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माता-पिता की सेवा संतान का कर्तव्य : कथाव्यास
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गवां। गांव मोलनपुर डांडा स्थित श्री हरिबाबा बांध धाम पर सात दिवसीय गुरु पूजा महोत्सव में कलाकारों ने भक्त प्रह्लाद लीला का मंचन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। प्रवीन भारद्वाज और दिनेश मोहन शास्त्री ने रामायण पाठ में रामचरित्र मानस के माध्यम से गुरु पूजा की महिमा सुनाई। कथा वाचक ने कहा कि माता पिता की सेवा करना संतान का कर्तव्य है, लेकिन माता पिता को संतान से सेवा करने की अपेक्षा नहीं रखना चाहिए।
शनिवार को श्री हरिबाबा की प्रतिमा के समक्ष विधिवत पूजा अर्चना के साथ दूसरे दिन की रासलीला शुरू हुई। वृंदावन गौरांग कृष्ण लीला मंडल के व्यास कृष्ण मुरारी के निर्देशन में कलाकारों ने भक्त प्रह्लाद लीला का मंचन किया। कलाकारों द्वारा मंचन में दिखाया कि राक्षस राज हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का विरोधी है, उसके राज में भगवान का नाम नहीं लिया जाता है, जो भी नाम लेता है, उसको मृत्युदंड दे दिया जाता है। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान का भक्त होता है। भगवान का नाम न लें, इसलिए पहले उसे डराया जाता है।
जब इससे भी बात नहीं बनती है तो उसे पर्वत से नीचे फेंका जाता है। भगवान के नामजप के कारण उसे खरोंच तक नहीं आती है। तब उसे होलिका के साथ आग में प्रवेश करा दिया जाता है लेकिन होलिका को वरदान था कि आग का उस पर असर नहीं होगा पर यहां उल्टा हो गया। होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया।
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इस अवसर पर कलाकाराें ने मयूर नृत्य व रास नृत्य किया। दोपहर दो बजे से तीन बजे तक पंडित प्रवीन भारद्वाज और दिनेश मोहन शास्त्री ने रामायण पाठ में रामचरित्र मानस के माध्यम से गुरु पूजा की महिमा सुनाई। व्यास दीपक उपाध्यक्ष महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि कलियुग में नाम के आधार पर जीव भव सागर को पार कर सकता है। कथा में भगवान सुग्रीव के आगमन पर राजा परीक्षित पूजन किया गया और पूछा मरण के समय जीव को क्या करना चाहिए। इस दौरान तमाम भक्तगण मौजूद रहे।
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शनिवार को श्री हरिबाबा की प्रतिमा के समक्ष विधिवत पूजा अर्चना के साथ दूसरे दिन की रासलीला शुरू हुई। वृंदावन गौरांग कृष्ण लीला मंडल के व्यास कृष्ण मुरारी के निर्देशन में कलाकारों ने भक्त प्रह्लाद लीला का मंचन किया। कलाकारों द्वारा मंचन में दिखाया कि राक्षस राज हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का विरोधी है, उसके राज में भगवान का नाम नहीं लिया जाता है, जो भी नाम लेता है, उसको मृत्युदंड दे दिया जाता है। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान का भक्त होता है। भगवान का नाम न लें, इसलिए पहले उसे डराया जाता है।
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जब इससे भी बात नहीं बनती है तो उसे पर्वत से नीचे फेंका जाता है। भगवान के नामजप के कारण उसे खरोंच तक नहीं आती है। तब उसे होलिका के साथ आग में प्रवेश करा दिया जाता है लेकिन होलिका को वरदान था कि आग का उस पर असर नहीं होगा पर यहां उल्टा हो गया। होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया।
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इस अवसर पर कलाकाराें ने मयूर नृत्य व रास नृत्य किया। दोपहर दो बजे से तीन बजे तक पंडित प्रवीन भारद्वाज और दिनेश मोहन शास्त्री ने रामायण पाठ में रामचरित्र मानस के माध्यम से गुरु पूजा की महिमा सुनाई। व्यास दीपक उपाध्यक्ष महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि कलियुग में नाम के आधार पर जीव भव सागर को पार कर सकता है। कथा में भगवान सुग्रीव के आगमन पर राजा परीक्षित पूजन किया गया और पूछा मरण के समय जीव को क्या करना चाहिए। इस दौरान तमाम भक्तगण मौजूद रहे।