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Sambhal News: शीतगृहों की जांच में दिखाई देने लगीं भ्रष्टाचार की जड़ें
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चंदौसी। एआर कोल्ड स्टोर में हादसे के बाद शीतगृहों की जांच में भ्रष्टाचार की जड़े साफ दिखाई देने लगी हैं। जांच में सामने आया है कि शीतगृहों का लाइसेंस रिनुअल हुआ नहीं और उनमें आलू का भंडारण करा दिया है। शीतगृह कहीं ओवरलोड हैं, तो कहीं उनमें आग से बचाव के साधन नहीं हैं। शीतगृहों की बिल्डिंग भी जर्जर हैं। ऐसे हालात में यहां भी एआर कोल्ड स्टोर जैसे हादसा होने का आशंका है।
इन परिस्थितियों में शीतगृहों का संचालन और आलू भंडारण अधिकारियों की मिलीभगत और भ्रष्टाचार के बिना संभव नहीं है। शीतगृह संचालक और अधिकारी मिलकर मानकों की अनदेखी कर लाखों का खेल करते हैं। डीएम के निर्देश पर टीम भी जांच में लगी है और रिपोर्ट जांच पूरी होने के बाद तैयार करने की बात कही जा रही है।
संभल जिले में 55 शीतगृह हैं। हादसे के बाद डीएम ने सभी एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीमों का गठन किया। टीम में एसडीएम, सीओ के साथ एक इंजीनियर को शामिल किया गया। सोमवार को सभी छह टीमों ने 32 शीतगृहों की जांच की। टीमों ने अभी जांच रिपोर्ट तैयार नहीं की है लेकिन सामने आया है कि अधिकांश शीतगृह ऐसे हैं, जिन्होंने अक्तूबर 2022 में लाइसेंस रिनुअल के लिए आवेदन किया था पर उनका लाइसेंस रिनुअल नहीं हुआ। इसकी वजह अग्निशमन विभाग व अन्य विभाग की एनओसी हैं। अग्निशमन के मानक पूरे नहीं है।
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सुरक्षा के मानक अधूरे हैं। बिल्डिंग में अंदर पिलर की संख्या कम हैं व पिलर पतले हैं। जो कभी भी एआर कोल्ड स्टोर जैसे हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रदूषण विभाग की एनओसी अधिकांश के पास नहीं है। बहुत सारे ऐसे मानक हैं, जहां गड़बड़ी ही गड़बड़ी है। कुछ शीतगृह ओवरलोड मिले हैं। उनमें बनाई गई लकड़ी की रैक भी कमजोर है। पल्लेदारों की सुरक्षा के लिए स्टोर परिसर में अमोनिया सूट मय फेसमास्क, गोगल्स तक नहीं हैं।
लाइसेंस रिनुअल किया नहीं और आलू भंडारण की दे दी अनुमति, विभाग के संज्ञान में सबकुछ
जिले में 55 शीतगृह हैं। काफी संख्या में ऐसे शीतगृह हैं, जिनका लाइसेंस रिनुअल नहीं हुआ है या अन्य मानक पूरे नहीं है। इसके बाद भी उद्यान विभाग ने उन्हें आलू भंडारण की अनुमति दे दी। हैरानी की बात है कि लाइसेंस रिनुअल के बिना ही विभाग ने शीतगृहों से उनके भंडारण की रिपोर्ट लेकर पूरा बहीखाता तैयार कर लिया।
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इन परिस्थितियों में शीतगृहों का संचालन और आलू भंडारण अधिकारियों की मिलीभगत और भ्रष्टाचार के बिना संभव नहीं है। शीतगृह संचालक और अधिकारी मिलकर मानकों की अनदेखी कर लाखों का खेल करते हैं। डीएम के निर्देश पर टीम भी जांच में लगी है और रिपोर्ट जांच पूरी होने के बाद तैयार करने की बात कही जा रही है।
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संभल जिले में 55 शीतगृह हैं। हादसे के बाद डीएम ने सभी एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीमों का गठन किया। टीम में एसडीएम, सीओ के साथ एक इंजीनियर को शामिल किया गया। सोमवार को सभी छह टीमों ने 32 शीतगृहों की जांच की। टीमों ने अभी जांच रिपोर्ट तैयार नहीं की है लेकिन सामने आया है कि अधिकांश शीतगृह ऐसे हैं, जिन्होंने अक्तूबर 2022 में लाइसेंस रिनुअल के लिए आवेदन किया था पर उनका लाइसेंस रिनुअल नहीं हुआ। इसकी वजह अग्निशमन विभाग व अन्य विभाग की एनओसी हैं। अग्निशमन के मानक पूरे नहीं है।
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सुरक्षा के मानक अधूरे हैं। बिल्डिंग में अंदर पिलर की संख्या कम हैं व पिलर पतले हैं। जो कभी भी एआर कोल्ड स्टोर जैसे हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रदूषण विभाग की एनओसी अधिकांश के पास नहीं है। बहुत सारे ऐसे मानक हैं, जहां गड़बड़ी ही गड़बड़ी है। कुछ शीतगृह ओवरलोड मिले हैं। उनमें बनाई गई लकड़ी की रैक भी कमजोर है। पल्लेदारों की सुरक्षा के लिए स्टोर परिसर में अमोनिया सूट मय फेसमास्क, गोगल्स तक नहीं हैं।
लाइसेंस रिनुअल किया नहीं और आलू भंडारण की दे दी अनुमति, विभाग के संज्ञान में सबकुछ
जिले में 55 शीतगृह हैं। काफी संख्या में ऐसे शीतगृह हैं, जिनका लाइसेंस रिनुअल नहीं हुआ है या अन्य मानक पूरे नहीं है। इसके बाद भी उद्यान विभाग ने उन्हें आलू भंडारण की अनुमति दे दी। हैरानी की बात है कि लाइसेंस रिनुअल के बिना ही विभाग ने शीतगृहों से उनके भंडारण की रिपोर्ट लेकर पूरा बहीखाता तैयार कर लिया।