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Sambhal News: श्रीमद्भागवत कथा में सुनाया भक्त प्रह्लाद का प्रसंग
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चंदौसी। श्री गीता सत्संग भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को प्रह्लाद चरित्र और समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया गया। बाहर से आई भजन मंडली ने कथा के बीच- बीच में मनमोहक भजनों की प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भजन मंडली के कलाकारों पर पुष्प वर्षा की।
कथा वाचक प्रशांत कुमार शास्त्री मिश्र ने बताया कि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे लेकिन उनका पिता हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना शत्रु समझता था। इसी के चलते वह अपने पुत्र प्रह्लाद को घोर यातनाएं देता था। हर बार भगवान विष्णु अपने भक्त की रक्षा करने के लिए आते थे। एक दिन हिरण्यकश्यप अपने पुत्र को मारने के लिए तलवार उठाता है। तभी वहां खंभा फट गया और उस खंभे में से श्रीहरि भगवान नरसिंह का रूप धारण करके निकले और उन्होंने हिरण्यकश्यप को अपनी गोद में उठाकर नाखूनों से उसके शरीर को चीर दिया।
कथा वाचक ने समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि देवताओं ने दैत्यों के साथ मिलकर मंदराचल पर्वत की मथेनी बनाकर वासुकी नाग की रस्सी से समुद्र मंथन किया, जिसमें 14 रत्न प्राप्त हुए। इस मंथन से निकले हलाहल विष का भगवान शिवजी ने पान करके देवताओं को विजय का आशीर्वाद दिया।
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कथा में कृष्ण पाठक, कृष्णकांत पांडेय, दिवाकर पाठक, ऋचा पाठक, सत्यप्रकाश पाठक, जयशंकर दुबे, आईपी शर्मा, अनुपम शर्मा, मदनलाल शर्मा, यतीश शर्मा, चेतन्य शर्मा, देवकीनंदन, चंद्रप्रकाश गुप्ता, रामाशंकर शर्मा आदि मौजूद रहे।
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शिवभक्तों ने किया भंडारे का आयोजन
चंदौसी। सावन के आखिरी सोमवार से पहले रविवार को शिव भक्तों ने सीता रोड के मूंछों वाले शिव मंदिर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया। इससे पूर्व शिव भक्तों ने मंदिर में विराजमान भगवान शिव की मूर्ति का भव्य शृंगार किया और उनकी विधिविधान से पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, फूल, धतूरा आदि चढ़ाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। फिर आरती कर भगवान शिव को अन्नकूट की सब्जी, हलुआ पूड़ी का भोग लगाकर कन्या को भोजन कराया। इसके बाद भंडारे की शुरुआत की गई। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में शिवभक्त मौजूद रहे। वहीं अन्य तमाम श्रद्धालुओं ने खीर आदि का भोग लगा कर प्रसाद वितरण किया। संवाद
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कथा वाचक प्रशांत कुमार शास्त्री मिश्र ने बताया कि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे लेकिन उनका पिता हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना शत्रु समझता था। इसी के चलते वह अपने पुत्र प्रह्लाद को घोर यातनाएं देता था। हर बार भगवान विष्णु अपने भक्त की रक्षा करने के लिए आते थे। एक दिन हिरण्यकश्यप अपने पुत्र को मारने के लिए तलवार उठाता है। तभी वहां खंभा फट गया और उस खंभे में से श्रीहरि भगवान नरसिंह का रूप धारण करके निकले और उन्होंने हिरण्यकश्यप को अपनी गोद में उठाकर नाखूनों से उसके शरीर को चीर दिया।
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कथा वाचक ने समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि देवताओं ने दैत्यों के साथ मिलकर मंदराचल पर्वत की मथेनी बनाकर वासुकी नाग की रस्सी से समुद्र मंथन किया, जिसमें 14 रत्न प्राप्त हुए। इस मंथन से निकले हलाहल विष का भगवान शिवजी ने पान करके देवताओं को विजय का आशीर्वाद दिया।
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कथा में कृष्ण पाठक, कृष्णकांत पांडेय, दिवाकर पाठक, ऋचा पाठक, सत्यप्रकाश पाठक, जयशंकर दुबे, आईपी शर्मा, अनुपम शर्मा, मदनलाल शर्मा, यतीश शर्मा, चेतन्य शर्मा, देवकीनंदन, चंद्रप्रकाश गुप्ता, रामाशंकर शर्मा आदि मौजूद रहे।
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शिवभक्तों ने किया भंडारे का आयोजन
चंदौसी। सावन के आखिरी सोमवार से पहले रविवार को शिव भक्तों ने सीता रोड के मूंछों वाले शिव मंदिर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया। इससे पूर्व शिव भक्तों ने मंदिर में विराजमान भगवान शिव की मूर्ति का भव्य शृंगार किया और उनकी विधिविधान से पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, फूल, धतूरा आदि चढ़ाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। फिर आरती कर भगवान शिव को अन्नकूट की सब्जी, हलुआ पूड़ी का भोग लगाकर कन्या को भोजन कराया। इसके बाद भंडारे की शुरुआत की गई। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में शिवभक्त मौजूद रहे। वहीं अन्य तमाम श्रद्धालुओं ने खीर आदि का भोग लगा कर प्रसाद वितरण किया। संवाद