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Sambhal News: फड़ से शुरू हुई रामलीला डिजिटल पर्दे तक पहुंची

Sat, 10 Oct 2026 02:00 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Sat, 10 Oct 2026 02:00 AM IST
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Ramlila, which began on traditional open-air stages, has reached the digital screen.
चंदौसी। श्री रामलीला नाट्य परिषद द्वारा आयोजित रामलीला का इतिहास सवा सौ साल पुराना है। ब्रह्म बाजार के एक फड़ से शुरू हुई यह रामलीला अब रामबाग धाम के मंच पर डिजिटल पर्दे तक पहुंच चुकी है।
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रामलीला की नींव सन् 1903 में ब्रह्म बाजार में चौधरी बाबूराम के फड़ पर रखी गई थी। ब्रह्म बाजार में इसका मंचन 1964 तक जारी रहा। इसके बाद 1968 तक कैथल गेट स्थित बारहसैनी धर्मशाला में रामलीला का मंचन किया गया। सन् 1969 से रामबाग धाम के मंच पर इसका आयोजन हो रहा है। यहां श्री बारहसैनी रामलीला एवं रामबाग ट्रस्ट के तत्वावधान में रामलीला का मंचन होता है।
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रामबाग ट्रस्ट के मंत्री अमित केएस ने बताया कि रामबाग ट्रस्ट का पंजीकरण 22 अप्रैल 1976 को हुआ था। उस समय चौधरी बाबूराम ट्रस्ट के प्रधान और ओमपाल आर्य मंत्री थे। वर्ष 2017 में रामलीला के मंचन में कपड़े के पर्दे हटाकर डिजिटल पर्दा लगाया गया। रामबाग का रंगमंच एक ऐतिहासिक रंगमंच रहा है। यहां उमा देवी टुनटुन और मन्नाडे जैसे प्रसिद्ध बॉलीवुड कलाकारों ने भी अभिनय किया है।
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