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Sambhal News: 101 करोड़ रुपये की जमीन मामले में दाखिल याचिका खारिज, ग्राम समाज की ही रहेगी जमीन

Wed, 28 Oct 2026 02:12 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Wed, 28 Oct 2026 02:12 AM IST
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Petition filed in case involving land worth Rs 101 crore dismissed; land to remain with the village community (Gram Samaj)
संभल। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की 101 करोड़ रुपये कीमत की ग्रामसभा भूमि के मामले में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। याचिका उपसंचालक चकबंदी अदालत के आदेश के खिलाफ थी। हाईकोर्ट ने आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला संभल प्रशासन के पक्ष में आया है। याचिका दायर करने वालों में आलम वारसी, आजम खान, मुजाहिद, शाकिर अली, मौ. रफीक, कासिम और शाकिर सबूर शामिल हैं।
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न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने 13 पेज का फैसला सुनाया है। 27 जून 2026 को फर्जी आवंटन निरस्त करने का आदेश दिया गया था। 20 दिन की सुनवाई के बाद 24 जुलाई को अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। इसी क्रम में याचिका खारिज कर दी गई है और ग्राम समाज घोषित करने वाले आदेश को सही माना है। संभल के गांव तख्त गोसाईं में मुरादाबाद रोड स्थित पांच गाटा संख्या की जमीन पर कब्जा किया गया था। डीएम अंकित खंडेलवाल और तत्कालीन एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने 28 जून को जमीन का निरीक्षण किया था। लेखपाल स्पर्श गुप्ता की शिकायत पर 29 जून को 31 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। सीओ कुलदीप कुमार ने एक जुलाई को जमीन का नक्शा तैयार कर बयान दर्ज किए थे।
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जांच में सामने आया था कि साल 2008 में उपसंचालक चकबंदी ने फर्जी पट्टे के आधार पर जमीन का नामांतरण सईदुल रहमान के नाम किया था। बाद में साल 2014 से 2019 के बीच यह जमीन कई लोगों को बैनामा कर दी गई। इस मामले में ही नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उन्हें बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। पालिका के सेवानिवृत्त मानचित्रकार शहाबुद्दीन और पैरोकार माजिद खान समेत अन्य आरोपी अभी तक फरार हैं।
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11 अगस्त 1954 के गजट के अनुसार, यह जमीन सिटी बोर्ड संभल के प्रबंधन में थी। सईदुल रहमान ने 1967 में सिटी बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा पट्टा दिए जाने का दावा किया था। इसी आधार पर 2008 में उसे भूमिधर घोषित किया गया। पालिका की 20 दिसंबर 2023 की आख्या में 1967 के पट्टे का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला; यह केवल एक प्रस्ताव था। डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि निर्णय प्रशासन के पक्ष में आया है। आरोपी पक्ष ने याचिका दाखिल की थी, जो हाईकोर्ट से खारिज हो गई है। तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने निर्णय दिया है।
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