Sambhal: जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुंची एएसआई की टीम, पुताई और सजावट मामले में हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई की तीन सदस्यीय टीम ने जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई और मरम्मत की जांच की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि निरीक्षण रिपोर्ट शुक्रवार सुबह 10 बजे पेश की जाए। एएसआई और मस्जिद कमेटी के बीच विवाद पर अदालत 28 फरवरी को फिर सुनवाई करेगी।
विस्तार
उच्च न्यायालय के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम संभल जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए पहुंची। जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट व अन्य पदाधिकारी भी साथ रहे। एहतियाती तौर पर मस्जिद के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। एएसआई की टीम ने करीब सवा घंटे तक मस्जिद की स्थिति का जायजा लिया।
इस रिपोर्ट के आधार पर ही जामा मस्जिद की पुताई और सजावट के लिए अनुमति का निर्णय तय हो सकेगा। संभल जामा मस्जिद कमेटी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसमें रमजान से पहले सफाई, पुताई और सजावट किए जाने का आग्रह किया गया था। बृहस्पतिवार की सुबह उच्च न्यायालय में इस याचिका पर सुनवाई की गई।
इसी सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने एएसआई की तीन सदस्यीय टीम को मस्जिद की वास्तविकता का आकलन कर शुक्रवार की सुबह 10 बजे तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में मस्जिद की स्थिति का आकलन करने के लिए एएसआई की टीम पहुंची। शाम 4.35 बजे एएसआई की टीम ने जामा मस्जिद में प्रवेश किया।
इस एएसआई की टीम में ज्वाइंट डायरेक्टर मदन सिंह चौहान, डायरेक्टर जुल्फिकार अली, मेरठ सर्किल के सुपरिटेंडेंटआर्कियोलॉजिस्ट विनोद सिंह रावत शामिल रहे। इस तीन सदस्यीय टीम ने 5.47 बजे तक मस्जिद की स्थिति का आकलन किया। एएसआई की टीम ने मस्जिद के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। अब इसकी रिपोर्ट उच्च न्यायालय में पेश की जाएगी। उसके आधार पर निर्णय होगा कि अनुमति दी जानी है या नहीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संभल जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई और मरम्मत की जरूरत है या नहीं, इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के तीन अधिकारी मुतवल्ली के साथ निरीक्षण करें। साथ ही इसकी रिपोर्ट शुक्रवार को न्यायालय में 10 बजे प्रस्तुत की जाए। इसके बाद ही न्यायालय रमजान शुरू होने से पहले मस्जिद की रंगाई-पुताई का निर्देश देने पर विचार करेगा।
न्यायालय ने यह भी कहा कि रमजान से पूर्व जो भी गतिविधि की जाए, एएसआई उसकी वीडियाेग्राफी कराए। न्यायालय ने 28 फरवरी को फिर से मामले की सुनवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने जामा मस्जिद संभल की प्रबंधन कमेटी की ओर से सिविल पुनरीक्षण में दाखिल त्वरित सुनवाई की अर्जी पर उक्त आदेश दिया।
मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता एसएफ नकवी ने दलील दी कि कई दशकों से मस्जिद की रंगाई-पुताई का काम कमेटी करती चली आ रही है। कभी एएसआई ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया। रमजान का महीना एक मार्च से शुरू हो रहा है, इसलिए रंगाई पुताई किया जाना है। इस दौरान संरक्षित स्थल को न कोई नुकसान पहुंचाया जाएगा और न ही किसी भी तरह का परिवर्तन किया जाएगा।
वहीं, एएसआई के अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने दलील दी कि संरक्षित इमारत की मरम्मत, रंगाई-पुताई की जिम्मेदारी एएसआई की है। इसके बावजूद मस्जिद कमेटी के लोग एएसआई के अधिकारियों को परिसर में घुसने नहीं देते हैं। मस्जिद में रंगाई-पुताई की आवश्यकता है या नहीं, अदालत के आदेश पर निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकते हैं।
वहीं अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने रंगाई-पुताई की अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि रंगाई-पुताई की आड़ में मस्जिद कमेटी हिंदू मंदिर की कलाकृतियों, चिह्नों और प्रतीकों को नष्ट कर देगी। मस्जिद एएसआई संरक्षित है, इसलिए मस्जिद कमेटी को रंगाई-पुताई की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने पक्षकारों को सुनने के बाद कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि मस्जिद एएसआई संरक्षित है।
मरम्मत व रंगाई-पुताई का फैसला भी एएसआई के विवेकाधिकार पर है। न्यायालय के निर्देश पर एएसआई ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें मदन सिंह चौहान संयुक्त निदेशक, जुल्फिकार अली निदेशक स्मारक, अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद सिंह रावत शामिल हैं, जो मस्जिद के मुतवल्ली के साथ जांच कर शुक्रवार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
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