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Sambhal News: 14 वर्ष की आवाज हुई मौन, जिला संघर्ष समिति की भी आस टूटी
Fri, 08 Aug 2025 01:25 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 08 Aug 2025 01:25 AM IST
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संभल। जिले बनने के बाद उठी संभल में जिला मुख्यालय की मांग अब शांत हो गई। इसके साथ ही इसके लिए संघर्ष कर रहे लोगों की आस भी टूट गई।
28 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भीमनगर के नाम से जिले की घोषणा की थी। इसका भी खूब विरोध किया गया था। बाद में सपा शासन आया तो भीमनगर से नाम बदलकर संभल किया गया। इसके बाद मांग जिला मुख्यालय की उठाई गई। संभल में जिला मुख्यालय बनाया जाए। इसकी मांग हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक सुर में उठा रहे थे। इसी आवाज को आगे बढ़ाने का काम जिला संघर्ष समिति कर रही थी। इस समिति के लोगों ने विरोध प्रदर्शन और सामूहिक तालाबंदी तक कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया तो आठ लोग 19 दिन जेल में रहकर आए। इसके बाद भी आवाज शांत नहीं हुई। लगातार जिला मुख्यालय की आवाज उठती रही। जिला संघर्ष समिति के पदाधिकारी मोहम्मद नाजिम ने बताया कि 14 दिन चंदौसी चौराहे पर घेराव किया था। 84 दिन पुराने अस्पताल में प्रदर्शन किया। 52 दिन एसडीएम कोर्ट के परिसर में धरना देते रहे। इसी तरह से अलग-अलग समय में प्रदर्शन कर जिला मुख्यालय की मांग उठाई लेकिन अब आस टूट गई। इससे शहर मायूस है।
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28 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भीमनगर के नाम से जिले की घोषणा की थी। इसका भी खूब विरोध किया गया था। बाद में सपा शासन आया तो भीमनगर से नाम बदलकर संभल किया गया। इसके बाद मांग जिला मुख्यालय की उठाई गई। संभल में जिला मुख्यालय बनाया जाए। इसकी मांग हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक सुर में उठा रहे थे। इसी आवाज को आगे बढ़ाने का काम जिला संघर्ष समिति कर रही थी। इस समिति के लोगों ने विरोध प्रदर्शन और सामूहिक तालाबंदी तक कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया तो आठ लोग 19 दिन जेल में रहकर आए। इसके बाद भी आवाज शांत नहीं हुई। लगातार जिला मुख्यालय की आवाज उठती रही। जिला संघर्ष समिति के पदाधिकारी मोहम्मद नाजिम ने बताया कि 14 दिन चंदौसी चौराहे पर घेराव किया था। 84 दिन पुराने अस्पताल में प्रदर्शन किया। 52 दिन एसडीएम कोर्ट के परिसर में धरना देते रहे। इसी तरह से अलग-अलग समय में प्रदर्शन कर जिला मुख्यालय की मांग उठाई लेकिन अब आस टूट गई। इससे शहर मायूस है।