संभल हिंसा: पहचान छिपाकर उपचार करा रहे उपद्रवी, मस्जिद कमेटी के सदर बोले- तीन से चार दिन में हाईकोर्ट जाएंगे
संभल हिंसा में घायल हुए उपद्रवी पहचान छिपाकर दूसरे जिलों में उपचार करवा रहे हैं। अब तक जिला अस्पताल में दो लोगों ने उपचार करवाया। उधर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जामा मस्जिद कमेटी तीन से चार दिन के भीतर हाईकोर्ट जाएंगी।
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24 नवंबर को बवाल में घायल हुए उपद्रवी पहचान छिपाकर जिले से बाहर उपचार करा रहे हैं। पथराव के दाैरान घायल होने पर जिन लोगों का पुलिस ने पकड़ा था, उनका उपचार पुलिस करा रही है। जबकि जो भाग गए, वह छिपकर उपचार करा रहे हैं। संभल में 24 नवंबर की सुबह करीब साढ़े आठ बजे बवाल शुरू हुआ था। जब कोर्ट कमिश्नर सर्वे के लिए जामा मस्जिद पहुंचे थे।
इस दौरान हाफिजों वाली मस्जिद और मोहल्ला नाला की ओर से भीड़ एकत्र हुई थी। जो बाद में डाकखाने की ओर भी पहुंच गई थी। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था। इसमें पुलिस की ओर से भी आंसू गैस के गोले और रबड़ बुलेट से उपद्रवियों केा खदेड़ा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। लाठी चार्ज के दौरान भी चोट लगी थी। जो मौके से घायलावस्था में भागे वह दूसरे जिले या दिल्ली में उपचार करा रहे हैं।
वह घायल पुलिस के सामने आना नहीं चाहते हैं। ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिसमें घायल जाते हुए दिख रहे हैं। इन घायलों की जानकारी सरकारी अस्पताल में दर्ज नहीं है। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक मात्र दो ही लोग भीड़ के घायल हुए हैं। जबकि 19 पुलिसकर्मियों के चोटिल होने का रिकॉर्ड दर्ज है। जाहिर है कि जो घायल हुए वह अस्पताल नहीं पहुंचे और उन्होंने अपने अपने स्तर से छिपकर उपचार कराया है।
तीन से चार दिन में हाईकोर्ट जाएगी मस्जिद कमेटी : जफर
जामा मस्जिद कमेटी तीन से चार दिन में हाईकोर्ट जाएगी। इसके लिए तैयारियों को पूरा किया जा रहा है। जिससे अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सके। जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट ने बताया कि हम तैयारियों को पूरा करने में लगे हैं। तीन से चार दिन में हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। 19 नवंबर को चंदौसी स्थित जिला न्यायालय में सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का वाद दाखिल किया गया था।
इस दावे के बाद ही जामा मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें मस्जिद का सर्वे कराने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक लगा दी है और जामा मस्जिद कमेटी से अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में जामा मस्जिद कमेटी तैयारी कर रही है।
सपा विधायक इकबाल महमूद ने रविवार को बवाल के दौरान जान गंवाने वाले पांचों मृतकों के परिजनों से मुलाकात की है। पीड़ित परिजनों को मदद का आश्वासन दिया है। साथ ही पार्टी की ओर से मिलने वाली मदद की जानकारी भी दी है। विधायक ने बताया कि वह मोहल्ला कोटगर्वी निवासी अयान, नईम, तुत्तीपुर इल्हा निवासी कैफ, हयातनगर निवासी रोमान और सरातरीन निवासी बिलाल के परिजनों से मिले हैं।
बताया कि सभी अपने अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाले थे। यह घटना कैसे हुई है इसकी जांच होनी चाहिए। जिन लोगों की जान गई है, उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूटा है। बताया कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये दिए जाने की घोषणा की है। जल्द ही पीड़ित परिजनों को यह आर्थिक मदद दी जाएगी। उन्होंने हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
10 के बाद संभल आएगा सपा का प्रतिनिधिमंडल
बवाल में जान गंवाने वाले लोगाें के परिजनों से मिलने और आर्थिक मदद करने के लिए सपा का प्रतिनिधिमंडल 10 दिसंबर के बाद संभल आएगा। सपा के संभल विधायक इकबाल महमूद ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के नेतृत्व में बनाया गया है।
इसमें यूपी विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे, नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद लाल बिहारी यादव, सांसद हरेंद्र मलिक, रूचिवीरा, इकरा हसन, जियाउर्रहमान बर्क, नीरज मौर्य, विधायक कमाल अख्तर, रविदास मेहरोत्रा, नवाब इकबाल महमूद, पिंकी यादव, संभल के जिलाध्यक्ष असगर अली अंसारी, मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष जयवीर यादव, बरेली के जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप शामिल हैं। बताया कि शनिवार को प्रतिनिधिमंडल संभल आ रहा था लेकिन पुलिस ने रोक दिया।
भाकपा सांसद को पुलिस ने संभल जाने से रोका
संभल बवाल में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मिलने पार्टी पदाधिकारियों के साथ जा रहे भाकपा माले के सांसद को कटघर क्षेत्र में पुलिस ने रोक लिया। उन्हें पार्टी के एक नेता के घर में ही नजरबंद कर दिया गया। भाकपा माले के जिला प्रभारी रोहिताश राजपूत ने बताया कि उनके सरस्वती विहार स्थित घर पर बिहार के आरा से सांसद सुदामा प्रसाद आए थे।
पार्टी के अन्य साथियों कृष्णा अधिकारी, अफरोज आलम, साईं बालाजी के साथ सांसद को संभल जाना था लेकिन रविवार सुबह नौ बजे सीओ के साथ पुलिस टीम घर पहुंच गए और सबको नजरबंद कर दिया। पुलिस ने सांसद को भी संभल नहीं जाने दिया। एक दिन पहले रोहिताश राजपूत ने राष्ट्रपति को संभल मामले को लेकर पत्र भी भेजा था। इसमें पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे।