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रामरायपुर के लोगों का अपराध और अपराधियों से कोई वास्ता नहीं, सौहार्द की मिसाल भी पेश करते हैं लोग

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2022 12:51 AM IST
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People of RamRaipur have no relation with crime and criminals, people also present an example of harmony
चंदौसी के गांव रामरायपुर गमटिया में चौपाल में चर्चा करते ग्रामीण। संवाद - फोटो : CHANDAUSI
संभल। जिले की तहसील चंदौसी क्षेत्र का रामरायपुर गमटिया गांव सौहार्द की मिसाल है। इस गांव में हिंदू मुस्लिम के बीच कोई भेदभाव नहीं है। एकता की मिसाल यह है कि इस गांव में हिंदू और मुस्लिम एक दूसरे के धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जाते हैं। खास बात इस गांव की यह भी है कि इस छोटे से गांव में आजादी के बाद से न कोई अपराधी बना और नबाहर अपराध करके आकर बसा है। गांव के किसी भी व्यक्ति का नाम अपराध में शामिल नहीं है। इसकी गवाही थाना बनियाठेर पुलिस का रजिस्टर देता है। गांव में हिंदू मुस्लिम एकता आजादी के बाद से अब तक बनी हुई है और इस गांव के संपन्न लोग कमजोर वर्ग के लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं। बेटी की शादी में कन्यादान की भी जिम्मेदारी उठाते हैं। कभी गांव के लोगों में आपसी मनमुटाव होता है तो गांव के बुजुर्ग एक बार में ही निबटा देते हैं। काफी लोग पढ़े लिखे और नौकरपेशा हैं। दरअसल 1500 की आबादी वाले इस गांव में जाट समाज की संख्या ज्यादा है। जो आर्थिक रूप से ज्यादातर मजबूत हैं। जाट समाज के अलावा हिंदू समुदाय की कई जाति के लोग और करीब 100 मुसलमान रहते हैं। इस गांव के लोग एकता में ही शक्ति का नारा बुलंद करते हैं। यही कारण हैं जो इस गांव में अपराध मारपीट का भी नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि बनियाठेर थाने के प्रभारी कर्म सिंह पाल ने भी की। थाना प्रभारी का कहना है कि इस गांव के लोगों ने मिसाल पेश की है। इससे दूसरे गांवों के लोगों को भी सीख लेनी चाहिए।
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अब से नहीं दशकों से जागरूक हैं इस गांव के लोग
संभल। इस गांव के बुजुर्गों की मानें तो 1960-70 के दौर में गांव का प्राइमरी विद्यालय गांव के जिम्मेदार लोगों की मदद से बनाया गया था। बिजली की समस्या थी तो लाइन भी इसी गांव के लोगों ने खुद खींची थी। तब से लेकर अब तक इस गांव के लोग आधुनिकरण की ओर तो बढ़े हैं लेकिन नफरत को कभी नहीं बढ़ने दिया। तभी इस गांव की लोग दूर दूर तक मिसाल देते हैं। इस गांव में हिंदू और मुस्लिम एक दूसरे के धार्मिक कार्यक्रम में भी शामिल होते हैं। यही एकता और सौहार्द की मिसाल है।
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कोट
हमारे गांव में सौहार्द दशकों से चला आ रहा है। गांव के बुजुर्ग मनमुटाव दूर कराते हैं। हमारे गांव में न कोई अपराधी है और न कभी कोई रहा है। हमारा गांव इसलिए सबसे अलग पहचान रखता है।
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अजीत सिंह, रामरायपुर गमटिया, गांव।
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कोट
हमारे गांव जैसी मिसाल बहुत कम देखने को मिलेगी। हमारे गांव में कोई भेदभाव नहीं है। भजन कीर्तन हो या मुस्लिम समाज का कोई भी धार्मिक कार्यक्रम। हम और हमारे गांव के लोग शामिल होते हैं। यही सौहार्द हमारे गांव को सबसे अलग बनाता है।
संजय सिंह, रामरायपुर गमटिया, गांव।
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कोट
हमारे गांव में कोई हिंदू मुस्लिम का भेदभाव नहीं है। त्योहार से लेकर कार्यक्रम तक एक साथ मिलकर मनाते हैं। हम बुजुर्ग हो गए लेकिन कोई भेदभाव सामने नहीं आया। एक दूसरे का सम्मान करते हैं और मुश्किल समय में काम आते हैं।
जफरूद्दीन, रामरायपुर गमटिया, गांव।
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कोट
हमारे गांव में हिंदू और मुसलमान एक साथ हैं। हमारे घर में कोई शादी या अन्य कार्यक्रम होता है तो सभी लोग मदद के लिए आगे रहते हैं। किसी ने कभी न हमसे भेदभाव किया और न हमने ही कभी ऐसा सोचा है। एकता हमेशा ऐसे ही बनी रहे ऐसी दुआ करते हैं।

भूरे खां, रामरायपुर गमटिया, गांव।
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रामायण की 500 चौपाई तेजी से सुनाते हैं नौशे अली
संभल। जहां देश में कई जगह हिंदू और मुस्लिम के बीच भेदभाव जैसी नकारात्मक खबरे सामने आती हैं। वहीं गांव रामरायपुर गमटिया के रहने वाले नौशे अली ऐसी नकारात्मक बहस पर विराम लगाते हैं। नौशे अली को रामायण की करीब 500 चौपाई याद हैं। अपने धर्म के साथ ही वह हिंदू धर्म का भी बखूबी ज्ञान रखते हैं। इसकी गवाही हिंदू समाज के लोगों ने दी। नौशे अली ने बताया कि वह मंदिर में होने वाले भजन कीर्तन में शामिल होते हैं और अन्य मुस्लिम भी मंदिर में भजन कीर्तन में शामिल होने जाते हैं। हिंदू समुदाय के लोग भी मुस्लिमों के धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं। कभी किसी ने एक दूसरे से बभेदभाव नहीं किया। बुजुर्ग किसी समुदाय का हो सम्मान बराबर किया जाता है। यही कारण हैं जो कोई विवाद थाने नहीं पहुंचा।
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