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Sambhal News: राजू और दानवीर पर थी परिवार की जिम्मेदारी, गरीबी से पहले से लड़ रहे हैं दोनों के परिवार
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संभल। गरीबी से जूझ रहे परिवार के सहारे बने दोनों युवक हादसे का शिकार हो गए। इससे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। यह बात उन ग्रामीणों की जुबान से कहते हुए सुनाई दी जो बहजोई थाना क्षेत्र के गांव सीकरी भगवंतपुर निवासी राजू (22) और दानवीर (21) के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। राजू अपने परिवार में बड़ा था और परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी थी।
पिता खेतीबाड़ी करते हैं। छोटा भाई सत्यवीर गांव में रहता है। परिवार में तीन बहने हैं। रक्षाबंधन पर राजू का इंतजार हो रहा था। क्योंकि राजू जो कमाकर रुपये लाता उससे ही त्योहार मनाया जाता। हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। मां मुन्नी का रोरो कर बुरा हाल है। दानवीर की पत्नी भूरी और छोटी छोटी तीन बेटियां बेसुध हाल में हैं। बेटियों को इंतजार था कि उनके पिता रक्षाबंधन पर आएंगे। दानवीर के पिता की मौत हो गई है। परिवार में मानसिक रोग से पीड़ित मां कैलाशो, दो बहनें और छोटा भाई भूरा है।
पूरे परिवार की जिम्मेदारी दानवीर पर ही थी। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों ही परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। राजू और दानवीर परिवार के जिम्मेदार थे। गरीबी से लड़ते हुए ही शहर कमाने के लिए गए थे। हादसे ने इन दोनों ही परिवार को तोड़ दिया है। इन दोनों की मौत से गांव का हर व्यक्ति अफसोस करता नजर आया। रक्षाबंधन का त्योहार पर जो खुशी थी वह अब गम में बदल गई है।
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पिता खेतीबाड़ी करते हैं। छोटा भाई सत्यवीर गांव में रहता है। परिवार में तीन बहने हैं। रक्षाबंधन पर राजू का इंतजार हो रहा था। क्योंकि राजू जो कमाकर रुपये लाता उससे ही त्योहार मनाया जाता। हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। मां मुन्नी का रोरो कर बुरा हाल है। दानवीर की पत्नी भूरी और छोटी छोटी तीन बेटियां बेसुध हाल में हैं। बेटियों को इंतजार था कि उनके पिता रक्षाबंधन पर आएंगे। दानवीर के पिता की मौत हो गई है। परिवार में मानसिक रोग से पीड़ित मां कैलाशो, दो बहनें और छोटा भाई भूरा है।
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पूरे परिवार की जिम्मेदारी दानवीर पर ही थी। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों ही परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। राजू और दानवीर परिवार के जिम्मेदार थे। गरीबी से लड़ते हुए ही शहर कमाने के लिए गए थे। हादसे ने इन दोनों ही परिवार को तोड़ दिया है। इन दोनों की मौत से गांव का हर व्यक्ति अफसोस करता नजर आया। रक्षाबंधन का त्योहार पर जो खुशी थी वह अब गम में बदल गई है।
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