शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो रहे हैं। इस साल शुक्ल व ब्रह्म योग का अद्भुत संयोग के साथ नवरात्र का शुरू हो रहे हैं। इन दिनों में मां के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित शोभित शास्त्री ने बताया कि नवरात्रि पूरे 9 दिनों की होगी। मां हाथी पर सवार होकर आ रही हैं और हाथी पर ही सवार हो विदा होंगी। हाथी पर आगमन समृद्धि व खुशहाली का प्रतीक है। बताया कि देवी भागवत के अनुसार जब मां का आगमन व विदाई हाथी पर होती है देश में खुशहाली का वातावरण निर्मित होता है व पर्याप्त वर्षा से जनता प्रसन्न होती है। नवरात्रि में घटस्थापना, ज्वार रोपण नवदुर्गाओं की क्रमश: पूजन, अर्चन, दुर्गा सप्तशती के सात सौ महामंत्रों से हवन, कन्या पूजन व अपनी-अपनी कुल परंपरा के अनुसार कुल देवी पूजन व उपवास का विशेष महत्व है। बताया कि घटस्थापना मुहूर्त 26 सितंबर को सुबह 06 बजकर 11 मिनट से सुबह 07 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसकी अवधि - 01 घंटा 40 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा घटस्थापना का अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। इसकी अवधि 48 मिनट तक रहेगी।
ऐसे करें कलश स्थापना
आचार्य शोभित शास्त्री ने बताया कि कलश की स्थापना मंदिर के उत्तर-पूर्व दिशा में करनी चाहिए और मां की चौकी लगा कर कलश को स्थापित करना चाहिए। सबसे पहले उस जगह को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। फिर लकड़ी की चौकी पर लाल रंग से स्वस्तिक बनाकर कलश को स्थापित करें। कलश में आम का पत्ता रखें और इसे जल या गंगाजल भर दें। साथ में एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूर्वा, हल्दी की एक गांठ कलश में डालें। कलश के मुख पर एक नारियल लाल वस्त्र से लपेट कर रखें। चावल यानी अक्षत से अष्टदल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें। इन्हें लाल या गुलाबी चुनरी ओढ़ा दें। कलश स्थापना के साथ अखंड दीपक की स्थापना भी की जाती है। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा करें। हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके मंत्र जाप करें और फूल और चावल मां के चरणों में अर्पित करें। मां शैलपुत्री के लिए जो भोग बनाएं, गाय के घी से बने होने चाहिए। या सिर्फ गाय के घी चढ़ाने से भी बीमारी व संकट से छुटकारा मिलता है।