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भविष्य में आध्यात्म और संस्कृति का केंद्र बनेगा संभल : सुधांशु जी महाराज

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2025 02:09 AM IST
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Sambhal will become a centre of spirituality and culture in the future: Sudhanshu Ji Maharaj
सुधांशु जी महाराज। संवाद - फोटो : 1
संभल। भविष्य में संभल आध्यात्म और संस्कृति का केंद्र बनेगा। ऐसा इसलिए कि यहां इतिहास बन रहा है और खुशी इस बात की है कि इतिहास को बनाने वाले भी मौजूद हैं और देखने वाले भी। यह कहना है कि कथा वाचक आचार्य सुधांशु महाराज का। वह कल्कि महोत्सव में श्री कल्कि कथा सुनने के लिए आए थे। मीडिया से बातचीत में कहा कि प्राचीन भारत की कथाओं में संभल का जो वर्णन आता है, लगता है कि यह समय सनातन का वह श्रेष्ठ उदयकाल है। जैसे सूर्य उदय होता है, तो फूल उगने लगते हैं, कलियां खिलने लगती हैं और मोती चमकने लगते हैं। ऐसा संभल में हो रहा है। यह वो समय है, जब संभल में पीएम आए, देश के अन्य मंत्री आ रहे हैं और न जाने कितने भक्तगण आ रहे हैं। इससे लग रहा है कि सूर्य उदय होने वाला है। संभल निश्चित रूप से तीर्थ क्षेत्र बनेगा। संवाद
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कल्कि धाम में बैसाख मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी को मनेगा श्री कल्कि जन्मोत्सव : आचार्य प्रमोद कृष्णम
संभल। तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के कथन के आधार पर श्री कल्कि धाम में श्री कल्कि जन्मोत्सव बैसाख मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी तिथि को मनाया जाएगा। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने यह घोषणा की। बताया कि व्यास पीठ से जिस तरह महत्वपूर्ण तथ्य उद्धत करते हुए कहा गया कि श्री कल्कि अवतार की चर्चा वेदों में भी है। भगवान श्री कल्कि का विवरण पुराणों एवं अन्य धर्म ग्रंथों में भी है। शास्त्रों में वर्णित है कि कलियुग के पूर्णावतार भगवान श्री कल्कि नारायण की माता जी जिनका नाम सुमति है। उनका पीहर कम्बोज नामक नगर होगा और यही ऐंचोड़ा कंबोह ही वही शास्त्र वर्णित कम्बोज है। यह घोषणा मैं प्रामाणिक रूप से कर रहा हूं। भगवान श्री कल्कि का जन्म बैसाख मांस शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि को होगा। यही शास्त्र सम्मत तिथि है। व्यासपीठ के इस कथन अनुसार ही श्री कल्कि जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
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