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Sambhal News: प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की शैक्षिक स्थिति का होगा आकलन
Sun, 18 Jan 2026 01:40 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sun, 18 Jan 2026 01:40 AM IST
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चंदौसी। परिषदीय विद्यालयों में 27 जनवरी से निपुण आकलन अभियान की शुरुआत होगी। यह अभियान निपुण भारत मिशन के तहत चलाया जाएगा। इसमें बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणित की बुनियादी समझ को परखा जाएगा।
यह आकलन डायट के डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की सीखने की स्थिति जानकर शिक्षा को और बेहतर बनाना है। जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 1289 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय हैं। इन प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों का निपुण भारत मिशन अभियान के तहत आकलन किया जाएगा। इस दौरान बच्चों की पढ़ने, समझने, लिखने और गणितीय गणनाओं से संबंधित क्षमताओं की जांच की जाएगी।
आकलन प्रक्रिया डायट के डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा कराई जाएगी। बच्चों से प्रश्न पूछे जाएंगे और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनकी शैक्षिक समझ को परखा जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन विद्यालयों या कक्षाओं में विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षिक सहयोग की आवश्यकता है। बीईओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि निपुण आकलन से बच्चों की वास्तविक शैक्षिक स्थिति का स्पष्ट आंकलन होगा। इसके आधार पर शिक्षण कार्य को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत हो सकेगी।
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यह आकलन डायट के डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की सीखने की स्थिति जानकर शिक्षा को और बेहतर बनाना है। जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 1289 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय हैं। इन प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों का निपुण भारत मिशन अभियान के तहत आकलन किया जाएगा। इस दौरान बच्चों की पढ़ने, समझने, लिखने और गणितीय गणनाओं से संबंधित क्षमताओं की जांच की जाएगी।
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आकलन प्रक्रिया डायट के डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा कराई जाएगी। बच्चों से प्रश्न पूछे जाएंगे और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनकी शैक्षिक समझ को परखा जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन विद्यालयों या कक्षाओं में विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षिक सहयोग की आवश्यकता है। बीईओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि निपुण आकलन से बच्चों की वास्तविक शैक्षिक स्थिति का स्पष्ट आंकलन होगा। इसके आधार पर शिक्षण कार्य को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत हो सकेगी।
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