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Sambhal News: मजहब की दीवार लांघ मुंशी इंतजार ने जुनावई में रखी थी रामलीला के नींव

Wed, 07 Oct 2026 01:58 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Wed, 07 Oct 2026 01:58 AM IST
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Transcending religious boundaries, Munshi Intezar laid the foundation of the Ramlila in Junawai.
जुनावई (संभल)। करीब पांच दशक पहले मुंशी इंतजार ने जाति-धर्म की दीवार लांघकर जुनावई में रामलीला के बीज बोए थे। उस दौर में न तो आज जैसी सुविधा थी और न ही तकनीक। था तो सिर्फ हौसला। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम समाज के लोगाें को जोड़कर गांव में रामलीला का मंचन शुरू कराया, जो आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे की मिसाल बनी हुई है। यह धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता का संदेश भी देती है।
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करीब 48 वर्ष पहले जुनावई गुन्नौर तहसील, बदायूं जिले का हिस्सा हुआ करता था। उस समय आसपास के क्षेत्र में दबथरा श्याम गांव की रामलीला का विशेष आकर्षण था। जुनावई सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण रामलीला देखने के लिए दबथरा श्याम जाते थे। मुंशी इंतजार अली चाहते थे कि ग्रामीणों को अपने ही गांव में रामलीला देखने का अवसर मिले। जिस पर उन्होंने रामलीला शुरू कराने का विचार गांव के संभ्रांत लोगों के सामने रखा और एक बैठक बुलाई।
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बैठक में शामिल तत्कालीन ग्राम प्रधान भगवत स्वरूप माथुर, बुद्धि राम श्रीवास्तव, राममूर्ति शर्मा, कांती प्रसाद श्रीवास्तव, मास्टर सत्य प्रकाश शर्मा, मास्टर राधाकृष्ण शर्मा, ज्वाला प्रसाद शर्मा, मास्टर शिवदत्त शर्मा, शब्बीर अली, सलीम शाह, मास्टर सोहनलाल सिंह और महेश शर्मा ने जुनावई में रामलीला का मंचन कराने पर सहमति जताई। इसके बाद युवाओं और ग्रामीणों को जोड़कर कलाकारों का चयन किया गया। ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग और उत्साह के चलते यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही।
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शुरुआती दौर में ग्रामीण निभाते थे भूमिका
रामलीला के शुरुआती दौर में कांती प्रसाद ने कथावाचक की भूमिका निभाई। शब्बीर अली ने निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली। भीमसेन ने रावण, सत्य प्रकाश शर्मा ने हनुमान और महेश शर्मा ने भगवान राम का अभिनय किया। हृदय प्रकाश कुशवाहा ने लक्ष्मण और रामदास ने माता सीता की भूमिका निभाई। राधाकृष्ण शर्मा ढोलक वादन करते थे। पान सिंह यादव और छत्र पाल कुशवाहा हास्य अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन करते थे। बन्ने खां जादू और नकल प्रस्तुत कर दर्शकों को हंसाते थे। उस दौर में मंच, वेशभूषा और प्रकाश व्यवस्था जैसे संसाधन सीमित थे, पर ग्रामीणों के उत्साह से परंपरा जारी रही।
सामाजिक एकता का मंच बनी रामलीला
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भीमसेन के अनुसार, जुनावई में मुस्लिम समाज की आबादी करीब 300 है। गांव की करीब 80 फीसदी आबादी हिंदू समाज की है। इसके बावजूद रामलीला के आयोजन में सभी समुदायों के लोग मिलकर सहयोग करते हैं। कोई आर्थिक सहयोग देता है तो कोई श्रमदान कर व्यवस्थाओं में योगदान देता है। यही सामूहिक भागीदारी जुनावई की रामलीला को एक अलग पहचान देती है। रामलीला से जुड़े लोगों के अनुसार, करीब तीन दशक तक मुस्लिम समाज के कई कलाकारों ने विभिन्न पात्रों का अभिनय किया। इससे रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही। यह सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक सौहार्द का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई।
शब्बीर अली और सलीम शाह का अतुलनीय योगदान
रामलीला के शुरुआती दौर में शिक्षक शब्बीर अली ने करीब 35 वर्षों तक निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली। वह कलाकारों को पात्रों के संवाद, अभिनय और मंच संचालन की बारीकियां समझाते थे। निर्देशन के साथ-साथ वह स्वयं भी रामलीला में विभिन्न पात्रों का अभिनय करते थे। उन्होंने मंदोदरी समेत कई भूमिकाएं निभाईं। करीब 13 वर्ष पूर्व उनके निधन के बाद भी लोग उनके योगदान को सम्मान के साथ याद करते हैं। हास्य कलाकार सलीम शाह ने करीब 20 वर्षों तक रावण के दरबार में मंत्री की भूमिका निभाई। अपने हास्य अभिनय और संवादों से वह दर्शकों को खूब गुदगुदाते थे। उन्होंने करीब 15 वर्षों तक रामलीला मंच के उद्घोषक की जिम्मेदारी भी संभाली।
संरक्षक की जिम्मेदारी निभा रहे मुंशी इंतजार अली के भतीजे सुहैल
रामलीला की नींव रखने वाले मुंशी इंतजार अली के भतीजे सुहैल वर्तमान में रामलीला कमेटी के संरक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह अपने चाचा द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भीमसेन, निदेशक अवनेश कुमार और प्रबंधक मनोज शर्मा समेत अन्य पदाधिकारी आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे हैं। सुहैल के अनुसार, रामलीला केवल एक धार्मिक मंचन नहीं है। यह गांव के लोगों को आपस में जोड़ने और भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम भी है। उनका कहना है कि उनके चाचा ने जिस उद्देश्य से जुनावई में रामलीला की शुरुआत कराई थी, वह परंपरा आज भी कायम है। यह आयोजन गांव की साझा विरासत का प्रतीक है।

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16 अक्तूबर से शुरू होगी रामलीला
इस वर्ष जुनावई में रामलीला का मंचन 16 अक्टूबर से शुरू होगा, जबकि 19 अक्टूबर को राम बरात निकाली जाएगी। रामलीला के आयोजन की जिम्मेदारी कमेटी के अध्यक्ष भीमसेन, प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अविनाश पुरी, उप प्रबंधक जयप्रकाश शर्मा, डायरेक्टर अवनेश कुमार श्रीवास्तव, संचालन संजय कुमार शर्मा, कथावाचक कौजी राम यादव एवं वीरेश शर्मा समेत अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की रहेगी।
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