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Sambhal News: गोशाला में छह गोवंशीय पशुओं की मौत, सचिव व पशुधन प्रसार अधिकारी निलंबित
Thu, 11 Jul 2024 04:55 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 11 Jul 2024 04:55 AM IST
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संभल। गांव शरीफपुर स्थित गोशाला में बुधवार को बाजरे का चारा खिलाने से छह पशुओं की फूड प्वाइजनिंग से मौत हो गई। जबकि छह पशु बीमार हैं। गोवंशीय पशुओं की मौत से खफा डीएम ने ग्राम पंचायत सचिव सौरभ सिंह ओर पशुधन प्रसार अधिकारी शिवम को निलंबित कर दिया। साथ ही बीडीओ संभल, सीवीओ, डिप्टी सीवीओ व नोडल अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
डीएम राजेंद्र पैन्सिया ने बताया कि गांव शरीफपुर गोशाला में संरक्षित गोवंशीय पशुओं को हरा चारा बाजरे का खिलाया गया है। जबकि यह चारा खिलाना मना किया गया था। हरा बाजरे का चारा खाने के बाद कई पशुओं को फूड प्वाइजनिंग हो गई। जिसमें से छह पशुओं की मौत हो गई। जबकि छह बीमार पशुओं का उपचार कराया जा रहा है। प्राथमिक जांच में दोषी ग्राम पंचायत सचिव और पशुधन प्रसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। बाजरे का हरा चारा खिलाने से मना किया गया था इसके बाद भी पशुओं को हरे चारे के रूप में बाजरा खिलाया गया। यह बड़ी लापरवाही है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रति पशु 50 रुपये शासन से दिए जाते हैं। इसके मुताबिक हरा चारा, शुद्ध पानी, नमक, व अन्य व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने के निर्देश दिए हैं।
नशे में मिला ग्राम प्रधान, डीएम बोले, कार्रवाई की जाए
छह गोवंशीय पशुओं की मौत की सूचना पर डीएम राजेंद्र पैन्सिया गोशाला पहुंचे तो शरीफपुर के ग्राम प्रधान सुरेंद्र को बुलाया गया। वह शराब के नशे में गोशाला पहुंचे। ग्राम प्रधान का नशे में देखकर डीएम ने नाराजगी जताई और बीडीओ संभल को ग्राम प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि ग्राम प्रधान की भी इस घटना में लापरवाही सामने आई है। जांच के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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चर्चा में रहती है गांव शरीफपुर की गोशाला
करीब आठ महीने पहले गांव शरीफपुर की गोशाला में भी पशुओं की बीमारी के चलते मौत हुई थी। उस समय चर्चा रही थी कि मृत और बीमार पशुओं को कुत्ते नोंच रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने इस दावे से खारिज कर दिया था। बाद में पशुओं को संरक्षण करने के नाम पर वसूली के भी आरोप लगते रहे। अब जिलाधिकारी के मना करने के बाद भी बाजरे का हरा चारा पशुओं को खिलाया गया और छह पशुओं की मौत हो गई। इसी तरह के अलग अलग मामलों में गांव शरीफपुर की गोशाला चर्चा में रहती है।
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पानी से भरे गड्ढे में डाले गए मृत पशु
गोशाला में कई गड्ढे बने हुए हैं। इन गड्ढों में पानी भरा है। बुधवार को जब पशुओं की मौत हुई तो ग्रामीण एकत्र हो गए। एक वीडियो सामने आया जिसमें मृत पशु पानी के गड्ढे में पड़े दिखाई दिए।
गांव शरीफपुर निवासी धीरज चौधरी ने बताया कि संभल जिले के प्रभारी मंत्री को गोवंशीय पशुओं के मौत की जानकारी दी थी। इसके बाद ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी आए हैं। बताया कि हर महीने पांच से दस गोवंशीय पशुओं की मौत हो जाती है और मृत पशुओं को पानी भरे गड्ढे में ही डाल दिया जाता है। जिससे आसपास के इलाके में दुर्गंध रहती है। जो गड्ढे पानी से भरे हैं यदि इनकी जांच की जाए तो एक गड्ढे में 20 से ज्यादा पशुओं के अवशेष मिलेंगे। इसी तरह अन्य गड्ढों का भी हाल मिलेगा।
