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Sambhal News: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को डॉक्टर का इंतजार, स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट कर रहे उपचार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 11 Dec 2022 07:00 AM IST
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Primary health centers are waiting for doctors, staff nurses and pharmacists are doing treatment
कहने को जिले में 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और चार नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों का टोटा है। कहीं फार्मासिस्ट तो कहीं स्टाफ नर्स ही मरीजों का उपचार कर रही हैं। जांच भी ज्यादातर पर नहीं होती है। खांसी, बुखार और खुजली जैसे रोगों की ही दवाई मिल जाती है। स्टाफ की कमी इस हद तक है कि दवाई का वितरण कई स्वास्थ्य केंद्रों पर ब्वाय करते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों को बेहतर उपचार कैसे मिल पाता होगा। शनिवार को इसकी लाइव पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। अव्यवस्थाओं का बोलबाला मिला। स्टाफ की कमी दिखाई दी। हजरतनगर गढ़ी स्वास्थ्य केंद्र पर सफाई कर्मी की नियमित तैनाती न होने से गंदगी नजर आई।
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हयातनगर
हयातनगर पीएचसी पर डॉक्टर की तैनाती नहीं होने के कारण स्टाफ नर्स अर्चना सैनी ही मरीजों को देख रही थीं। यहां रोजाना 50 से 60 मरीज आते हैं। सात कर्मचारियों की तैनाती है। जिसमें सिर्फ तीन कर्मचारी ही मौके पर मिले। फार्मासिस्ट, लैब टैक्निशियन, एक स्टाफ नर्स व वार्ड ब्याय नहीं थे। मरहम पट्टी कराने आए सरायतरीन निवासी छुन्नू ने बताया कि पैर के अंगूठे में चोट लग गई थी। लेकिन मरहम पट्टी करने से मना कर दिया।
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हातिम सराय
हातिम सराय सराय पीएचसी पर फार्मासिस्ट हेमपाल सिंह मरीजों का उपचार करते मिले। लैब टेक्नीशियन की तैनाती है, लेकिन पिछले दो सालों से आरटीपीसीआर लैब में संबद्ध होने के कारण वह अपनी सेवा यहां नहीं दे पाते हैं। सात स्टाफ में से तीन केंद्र पर नहीं थे।
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हजरतनगर गढ़ी
हजरतनगर गढ़ी स्थित पीएचसी पर डॉ. इंदू त्यागी सोमवार, बुधवार और शुक्रवार ही सेवाएं देती हैं। फार्मासिस्ट व एलटी की तैनाती नहीं है। 25 से 30 मरीज रोजाना आते हैं। ऐसे में स्टाफ नर्स विनीता रानी मरीजों को दवा देती हैं। जांच के लिए मरीजों को सीएचसी भेजा जाता है। जिससे मरीजों को काफी परेशानी होती है। सफाई कर्मी भी तीन दिन सफाई करने आता है। जिससे यहां गंदगी है।
मढ़न
मढ़न पीएचसी में रोजाना 15 से 20 मरीजों की ओपीडी होती हैं। डॉ. सहर फराना की तैनाती है लेकिन उनकी ड्यूटी असमोली सीएचसी में थी। ऐसे में फार्मासिस्ट धमेंद्र कुमार ने मरीजों को देखकर दवाई दी। एलटी न होने की वजह से जाचं के लिए मरीजों को असमोली सीएचसी भेजा जाता है।
गवां
गवां पीएचसी पर चिकित्सक के कक्ष में फार्मेसिस्ट अखलाक बैठकर मरीजों को देख रहे थे। पूछने पर बताया कि चिकित्सक की तैनाती ही नहीं है। वहीं वार्ड ब्यॉय रमेश चंद्र मरीजों को दवाई वितरित करते मिले। यहां दो स्टाफ नर्सों की तैनाती है, लेकिन सिर्फ एक ही स्टाफ नर्स काम करती मिली। लैब असिस्टेंट की तैनाती है। रजपुरा सीएचसी में संबद्ध होने के चलते यहां जांच नहीं हो पा रही हैं। गंभीर मरीजों को रजपुरा सीएचसी भेजा जाता है।

पीएचसी में स्टाफ की कमी है। दो बार पत्र भेजकर चिकित्सक और एलटी की मांग की जा चुकी है। अभी कोई तैनाती नहीं हुई है। जांच के लिए सीएचसी मरीजों को भेजा जाता है।- डॉ. सुनील त्यागी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, संभल अर्बन
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