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महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत, पति की दीघायु के लिए किया पूजन
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संभल। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सोमवार को वट सावित्री व्रत परंपरागत रूप से आस्था व श्रद्धा के साथ मनाया गया। महिलाओं ने व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की। पति की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना की। वट वृक्षों के नीचे सुबह से लेकर दोपहर तक पूजन-अर्चन चलता रहा। मंगलगीत गूंजते रहे।
नगर के दुर्गा कालोनी स्थित अमृतकूप मंदिर में महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा अर्चना विधिविधान से की। महिलाओं ने हाथ में चावल व फूल लेकर वट सावित्री की कथा पढ़ी। पुराणों में वट सावित्री व्रत की कथा का वर्णन है। पुराणों के अनुसार वट सावित्री व्रत कथा में राजर्षि अश्वपति की एक ही संतान थीं सावित्री। सावित्री ने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति रूप में चुना था। जब नारद जी ने उन्हें बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं तो भी सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला। वह समस्त राजवैभव त्याग कर सत्यवान के साथ उनके परिवार की सेवा करते हुए वन में रहने लगी। सत्यवान लकड़ियां काटने जंगल गए। वहां वह मूर्छित होकर गिर पड़े। सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे अपने गोद में पति का सिर रख उसे लिटा दिया। उसी समय यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। यमराज सत्यवान के जीव को दक्षिण दिशा की ओर लेकर जा रहे थे। सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल दी। इस पर यमराज के कई बार मना करने पर वह नहीं मानी तो इस पर यमराज ने सावित्री पर खुश होकर तीन वरदान मांगने के लिए कहा। तब सावित्री ने उन तीनों वरदान में यमराज से अपनी पति के लिए जीवन मांगा था, जिसके बाद तभी से इस व्रत का प्रारंभ हुआ है। इस दौरान सरिता गुप्ता, प्रिया गुप्ता, सुनैना, दीपा शर्मा, प्रिया अग्रवाल, नीलम वार्ष्णेय, शशि गुप्ता, कुमुद, पारुल, सुनीता गुप्ता, प्राची, मोहिनी आदि मौजूद रहीं।
वट सावित्री अमावस्या पर महिलाओं ने रखे व्रत
चंदौसी/बबराला। वट सावित्री अमावस्या पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु की कामना की। यह व्रत सावित्री की ईश्वर के प्रति निष्ठा, पतिव्रत धर्म की शक्ति का परिचायक है। सोमवार को वट सावित्री अमावस्या पर महिलाओं ने सवेरे श्रंगार कर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर व्रत रखा। पूरे दिन उपवास के बाद महिलाओं ने शाम को तारों की छांव में अपना व्रत खोला। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं और व्रत कर पूजा-अर्चना करती हैं। संवाद
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नगर के दुर्गा कालोनी स्थित अमृतकूप मंदिर में महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा अर्चना विधिविधान से की। महिलाओं ने हाथ में चावल व फूल लेकर वट सावित्री की कथा पढ़ी। पुराणों में वट सावित्री व्रत की कथा का वर्णन है। पुराणों के अनुसार वट सावित्री व्रत कथा में राजर्षि अश्वपति की एक ही संतान थीं सावित्री। सावित्री ने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति रूप में चुना था। जब नारद जी ने उन्हें बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं तो भी सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला। वह समस्त राजवैभव त्याग कर सत्यवान के साथ उनके परिवार की सेवा करते हुए वन में रहने लगी। सत्यवान लकड़ियां काटने जंगल गए। वहां वह मूर्छित होकर गिर पड़े। सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे अपने गोद में पति का सिर रख उसे लिटा दिया। उसी समय यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। यमराज सत्यवान के जीव को दक्षिण दिशा की ओर लेकर जा रहे थे। सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल दी। इस पर यमराज के कई बार मना करने पर वह नहीं मानी तो इस पर यमराज ने सावित्री पर खुश होकर तीन वरदान मांगने के लिए कहा। तब सावित्री ने उन तीनों वरदान में यमराज से अपनी पति के लिए जीवन मांगा था, जिसके बाद तभी से इस व्रत का प्रारंभ हुआ है। इस दौरान सरिता गुप्ता, प्रिया गुप्ता, सुनैना, दीपा शर्मा, प्रिया अग्रवाल, नीलम वार्ष्णेय, शशि गुप्ता, कुमुद, पारुल, सुनीता गुप्ता, प्राची, मोहिनी आदि मौजूद रहीं।
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वट सावित्री अमावस्या पर महिलाओं ने रखे व्रत
चंदौसी/बबराला। वट सावित्री अमावस्या पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु की कामना की। यह व्रत सावित्री की ईश्वर के प्रति निष्ठा, पतिव्रत धर्म की शक्ति का परिचायक है। सोमवार को वट सावित्री अमावस्या पर महिलाओं ने सवेरे श्रंगार कर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर व्रत रखा। पूरे दिन उपवास के बाद महिलाओं ने शाम को तारों की छांव में अपना व्रत खोला। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं और व्रत कर पूजा-अर्चना करती हैं। संवाद
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