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Sambhal News: सिंदूर अब सिंदूर से अंगार हो गया...............
Sat, 10 May 2025 11:40 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 10 May 2025 11:40 PM IST
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बहजोई।
सिंदूर अब सिंदूर से अंगार हो गया व जवानों ने बढ़ा दी किस कदर, सिंदूर की कीमत आदि कविताओं के माध्यम से कवियों ने पहलगाम में आतंकी हमले के मारे गए पर्यटकों को श्रद्धांजलि दी। इस बीच कवियों ने भारतीय सेना के शौर्य को भी नमन किया।
काव्य गोष्ठी की शुरुआत पवांसा के वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञान प्रकाश उपाध्याय ने वाणी वंदना से की। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से आतंकियों को चेताया और सुनाया- किया है धोखे से, इसका बदला हम लेंगे, याद रखेगी सारी दुनिया, घर में घुसकर मारेंगे। वहीं, गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए दीपक गोस्वामी चिराग ने ‘सिंदूर की कीमत’ को शब्दों में यूं पिरोया- युगों-युगों से है यही, भारत का दस्तूर, रावण पर भारी पड़ा, सीता का सिंदूर। इस बीच संचालन कर रहे संभल के युवा साहित्यकार डॉ. संदीप कुमार सचेत ने ओजस्वी अंदाज में सुनाया- देश का सम्मान बचाने को, फिर अपनी शान दिखाई है, देख ले मुर्दा मुल्क पड़ोसी, यह हिंदुस्तान की अंगड़ाई है।
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बदायूं के युवा शायर अरशद रसूल ने अपनी पंक्तियों को मार्मिक रूप देते हुए सुनाया-जवानों ने बढ़ा दी किस कदर सिंदूर की कीमत, डरा-सहमा है दुश्मन, देखकर सिंदूर की कीमत। हमारे देश का बलिदान ज़ाया हो नहीं सकता, है चुटकी भर सही, देखो मगर सिंदूर की कीमत सुनाया।
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कासगंज से आईं कवयित्री सुनीता शंकवार ने अपने भावों को यूं स्वर देते हुए कहा कि दिया- सिंदूर अब सिंदूर से अंगार हो गया, चिंगारियों की राशि का अंबार हो गया। सिंदूर दहक उठा, ज्वाला गई पाक तक, बलिदानों के बलिदान का शृंगार हो गया। युवा कवि वेंकट कुमार ने सुनाया- सिंदूर की कीमत बताने को, किया आपरेशन सिंदूर, आतंकी आकाओं के सपनों को किया है चकनाचूर। चंदौसी की कवयित्री मनीषा गौतम ने सुनाया- क्यों इतराता है तू सूरत पर अपनी बंदे, पलक झपकते ही सब खाक हो जाना है। काव्य गोष्ठी में वयोवृद्ध कवि रूपकिशोर गुप्ता समेत सत्यवीर उजाला, राजेश तन्हा व संभव जैन आदि ने भी काव्यपाठ किया। इस बीच अरविंद कुमार, राममूर्ति नाथ, अनुराधा गोस्वामी, वीरेंद्र गोस्वामी, विमला देवी, वंश व वंशिका आदि रहे।