलावा वह संभल के विकास के संबंध में कई और मुद्दों पर अरुण जेटली के माध्यम से पैरवी कर चुके हैं।
संभल सरायतरीन के शानदार हस्तशिल्प को पसंद करते थे जेटली
हस्तशिल्प उद्यमी ताहिर सलामी और कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि यह अरुण जेटली संभल और सरायतरीन में बनने वाले हस्तशिल्प के बारे में जानते थे। जब उनसे मिलकर भाजपा नेता संजय सांख्यधर ने हस्तशिल्प पर टैक्स घटाने की पैरवी की तो उनके मुंह से यही निकला था कि वह संभल व सरायतरीन के शानदार हस्तशिल्प को जानते हैं और पसंद करते हैं। इसमें टैक्स में राहत दिलाएंगे।
इसके बाद ही टैक्स की दर 28 से घटकर 12 प्रतिशत हुई थी। कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि जब जीएसटी लागू हुआ तो सरायतरीन और संभल का अधिकतर हस्तशिल्प आइटम 28 प्रतिशत कर के दायरे में था। जबकि पूरा हस्तशिल्प 18-28 प्रतिशत कर के दायरे में था। इस दर को कम कराने के लिए मुरादाबाद और संभल से प्रयास तो तत्काल शुरू हुए थे पर हस्तशिल्प का टैक्स तो अरुण जेटली ने मुलाकात के सात दिनों में ही कम करा दिया था। इसका नोटिफिकेशन जीएसटी काउंसिल ने जारी किया था। मुरादाबाद के हस्तशिल्प का टैक्स घटाए जाने संबंधी नोटिफिकेशन संभल के करीब छह महीने बात हुआ था। जाहिर है कि संभल से जेटली सीधा लगाव रखते थे। यही नहीं जब अरुण जेटली को संभल के हस्तशिल्प का टैक्स घटाने के लिए ज्ञापन दिया गया तो वह कहीं के लिए घर से निकल रहे थे। उन्होंने बिना किसी इंतजार के चलते-चलते जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष को आदेश कर दिए थे।
संभल के तीर्थों को विकसित कराना चाहते थे जेटली
भाजपा के स्थानीय नेता डा. अरविंद गुप्ता ने बताया कि 2009 से लगातार उनका अरुण जेटली से संपर्क रहा। उनके दिल्ली स्थित घर पर भी आना जाना था। संभल के तीर्थ स्थलों को विकसित करने के लिए उनकी सांसद निधि से हमने धन दिए जाने की मांग उनके समक्ष उठाई थी जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया था लेकिन उसके बाद उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उनसे जुड़ी सैकड़ों यादें हैं जिसके चलते हमें हमेशा उनके न रहने का दुख रहेगा।
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केंद्र सरकार में वित्तमंत्री और रक्षा मंत्री जैसे अहम पदों पर रहे अरुण जेटली वैसे तो कभी संभल नहीं आए लेकिन उनका जुड़ाव संभल से बना हुआ था। संभल निवासी भाजपा पदाधिकारी संजय सांख्यधर और पूनम सांख्यधर का उनके घर आना जाना था। दिल्ली में जब भी संजय सांख्यधर जाते थे वह अरुण जेटली से मिलना नहीं भूलते थे। एक और अहम बात यह थी कि संजय सांख्यधर की भले ही संक्षिप्त मुलाकात हो पर वह हर बार कोई न कोई मुद्दा जरूर उठाते थे।
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उन्होंने हस्तशिल्प को जीएसटी मुक्त करने की मांग की। एक मौका तो ऐसा था जब संभल के लोगों में नितिन गर्ग और नीरज अग्रवाल संजय सांख्यधर के साथ थे। संजय सांख्यधर ने हस्तशिल्प पर जीएसटी खत्म न होने की स्थिति में कर की दर कम करने की मांग रखी। इस पर अरुण जेटली ने तत्काल ही जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष को लिखित आदेश दिए और इसके सात दिनों में ही संभल में बनने वाला हड्डी सींग का हस्तशिल्प 28 प्रतिशत से घटकर 12 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आ गया। जबकि मुरादाबाद के हस्तशिल्प को कर की दर घटवाने में छह महीने लग गया था। इसलिए संभल के हस्तशिल्पी अरुण जेटली को हमेशा याद करते हैं।
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संभल में सेना की छावनी बनाने के लिए भी हुई थी पैरवी
संभल। भाजपा नेता संजय सांख्यधर ने संभल जिले में रक्षा विभाग की खाली पड़ी जमीन पर सैनिकों की छावनी बनाए जाने का प्रस्ताव भी जेटली के समक्ष रखा था। इसके अलावा वह संभल के विकास के संबंध में कई और मुद्दों पर अरुण जेटली के माध्यम से पैरवी कर चुके हैं।
संभल सरायतरीन के शानदार हस्तशिल्प को पसंद करते थे जेटली
हस्तशिल्प उद्यमी ताहिर सलामी और कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि यह अरुण जेटली संभल और सरायतरीन में बनने वाले हस्तशिल्प के बारे में जानते थे। जब उनसे मिलकर भाजपा नेता संजय सांख्यधर ने हस्तशिल्प पर टैक्स घटाने की पैरवी की तो उनके मुंह से यही निकला था कि वह संभल व सरायतरीन के शानदार हस्तशिल्प को जानते हैं और पसंद करते हैं। इसमें टैक्स में राहत दिलाएंगे।
इसके बाद ही टैक्स की दर 28 से घटकर 12 प्रतिशत हुई थी। कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि जब जीएसटी लागू हुआ तो सरायतरीन और संभल का अधिकतर हस्तशिल्प आइटम 28 प्रतिशत कर के दायरे में था। जबकि पूरा हस्तशिल्प 18-28 प्रतिशत कर के दायरे में था। इस दर को कम कराने के लिए मुरादाबाद और संभल से प्रयास तो तत्काल शुरू हुए थे पर हस्तशिल्प का टैक्स तो अरुण जेटली ने मुलाकात के सात दिनों में ही कम करा दिया था। इसका नोटिफिकेशन जीएसटी काउंसिल ने जारी किया था। मुरादाबाद के हस्तशिल्प का टैक्स घटाए जाने संबंधी नोटिफिकेशन संभल के करीब छह महीने बात हुआ था। जाहिर है कि संभल से जेटली सीधा लगाव रखते थे। यही नहीं जब अरुण जेटली को संभल के हस्तशिल्प का टैक्स घटाने के लिए ज्ञापन दिया गया तो वह कहीं के लिए घर से निकल रहे थे। उन्होंने बिना किसी इंतजार के चलते-चलते जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष को आदेश कर दिए थे।
संभल के तीर्थों को विकसित कराना चाहते थे जेटली
भाजपा के स्थानीय नेता डा. अरविंद गुप्ता ने बताया कि 2009 से लगातार उनका अरुण जेटली से संपर्क रहा। उनके दिल्ली स्थित घर पर भी आना जाना था। संभल के तीर्थ स्थलों को विकसित करने के लिए उनकी सांसद निधि से हमने धन दिए जाने की मांग उनके समक्ष उठाई थी जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया था लेकिन उसके बाद उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उनसे जुड़ी सैकड़ों यादें हैं जिसके चलते हमें हमेशा उनके न रहने का दुख रहेगा।