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यूक्रेन से लौटे छात्र नीट की सफलता में तलाशेंगे अपना भविष्य
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संभल। यूक्रेन से लौटे छात्रों को अब अपने भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। साथ ही परिजन भी चिंता में डूबे हैं। उन छात्रों के परिजन अधिक परेशान हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात में बच्चों को पढ़ाई के लिए यूक्रेन भेजा था। अब इन बच्चों ने अपने भविष्य को संवारने के लिए नीट की तैयारी करने का मन बनाया है। वहीं कुछ छात्रों का कहना है कि जब तक हालात सही नहीं हो जाते घर पर रहकर ही पढ़ाई की जाएगी।
संभल के गांव हाजीपुर निवासी मोहम्मद इमरान ने बताया कि उनका बेटा मोहम्मद शादमान यूक्रेन मेें एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई ही कर रहा था। उन्होंने अपनी जमीन गिरवीं रखकर बेटे को विदेश पढ़ने के लिए भेजा था। दस लाख रुपये पहले ही वर्ष में खर्च हुए और बेटा अब मुश्किल हालात से गुजरकर घर लौट आया है। अब भविष्य की चिंता सता रही है। बताया कि वह अपने बेटे को नीट की तैयारी के लिए दिल्ली भेजेंगे। जिससे नीट में सफलता मिल सके और देश के ही किसी अच्छे कालेज में कम फीस पर दाखिला मिल सके।
गांव मदाला निवासी मोहम्मद असरार ने बताया कि उनका बेटा अदनान और उनके दो भतीजे यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गए थे। अब वहां मुश्किल हालात हैं तो हालात के सुधरने का इंतजार करना पड़ेगा। घर पर ही रहकर पढ़ाई जारी रखी जाएगी।
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गावं राया बुजुर्ग निवासी अबुल बरकात भी यूक्रेन की ऊजहोरोद राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से एमबीबीएस कर रहे थे। युद्ध से हालात बिगड़े तो वह यूक्रेन से घर लौट आए। फिलहाल पढ़ाई को लेकर परेशान हैं। अबुल बरकात ने बताया कि जानकारी मिल रही है कि जल्द ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होगी। अगर ऐसा हुआ तो पढ़ाई कम बाधित होगी।
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संभल के गांव हाजीपुर निवासी मोहम्मद इमरान ने बताया कि उनका बेटा मोहम्मद शादमान यूक्रेन मेें एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई ही कर रहा था। उन्होंने अपनी जमीन गिरवीं रखकर बेटे को विदेश पढ़ने के लिए भेजा था। दस लाख रुपये पहले ही वर्ष में खर्च हुए और बेटा अब मुश्किल हालात से गुजरकर घर लौट आया है। अब भविष्य की चिंता सता रही है। बताया कि वह अपने बेटे को नीट की तैयारी के लिए दिल्ली भेजेंगे। जिससे नीट में सफलता मिल सके और देश के ही किसी अच्छे कालेज में कम फीस पर दाखिला मिल सके।
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गांव मदाला निवासी मोहम्मद असरार ने बताया कि उनका बेटा अदनान और उनके दो भतीजे यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गए थे। अब वहां मुश्किल हालात हैं तो हालात के सुधरने का इंतजार करना पड़ेगा। घर पर ही रहकर पढ़ाई जारी रखी जाएगी।
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गावं राया बुजुर्ग निवासी अबुल बरकात भी यूक्रेन की ऊजहोरोद राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से एमबीबीएस कर रहे थे। युद्ध से हालात बिगड़े तो वह यूक्रेन से घर लौट आए। फिलहाल पढ़ाई को लेकर परेशान हैं। अबुल बरकात ने बताया कि जानकारी मिल रही है कि जल्द ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होगी। अगर ऐसा हुआ तो पढ़ाई कम बाधित होगी।