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Sambhal News: लक्ष्मण-मेघनाद वध देखकर देख तालियों से गूंज उठा पंडाल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 12:49 AM IST
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The pandal echoed with applause as the audience watched the slaying of Meghnad by Lakshmana.
सिरसी। हजरतनगर गढ़ी में चल रही रामलीला के 12वें दिन सोमवार को युद्ध के तीन सबसे भीषण और रोमांचक प्रसंगों का मंचन हुआ। कलाकारों ने कुंभकरण, मेघनाद और अहिरावण वध की लीला को इतने जीवंत अंदाज में पेश किया। इससे दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया और पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
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लीला की शुरुआत लक्ष्मण के मूर्छा से जागने के बाद हुई। लक्ष्मण को जीवित देखकर बौखलाए रावण ने अपने महाबली भाई कुंभकरण को युद्ध भूमि में भेजा। विशालकाय कुंभकरण ने अपने पराक्रम से राम दल में हाहाकार मचा दिया, जिससे वानर सेना इधर-उधर भागने लगी। तब प्रभु श्रीराम ने अपने बाणों से कुंभकरण का वध कर वानर सेना में नई ऊर्जा भर दी।
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इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच घनघोर संग्राम हुआ। मेघनाद ने अपनी मायावी शक्तियों का भरपूर प्रयोग किया, लेकिन अंत में लक्ष्मण के हाथों उसका वध हो गया। इस प्रसंग में जब मेघनाथ की पत्नी सुलोचना अपने पति के कटे शीश के साथ सती हुई तो यह दृश्य देखकर कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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हनुमान ने पाताल लोक में दिखाया पराक्रम
पुत्रों के वध से क्रोधित रावण ने पाताल लोक में रहने वाले अहिरावण को लंका बुलाया। अहिरावण छल से राम-लक्ष्मण को सोते हुए हरण कर पाताल लोक ले गया। वहां वीर हनुमान ने अपनी सूझबूझ और पराक्रम से अहिरावण का वध किया। वह प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को सकुशल राम दल में वापस ले आए। हनुमान के इस पराक्रम पर दर्शकों ने तालियों और जयकारों से पूरा पंडाल गूंजा दिया।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर भीष्म शर्मा, देवेंद्र फौजी और अशोक कुमार मौजूद रहे। रजत चौधरी, प्रदीप चौधरी और सुरेंद्र सिंह भी उपस्थित थे। कल्लू सिंह, सरदार सिंह जाटव और आसाराम मिस्त्री ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मोहित गिरी, सुनील कश्यप और प्रदीप गिरी सहित कई अन्य लोग भी इस दौरान मौजूद रहे।


सिरसी। हजरतनगर गढ़ी में चल रही रामलीला के 12वें दिन सोमवार को मंच पर युद्ध के तीन सबसे भीषण और रोमांचक प्रसंगों का मंचन हुआ। कलाकारों ने कुंभकरण वध, मेघनाथ वध और अहिरावण वध की लीला को इतने जीवंत अंदाज में पेश किया कि दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया और पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।

लीला की शुरुआत लक्ष्मण मूर्छा से जागने के बाद से हुई। लक्ष्मण को जीवित देख बौखलाए रावण ने अपने महाबली भाई कुंभकरण को युद्ध भूमि में भेजा। विशालकाय कुंभकरण ने अपने पराक्रम से राम दल में हाहाकार मचा दिया, वानर सेना इधर-उधर भागने लगी। तब प्रभु श्रीराम ने अपने बाणों से कुंभकरण का वध कर वानर सेना में नई ऊर्जा भर दी। लक्ष्मण और मेघनाथ के बीच घनघोर संग्राम हुआ। मेघनाथ ने अपनी मायावी शक्तियों का भरपूर प्रयोग किया, लेकिन अंत में लक्ष्मण जी के हाथों उसका वध हो गया। इस प्रसंग में जब मेघनाथ की पत्नी सुलोचना अपने पति के कटे शीश के साथ सती हुई तो यह दृश्य देखकर कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं।


पाताल से राम-लक्ष्मण को ले आए बजरंगबली
पुत्र के वध से क्रोधित रावण ने पाताल लोक में रहने वाले अपने दूसरे पुत्र अहिरावण को लंका बुलाया। अहिरावण छल से राम-लक्ष्मण को सोते हुए हरण कर पाताल लोक ले गया। वहां वीर हनुमान ने अपनी सूझबूझ और पराक्रम से अहिरावण का वध किया और प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण को सकुशल राम दल में वापस ले आए। हनुमान के इस पराक्रम पर दर्शकों ने तालियों और जयकारों से पूरा पंडाल गूंजा दिया। इस अवसर पर भीष्म शर्मा, देवेंद्र फौजी, अशोक कुमार, रजत चौधरी, प्रदीप चौधरी, सुरेंद्र सिंह, कल्लू सिंह, सरदार सिंह जाटव, आसाराम मिस्त्री, मोहित गिरी, सुनील कश्यप, प्रदीप गिरी आदि मौजूद रहे।
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