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Sambhal News: ...हम जानो-दिल भी अपना लुटाएंगे शौक से, खतरा कभी जो आएगा हिंदोस्तान पर
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कविता पाठ करतीं कवयित्री।
- फोटो : कविता पाठ करतीं कवयित्री।
संभल। पवांसा स्थित स्कूल में पुलवामा शहीदों की स्मृति में आयोजित राष्ट्रवादी कवि सम्मेलन का आयोजन, सृजन साहित्यिक अभिरुचि मंच एवं संस्कार भारती के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। जिसका शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित करके अजय शर्मा, मीनू रस्तोगी, नेहा मलय और अमित वार्ष्णेय ने किया।
इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ ही, कई राज्यों के साहित्यकार शामिल हुए। मां सरस्वती की वंदना सुनाकर पल्लवी भारद्वाज ने कवि सम्मेलन की शुरुआत की। सरफराज हुसैन फराज ने सुनाया हम जानो-दिल भी अपना लुटाएंगे शौक से, खतरा कभी जो आएगा हिंदोस्तान पर। कवयित्री पल्लवी शर्मा ने पढ़ा तिरंगे में लिपटे जांबाज सैनिक का शव, किसी पवित्र मूर्ति से कम नहीं होता। देश की आन पर मर मिटे जो लाडला, किसी देवता से कम नहीं होता। बदायूं से आए ओजकवि विष्णु असावा ने सुनाया मातु-पिता हैं देव धरा के, इनका भी सम्मान रखो। कवयित्री श्वेता दूहन देशवाल ने सुनाया धड़का है दिल न जाने क्यों उस शख्स के लिए, दिल में भरी थी नफरतें जिस शख्स के लिए।
मथुरा से आए डॉ. मदन मुरादाबादी ने पढ़ा इंतजार की कोई, सीमा होती ही नहीं। आंख के काजल की उम्र, ज्यादा होती ही नहीं। अमित यादव श्याम ने सुनाया वतन के कण-कण तृण-तृण को, मेरा सप्रेम अभिनंदन। मातृभूमि के वीरों, संतों व सतियों को है वंदन। दिल्ली से पधारे शृंगार रस के वरिष्ठ कवि भागीरथ सिन्हा ने पढ़ा सूना-सूना है मन का हर कोना प्रिय, तुम मिलो तो मेरा दिल बहल जाएगा।
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इस दौरान साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले साहित्यकारों को वैद्य मुरारी लाल शर्मा स्मृति सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान ज्ञानप्रकाश उपाध्याय, इंद्रपाल शर्मा, शिवशंकर शर्मा, ओजस्वी जौहरी सरल, डाॅ. संदीप सचेत, रमेश चंद शर्मा, अभय पाल राघव, देवेंद्र सिंह, श्याम सिंह, शांति राना, नागेश राघव, प्रकाश शर्मा, आवरण अग्रवाल, ईशांत शर्मा, दिनेश दिलकश आदि रहे। संचालन दीपक गोस्वामी चिराग और अतुल कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से किया।
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इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ ही, कई राज्यों के साहित्यकार शामिल हुए। मां सरस्वती की वंदना सुनाकर पल्लवी भारद्वाज ने कवि सम्मेलन की शुरुआत की। सरफराज हुसैन फराज ने सुनाया हम जानो-दिल भी अपना लुटाएंगे शौक से, खतरा कभी जो आएगा हिंदोस्तान पर। कवयित्री पल्लवी शर्मा ने पढ़ा तिरंगे में लिपटे जांबाज सैनिक का शव, किसी पवित्र मूर्ति से कम नहीं होता। देश की आन पर मर मिटे जो लाडला, किसी देवता से कम नहीं होता। बदायूं से आए ओजकवि विष्णु असावा ने सुनाया मातु-पिता हैं देव धरा के, इनका भी सम्मान रखो। कवयित्री श्वेता दूहन देशवाल ने सुनाया धड़का है दिल न जाने क्यों उस शख्स के लिए, दिल में भरी थी नफरतें जिस शख्स के लिए।
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मथुरा से आए डॉ. मदन मुरादाबादी ने पढ़ा इंतजार की कोई, सीमा होती ही नहीं। आंख के काजल की उम्र, ज्यादा होती ही नहीं। अमित यादव श्याम ने सुनाया वतन के कण-कण तृण-तृण को, मेरा सप्रेम अभिनंदन। मातृभूमि के वीरों, संतों व सतियों को है वंदन। दिल्ली से पधारे शृंगार रस के वरिष्ठ कवि भागीरथ सिन्हा ने पढ़ा सूना-सूना है मन का हर कोना प्रिय, तुम मिलो तो मेरा दिल बहल जाएगा।
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इस दौरान साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले साहित्यकारों को वैद्य मुरारी लाल शर्मा स्मृति सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान ज्ञानप्रकाश उपाध्याय, इंद्रपाल शर्मा, शिवशंकर शर्मा, ओजस्वी जौहरी सरल, डाॅ. संदीप सचेत, रमेश चंद शर्मा, अभय पाल राघव, देवेंद्र सिंह, श्याम सिंह, शांति राना, नागेश राघव, प्रकाश शर्मा, आवरण अग्रवाल, ईशांत शर्मा, दिनेश दिलकश आदि रहे। संचालन दीपक गोस्वामी चिराग और अतुल कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से किया।