Sambhal: हिंसा के साजिशकर्ता शारिक साटा के खिलाफ फिर केस... संपत्ति होगी कुर्क, मस्जिद और मदरसा होगा ध्वस्त
संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल के मुख्य साजिशकर्ता शारिक साटा की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी है। शारिक साटा पर हत्या, बवाल की साजिश समेत गंभीर आरोप हैं। उधर, सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त किया जाएगा।
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संभल में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में मुख्य साजिशकर्ता दीपा सराय निवासी शारिक साटा की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी है। आरोपी के खिलाफ धारा 209 बीएनएस के तहत तीन रिपोर्ट दर्ज हो चुकी हैं। यह कार्रवाई न्यायालय में हाजिर नहीं होने के चलते विवेचकों ने कराई है।
इसी क्रम में अब बृहस्पतिवार को एसआईटी ने आरोपी की संपत्ति की जांच की है। जिसको कुर्क किया जाना है। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि शारिक साटा के दीपा सराय स्थित घर पर एसआईटी ने बीएनएसएस की धारा 84 के तहत नोटिस चस्पा किया था।
उसकी अवधि भी पूरी निकल गई है लेकिन आरोपी न्यायालय में हाजिर नहीं हुआ। इसी क्रम में एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर मेघपाल ने नखासा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसपी ने बताया कि शारिक साटा के खिलाफ मुख्य अपराध संख्या 340/24 और 306/24 में हत्या, बवाल की साजिश व अन्य गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं।
शारिक साटा के गिरोह के सदस्य मुल्ला अफरोज, गुलाम और वारिस को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें मुल्ला अफरोज के खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। शारिक साटा ने इन्हीं तीन गुर्गों को हथियार उपलब्ध कराए थे और बवाल में गोली चलवाई थी।
जिसमें आम लोगों की जान गई थी। जबकि 28 पुलिसकर्मी और एक एसडीएम घायल हुए थे। मालूम हो शारिक साटा दुबई में रहकर अपना गिरोह चलाता है। वह देश का बड़ा वाहन चोर है। इसके अलावा हथियार, सोना और नकली नोट की तस्करी करने के आरोप में घिरा है। उसके संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी दिल्ली पुलिस को मिल चुके हैं।
सरकारी जमीन पर कब्जा कर मस्जिद करवाई तैयार
गांव सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर निवासी मस्जिद के मुतवल्ली हाजी शमीम पर आरोप है कि उन्होंने 439 वर्ग मीटर अवैध कब्जा कर मस्जिद का निर्माण किया है। इसके नजदीक ही मस्जिद से पहले का बनाया गया मदरसा है। वह भी सरकारी जमीन पर है।
इसको राजस्व विभाग ने अवैध माना है। 14 जून 2018 को दी आख्या के आधार पर तहसीलदार के न्यायालय में मामला चला। साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर सरकारी जमीन ही तय हुई और मुतवल्ली को बेदखल करने के निर्देश हुए।
अब कब्जा मुक्त करने की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। करीब आठ लाख रुपये मुतवल्ली पर जुर्माना भी लगाया गया है। प्रशासन ने लोगों ने इस निर्माण को खुद ही तोड़ने को कहा है।