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बारिश ने किसानों के सपनों को बिखेरा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 23 Oct 2021 12:45 AM IST
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The rain shattered the dreams of farmers
चंदौसी। बारिश में किसानों के खेतों में खड़ी धान, सरसों, उड़द, बाजरा व अन्य फसलें नष्ट हो गई हैं। खेतों में लहराती फसलों को देखकर कोई किसान बेटी-बेटों की शादी के सपने संजोये था तो किसी ने अच्छे लाभ के लिए अन्य लोगों से कर्ज किया था। इस आपदा ने किसानों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है, उनके सपने तोड़ दिए हैं। जनपद में छोटे-बड़े करीब तीन लाख दस हजार किसान हैं। बारिश में फसल गवां चुके किसान अब उत्पादन के लिए कर्ज लेकर लगाई गई लागत को लेकर चिंतित हैं।
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केस-एक
पांच माह बाद है बेटी की शादी
जुनावई क्षेत्र के गंगा किनारे के गांव बझांगी निवासी सोमवती ने बताया कि उनके पास पांच बीघा भूमि है। पूरी भूमि में सरसों की फसल की बुआई की थी। पहले खेतों में बारिश का पानी भर गया था, अब बाढ़ का पानी भर गया है। सात से आठ क्विंटल सरसों के उत्पादन का अनुमान था। 35 हजार से 40 हजार रुपये की फसल होती थी। पांच माह बाद बेटी की शादी है। सोचा था, शादी में फसल से कुछ मदद मिल जाएगी। फसल नष्ट होने के साथ ही लागत भी चली गई।
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केस-दो
दस हजार रुपये कर्ज लेकर फसल में लगाई थी लागत
गांव पवांसा निवासी सुनील कुमार ने बताया कि छह बीघा भूमि में धान की फसल लगाई थी। रोपाई के बाद फसल की देखरेख के लिए दस हजार रुपये का कर्ज लिया था। खेत में धान की कटाई के बाद बारिश का पानी भर गया। अधिक पानी भरा रहने से खेत में पड़ी धान की फसल अंकुरित होने लगी है। करीब 60 हजार से 65 हजार रुपये के धान के उत्पादन का अनुमान था। लेकिन अब तो लागत भी चली गई। अब मुझे कर्ज की अदायगी की चिंता सता रही है।
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केस-तीन
75 हजार के केसीसी का कर्ज करना था जमा
गांव बनियाखेड़ा निवासी किसान सूरजपाल ने बताया कि उनकी भूमि मानकपुर रकबे झील के निकट आती है। जहां 30 बीघा धान की फसल थी। बारिश के बाद धान की फसल पानी में डूब गई है और नष्ट हो गई। करीब तीन लाख रुपये के धान के उत्पादन की उम्मीद थी। जो घर में जमा पूंजी थी, वह धान की लागत में लगा दी थी। फसल बेचकर 75 हजार रुपये के केसीसी के कर्ज की अदायगी करनी थी। बारिश से लागत भी चली गई और अब कर्ज की अदायगी की चिंता सता रही है।
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