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Sambhal News: रावण का अहंकार राख...राम नाम से गूंजा आकाश
Wed, 21 Oct 2026 12:56 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Wed, 21 Oct 2026 12:56 AM IST
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संभल में धूं-धूं कर जलता मेघनाथ का पुतला। संवाद
संभल। विजयदशमी पर कुरुक्षेत्र मैदान में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण स्वरूपों ने रावण व मेघनाद के पुतलों का दहन किया। एक ओर रावण धराशायी हुआ तो दूसरी ओर आग में अहंकार जलकर राख हो गया। नयनाभिराम आतिशबाजी से आसमान में सतरंगी छठा बिखर गई और श्रीराम के जयकारों से आकाश गूंज उठा।
श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही रामलीला में रणभेरी बजते ही श्रीराम और दशानन की सेनाएं आमने-सामने आ गईं और भयंकर युद्ध हुआ। इसके साथ ही राम और रावण का युद्ध देखने लायक था। राम ने रावण के वध के लिए एक के बाद एक तीर छोड़े तो रावण ने अपनी मायावी शक्तियों से उनका जवाब दिया।
काफी प्रयास के बाद जब भगवान श्रीराम रावण का अंत नहीं कर पाए तो रावण के छोटे भाई विभीषण ने रावण को मिले वरदान के बारे में भगवान श्रीराम को बताया, जिस पर श्रीराम ने रावण की नाभि पर तीर मारा, जहां अमृत संचित था। तीर लगते ही रावण जमीन पर गिरकर वीरगति को प्राप्त हो गया। श्रीराम के अग्निबाण से मैदान में खड़े रावण और मेघनाद के पुतले जलकर राख हो गए। रावण का वध होते ही मैदान में भगवान राम के जयकारे गूंज उठे।
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रावण वध के बाद भगवान श्रीराम का विजय तिलक किया गया और आरती उतारी गई। इसके बाद मैदान में आतिशबाजी छोड़ी गई। इससे हर ओर माहाैल भक्तिमय हो गया। बाद में लोगों ने मेले में जमकर खरीदारी की।
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श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही रामलीला में रणभेरी बजते ही श्रीराम और दशानन की सेनाएं आमने-सामने आ गईं और भयंकर युद्ध हुआ। इसके साथ ही राम और रावण का युद्ध देखने लायक था। राम ने रावण के वध के लिए एक के बाद एक तीर छोड़े तो रावण ने अपनी मायावी शक्तियों से उनका जवाब दिया।
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काफी प्रयास के बाद जब भगवान श्रीराम रावण का अंत नहीं कर पाए तो रावण के छोटे भाई विभीषण ने रावण को मिले वरदान के बारे में भगवान श्रीराम को बताया, जिस पर श्रीराम ने रावण की नाभि पर तीर मारा, जहां अमृत संचित था। तीर लगते ही रावण जमीन पर गिरकर वीरगति को प्राप्त हो गया। श्रीराम के अग्निबाण से मैदान में खड़े रावण और मेघनाद के पुतले जलकर राख हो गए। रावण का वध होते ही मैदान में भगवान राम के जयकारे गूंज उठे।
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रावण वध के बाद भगवान श्रीराम का विजय तिलक किया गया और आरती उतारी गई। इसके बाद मैदान में आतिशबाजी छोड़ी गई। इससे हर ओर माहाैल भक्तिमय हो गया। बाद में लोगों ने मेले में जमकर खरीदारी की।