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Sambhal News: जौहर करने वाली वीरांगनाओं को पुण्यतिथि पर किया नमन
Mon, 18 Nov 2024 02:25 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Mon, 18 Nov 2024 02:25 AM IST
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सरायतरीन (संभल)। गांव पवांसा में 17 नवंबर 1717 में 200 से अधिक वीरांगनाओं के संग जौहर करने वाली रानी पवांरनी के साथ चित्तौड़ की रानी पद्मावती की पुण्यतिथि मनाई गई। लोगों ने वीरांगनाओं की आत्मा की शांति के लिए हवन में आहुतियां देकर नमन किया।
जिला पंचायत सदस्य अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि लंबे अर्से पहले पवांसा कस्बे के स्थान पर पवांसा राज्य हुआ करता था। 17 नवंबर 1717 को पवांसा पर मेवातियों ने हमला बोल दिया। राजा पहुप सिंह और उनके सिपहसालार केसरी सिंह ने मेवातियों से जमकर युद्ध किया और आक्रमण विफल कर दिया। जीत की खुशी में मेवातियों के झंडे को छीन कर ला रहे राजपूत वीरों को दूर से ही मेवाती समझ लिया गया। दुश्मन मेवातियों के झंडे के साथ आगे बढ़ रही फौज को देख कर पवांसा की गढी में एकत्र 200 से अधिक वीरांगनाओं ने केसरी सिंह की पत्नी रानी पवांरनी के साथ मिलकर जौहर कर लिया। उस स्थान पर जौहर मंदिर बना है। इस दौरान रामवीर सिंह, डॉ.नागेंद्र सिंह, दीपांशु राघव, गोपाल राघव, अजय राघव, तरूष प्रताप सिंह, पूरन राघव, सुभाष राघव, तनिष्का राघव, स्तुति राघव, अनवी राघव, युवान देव सिंह आदि रहे।
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जिला पंचायत सदस्य अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि लंबे अर्से पहले पवांसा कस्बे के स्थान पर पवांसा राज्य हुआ करता था। 17 नवंबर 1717 को पवांसा पर मेवातियों ने हमला बोल दिया। राजा पहुप सिंह और उनके सिपहसालार केसरी सिंह ने मेवातियों से जमकर युद्ध किया और आक्रमण विफल कर दिया। जीत की खुशी में मेवातियों के झंडे को छीन कर ला रहे राजपूत वीरों को दूर से ही मेवाती समझ लिया गया। दुश्मन मेवातियों के झंडे के साथ आगे बढ़ रही फौज को देख कर पवांसा की गढी में एकत्र 200 से अधिक वीरांगनाओं ने केसरी सिंह की पत्नी रानी पवांरनी के साथ मिलकर जौहर कर लिया। उस स्थान पर जौहर मंदिर बना है। इस दौरान रामवीर सिंह, डॉ.नागेंद्र सिंह, दीपांशु राघव, गोपाल राघव, अजय राघव, तरूष प्रताप सिंह, पूरन राघव, सुभाष राघव, तनिष्का राघव, स्तुति राघव, अनवी राघव, युवान देव सिंह आदि रहे।
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