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कोट
बाजरे का हरा चारा खिलने से पशुओं को फूड प्वाइजनिंग हुआ और छह पशुओं की मौत हो गई। जबकि छह पशु बीमार हैं। ग्राम पंचायत सचिव और पशुधन प्रसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। -डॉ. राजेंद्र पैन्सिया, जिलाधिकारी, संभल
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डीएम राजेंद्र पैन्सिया ने बताया कि गांव शरीफपुर गोशाला में संरक्षित गोवंशीय पशुओं को हरा चारा बाजरे का खिलाया गया है। जबकि यह चारा खिलाना मना किया गया था। हरा बाजरे का चारा खाने के बाद कई पशुओं को फूड प्वाइजनिंग हो गई। जिसमें से छह पशुओं की मौत हो गई। जबकि छह बीमार पशुओं का उपचार कराया जा रहा है। प्राथमिक जांच में दोषी ग्राम पंचायत सचिव और पशुधन प्रसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। बाजरे का हरा चारा खिलाने से मना किया गया था इसके बाद भी पशुओं को हरे चारे के रूप में बाजरा खिलाया गया। यह बड़ी लापरवाही है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रति पशु 50 रुपये शासन से दिए जाते हैं। इसके मुताबिक हरा चारा, शुद्ध पानी, नमक, व अन्य व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने के निर्देश दिए हैं।
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नशे में मिला ग्राम प्रधान, डीएम बोले, कार्रवाई की जाए
छह गोवंशीय पशुओं की मौत की सूचना पर डीएम राजेंद्र पैन्सिया गोशाला पहुंचे तो शरीफपुर के ग्राम प्रधान सुरेंद्र को बुलाया गया। वह शराब के नशे में गोशाला पहुंचे। ग्राम प्रधान का नशे में देखकर डीएम ने नाराजगी जताई और बीडीओ संभल को ग्राम प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि ग्राम प्रधान की भी इस घटना में लापरवाही सामने आई है। जांच के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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चर्चा में रहती है गांव शरीफपुर की गोशाला
करीब आठ महीने पहले गांव शरीफपुर की गोशाला में भी पशुओं की बीमारी के चलते मौत हुई थी। उस समय चर्चा रही थी कि मृत और बीमार पशुओं को कुत्ते नोंच रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने इस दावे से खारिज कर दिया था। बाद में पशुओं को संरक्षण करने के नाम पर वसूली के भी आरोप लगते रहे। अब जिलाधिकारी के मना करने के बाद भी बाजरे का हरा चारा पशुओं को खिलाया गया और छह पशुओं की मौत हो गई। इसी तरह के अलग अलग मामलों में गांव शरीफपुर की गोशाला चर्चा में रहती है।
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पानी से भरे गड्ढे में डाले गए मृत पशु
गोशाला में कई गड्ढे बने हुए हैं। इन गड्ढों में पानी भरा है। बुधवार को जब पशुओं की मौत हुई तो ग्रामीण एकत्र हो गए। एक वीडियो सामने आया जिसमें मृत पशु पानी के गड्ढे में पड़े दिखाई दिए।
गांव शरीफपुर निवासी धीरज चौधरी ने बताया कि संभल जिले के प्रभारी मंत्री को गोवंशीय पशुओं के मौत की जानकारी दी थी। इसके बाद ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी आए हैं। बताया कि हर महीने पांच से दस गोवंशीय पशुओं की मौत हो जाती है और मृत पशुओं को पानी भरे गड्ढे में ही डाल दिया जाता है। जिससे आसपास के इलाके में दुर्गंध रहती है। जो गड्ढे पानी से भरे हैं यदि इनकी जांच की जाए तो एक गड्ढे में 20 से ज्यादा पशुओं के अवशेष मिलेंगे। इसी तरह अन्य गड्ढों का भी हाल मिलेगा।
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बाजरे का हरा चारा खिलने से पशुओं को फूड प्वाइजनिंग हुआ और छह पशुओं की मौत हो गई। जबकि छह पशु बीमार हैं। ग्राम पंचायत सचिव और पशुधन प्रसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। -डॉ. राजेंद्र पैन्सिया, जिलाधिकारी, संभल