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जिला मुख्यालय के लिए सड़क पर उतरे आंदोलनकारी
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sat, 13 Feb 2016 12:48 AM IST
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जिला मुख्यालय संघर्ष समिति के आह्वान पर शुक्रवार को संभल का बाजार बंद रहा। कारोबार ठप हो गया। आंदोलनकारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। जब आंदोलनकारी दुकानें बंद करा रहे थे उसी वक्त पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की आंदोलनकारियों से खींचतान हुई। पुलिस ने पांच आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया लेकिन जब माहौल बिगड़ने के आसार बने तो पांचों को कोतवाली से छोड़ दिया।
संभल के पांच किलोमीटर की परिधि में जिला मुख्यालय बनवाए जाने की मांग को आंदोलन भड़का हुआ है। संभल का मुख्यालय शासन ने पंवासा में घोषित किया है जो संभल से 12 किलोमीटर है। आंदोलनकारी इस पर आपत्ति कर रहे हैं और मुख्यालय को संभल के करीब लाने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर आंदोलनकारी शुक्रवार को सुबह 10 बजे शंकर चौराहे पर एकत्र हुए। जुलूस बनाकर बंदी का आह्वान करते हुए आंदोलनकारी आगे बढ़ने लगे।
दिन में 11.30 बजे के करीब टंडन चौराहे से डाकघर की ओर आंदोलनकारी बढ़ रहे थे तभी जामा मस्जिद के निकट अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित और अपर जिलाधिकारी बीएन यादव भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों पर जबरन दुकानें बंद कराने का आरोप लगा दिया। अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित और प्रमुख आंदोलनकारी नवाब इनामुर्रहमाहन खां के बीच नोकझोंक होने लगी। कुछ ही देर में प्रशासन के तेवर तीखे हो गए और खींचतान बढ़ गई। नवाब इनामुर्रहमान खां, डा. नाजिम, मोहम्मद आसिफ रजा, शुजाउद्दीन फौजी, अधिवक्ता जफर अली को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इससे गुस्साए लोगों ने कोतवाली को घेर ली। पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। राजेश्वरी त्यागी कोतवाली के गेट पर लेट गईं। उनके समर्थन में तमाम लोग धरना देने लगे। कई अधिवक्ता भी आंदोलन के समर्थन में आ गए।
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थोड़ी ही देर में कोतवाली के गेट पर सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इसी दौरान पब्लिक में एक मैसेज चला गया कि पुलिस ने मौलाना मोहम्मद मियां को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन हकीकत में पुलिस ने किसी को मौलाना को गिरफ्तार नहीं किया था। पुलिस को इस मैसेज के बाद आंदोलन भड़कने का अंदेशा पैदा हो गया क्योंकि जुमे का दिन था। आंदोलन के समर्थन में दूसरे मौलाना भी आ सकते थे। इसलिए पुलिस ने तत्काल आंदोलनकारियों से बातचीत की और गिरफ्तारी के करीब डेढ़ घंटे में ही सभी आंदोलनकारियों को कोतवाली से छोड़ दिया गया। आंदोलनकारी इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए कोतवाली से निकले और नगर पालिका मैदान में सभा की। सभा में आंदोलन जारी रखने का एलान किया गया।
संभल के पांच किलोमीटर की परिधि में जिला मुख्यालय बनवाए जाने की मांग को आंदोलन भड़का हुआ है। संभल का मुख्यालय शासन ने पंवासा में घोषित किया है जो संभल से 12 किलोमीटर है। आंदोलनकारी इस पर आपत्ति कर रहे हैं और मुख्यालय को संभल के करीब लाने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर आंदोलनकारी शुक्रवार को सुबह 10 बजे शंकर चौराहे पर एकत्र हुए। जुलूस बनाकर बंदी का आह्वान करते हुए आंदोलनकारी आगे बढ़ने लगे।
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दिन में 11.30 बजे के करीब टंडन चौराहे से डाकघर की ओर आंदोलनकारी बढ़ रहे थे तभी जामा मस्जिद के निकट अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित और अपर जिलाधिकारी बीएन यादव भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों पर जबरन दुकानें बंद कराने का आरोप लगा दिया। अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित और प्रमुख आंदोलनकारी नवाब इनामुर्रहमाहन खां के बीच नोकझोंक होने लगी। कुछ ही देर में प्रशासन के तेवर तीखे हो गए और खींचतान बढ़ गई। नवाब इनामुर्रहमान खां, डा. नाजिम, मोहम्मद आसिफ रजा, शुजाउद्दीन फौजी, अधिवक्ता जफर अली को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इससे गुस्साए लोगों ने कोतवाली को घेर ली। पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। राजेश्वरी त्यागी कोतवाली के गेट पर लेट गईं। उनके समर्थन में तमाम लोग धरना देने लगे। कई अधिवक्ता भी आंदोलन के समर्थन में आ गए।
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थोड़ी ही देर में कोतवाली के गेट पर सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इसी दौरान पब्लिक में एक मैसेज चला गया कि पुलिस ने मौलाना मोहम्मद मियां को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन हकीकत में पुलिस ने किसी को मौलाना को गिरफ्तार नहीं किया था। पुलिस को इस मैसेज के बाद आंदोलन भड़कने का अंदेशा पैदा हो गया क्योंकि जुमे का दिन था। आंदोलन के समर्थन में दूसरे मौलाना भी आ सकते थे। इसलिए पुलिस ने तत्काल आंदोलनकारियों से बातचीत की और गिरफ्तारी के करीब डेढ़ घंटे में ही सभी आंदोलनकारियों को कोतवाली से छोड़ दिया गया। आंदोलनकारी इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए कोतवाली से निकले और नगर पालिका मैदान में सभा की। सभा में आंदोलन जारी रखने का एलान किया गया।