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रमजान: मस्जिदें सजीं, अदा की तरावीह की नमाज
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संभल। रमजान का पाक महीना शुरू होते ही मस्जिदों को झालरों से सजा दिया गया है। तरावीह की नमाज के साथ रमजान का पहला असरा रहमत का शुरू हो गया है। रमजान को लेकर चारों ओर उत्साह का माहौल हैं। लोग ज्यादा से ज्यादा समय इबादत में गुजार रहे हैं। मस्जिदों में कुरान की तिलावत की आवाज गूंज रही हैं।
मुस्लिम बहुल क्षेत्र गुलजार हैं। लोग अहले सुबह सहरी कर रहे हैं। रोजा की अहमियत बहुत बड़ी हैं। रोजा सीधे तौर पर अल्लाह के साथ बंदों के रिश्तों को न सिर्फ जोड़ता हैं, बल्कि और मजबूत भी करता हैं। इसलिए रोजा की पाबंदी करनी चाहिए। हर बालिग मुस्लिम महिला व पुरुष को इसका एहतेराम करना चाहिए। मौलाना मुफ्ती आलम रजा खां नूरी ने बताया कि रमजान महीने के पहले 10 दिन रहमत के होते हैं। सच्चे मन से अल्लाह की इबादत करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है।
रमजान के पहले अशरे में मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा दान कर के गरीबों की मदद करनी चाहिए। हर एक इंसान से प्यार और नम्रता का व्यवहार करना चाहिए। रमजान के महीने में हर मुसलमान अपने मन और शरीर को पवित्र रखता है। रमजान में बुरी आदतों पर काबू करके अच्छे विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
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वह हर शख्स के साथ विनम्रता का व्यवहार करता है। रोजा हर उस शख्स पर फर्ज है जो बालिग होता है। उन्होंने कहा कि साल के सभी महीनों में सबसे अफजल रमजान का महीना हैं। रमजान के महीना में अल्लाह ताआला रहमतों व बरकतों की बरसात करते हैं।
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मुस्लिम बहुल क्षेत्र गुलजार हैं। लोग अहले सुबह सहरी कर रहे हैं। रोजा की अहमियत बहुत बड़ी हैं। रोजा सीधे तौर पर अल्लाह के साथ बंदों के रिश्तों को न सिर्फ जोड़ता हैं, बल्कि और मजबूत भी करता हैं। इसलिए रोजा की पाबंदी करनी चाहिए। हर बालिग मुस्लिम महिला व पुरुष को इसका एहतेराम करना चाहिए। मौलाना मुफ्ती आलम रजा खां नूरी ने बताया कि रमजान महीने के पहले 10 दिन रहमत के होते हैं। सच्चे मन से अल्लाह की इबादत करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है।
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रमजान के पहले अशरे में मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा दान कर के गरीबों की मदद करनी चाहिए। हर एक इंसान से प्यार और नम्रता का व्यवहार करना चाहिए। रमजान के महीने में हर मुसलमान अपने मन और शरीर को पवित्र रखता है। रमजान में बुरी आदतों पर काबू करके अच्छे विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
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वह हर शख्स के साथ विनम्रता का व्यवहार करता है। रोजा हर उस शख्स पर फर्ज है जो बालिग होता है। उन्होंने कहा कि साल के सभी महीनों में सबसे अफजल रमजान का महीना हैं। रमजान के महीना में अल्लाह ताआला रहमतों व बरकतों की बरसात करते हैं।