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Sambhal News: नेकपुर न्याय पंचायत के 23 गांवों को अमरोहा में शामिल करने की मांग

Wed, 28 Oct 2026 02:28 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Wed, 28 Oct 2026 02:28 AM IST
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Demand to include the 23 villages of Nekpur Nyaya Panchayat in Amroha
ओबरी। संभल जिले के विकासखंड असमोली की न्याय पंचायत नेकपुर के 23 राजस्व गांवों को पड़ोसी जिले अमरोहा में शामिल करने की 15 साल पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। मांग पूरी नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि अमरोहा जिला मुख्यालय नजदीक होने के बावजूद उन्हें संभल जिला मुख्यालय जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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इस मांग की शुरुआत सितंबर 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार के दौरान संभल जिले के गठन के बाद हुई थी। जिला मुख्यालय अस्थायी रूप से बहजोई में संचालित होने लगा तो असमोली विकासखंड की न्याय पंचायत गुमसानी और मढ़न के 27 राजस्व गांवों को मुरादाबाद जिले में तथा न्याय पंचायत नेकपुर के 23 गांवों को अमरोहा जिले में शामिल करने की मांग उठी थी। ग्रामीणों का तर्क था कि बहजोई स्थित जिला मुख्यालय उनके गांवों से काफी दूर है। ग्रामीणों के अनुसार, नेकपुर न्याय पंचायत के गांवों से अमरोहा जिला मुख्यालय की दूरी अधिकतम 11 किलोमीटर है, जबकि संभल जिले के मुख्यालय तक पहुंचने के लिए करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। तहसील मुख्यालय की दूरी भी करीब 50 किलोमीटर है। इससे सरकारी कार्यों के लिए दोनों मुख्यालय जाने में समय और धन दोनों खर्च होते हैं। इस प्रकरण में राजस्व परिषद की ओर से प्रस्ताव मांगे जाने पर प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू की थी। प्रस्ताव शासन तक पहुंचने के बाद उच्चाधिकारियों की बैठक में इस पर चर्चा हुई। इसके बाद 4 नवंबर 2017 को राजस्व परिषद की ओर से विज्ञप्ति जारी की गई थी। हालांकि, बाद में असमोली को तहसील बनाने की मांग उठने के साथ ही गांवों को दूसरे जिले में शामिल करने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब यह मांग फिर से उठ रही है।
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चुनाव बहिष्कार की चेतावनी के मिला था आश्वासन
नेकपुर न्याय पंचायत के गांवों को अमरोहा में शामिल कराने के लिए गठित संघर्ष समिति ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बहिष्कार का आह्वान किया था। इसके बाद सक्रिय हुए तत्कालीन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने मांग पूरी कराने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत कर दिया था। लेकिन चुनाव के बाद यह मुद्दा फिर पीछे छूट गया और मांग पूरी नहीं हो सकी। अब चुनाव की आहट के बीच यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी मांग पर ठोस कार्रवाई होगी।
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इन गांवों की अमरोहा में शामिल होने की है मांग
अखबंदपुर काफूरपुर, सेमली, उमरपुर गौहरनगर, नेकपुर मुख्तयारपुर, हाजीपुर उर्फ हैदरपुर, मछरिया, भवालपुर बांसली, धामपुर, सैदपुर गंगू, ढकिया, बाबूखेड़ा, दूल्हापुर बंद उर्फ दारापुर, नंदपुर बीटा, राजीखेड़ा, चकिया, सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर, शेखूपुर खालसा, गालबपुर, सलारपुर खुर्द, गंगदासपुर, दरियापुर बंद, बिहुनी, रायपुर खुर्द।





मढ़न, खासपुर, मीरपुर साकीपुर, मुबारकपुर बंद, राजागालिबपुर, मंसूरपुर माफी, नरैठा मोहम्मदपुर, शहबाजपुर कलां, ओबरी, तलवार, शाहपुर डसर, इटायला माफी, मालपुर मलपुरा, पैंतिया माफी, अहरौला माफी, गुमसानी, सेवापुर पदारथपुर, धर्मपुर मुंजब्ता, जयंतीपुर, भैसोड़ा, खेमपुर, सीढलमाफी, रतुपुरा, नगला नीडर, मछारी।
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