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बारिश से तबाह हो गई धान की फसल, किसान मायूस
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संभल में बारिश से जमीन पर बिछी धान की फसल को काटता किसान।
- फोटो : SAMBHAL
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संभल। झमाझम बारिश और तेज हवा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इससे धान की फसल धराशायी हो गई। जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में किसान मायूस और चिंतित हैं। किसानों ने प्रशासन से क्षति पूर्ति की मांग की है।
बुधवार को बारिश के साथ तेज हवा चलने से पवांसा क्षेत्र के गांव किसौली, सुजातपुर, भदरौला, लखौरीजलालपुर, पीपली रहमापुर समेत कई गांवों में धान की फसलों को क्षति हुई। गांव किसौली निवासी अमर सिंह ने बताया कि गांव में तमाम किसानों की फसल खराब हो गई है। अब समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें।
किसानों का कहना है कि किसी विभागीय अधिकारी ने क्षेत्र में जाकर फसल का हाल नहीं देखा है। न ही गांव में धान की फसल की क्षति का आंकलन किया गया है। अगर सरकार बरसात से हुई फसल के नुकसान के लिए मुआवजा दे तो किसान की कुछ समस्या हल हो सकती है। भाकियू असली के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने कहा कि जिन कंपनियों ने फसलों का बीमा किया है। वह क्षति का आंकलन कराएं और किसानों को क्षतिपूर्ति करें।
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फसलों की क्षति 50 प्रतिशत से कम
धान की फसलों को क्षति तो हुई है पर यह क्षति पचास प्रतिशत से कम है। इससिए राजस्व विभाग से मुआवजा नहीं मिलेगा। लेकिन अगर फसल का बीमा है तो किसान बीमा कंपनी से क्लेम करें। फसल की क्षति का आंकलन कराए। मुआवजे के बारे में बीमा कंपनी फैसला लेगी। यह बात उप जिलाधिकारी ने कही। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान तहसील में प्रार्थना पत्र देता है तो उसके यहां हुई क्षति का आंकलन लेखपाल के माध्यम से करा लिया जाएगा। किसान को बीमा क्लेम करने में यह आख्या काम आएगी।
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बुधवार को बारिश के साथ तेज हवा चलने से पवांसा क्षेत्र के गांव किसौली, सुजातपुर, भदरौला, लखौरीजलालपुर, पीपली रहमापुर समेत कई गांवों में धान की फसलों को क्षति हुई। गांव किसौली निवासी अमर सिंह ने बताया कि गांव में तमाम किसानों की फसल खराब हो गई है। अब समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें।
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किसानों का कहना है कि किसी विभागीय अधिकारी ने क्षेत्र में जाकर फसल का हाल नहीं देखा है। न ही गांव में धान की फसल की क्षति का आंकलन किया गया है। अगर सरकार बरसात से हुई फसल के नुकसान के लिए मुआवजा दे तो किसान की कुछ समस्या हल हो सकती है। भाकियू असली के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने कहा कि जिन कंपनियों ने फसलों का बीमा किया है। वह क्षति का आंकलन कराएं और किसानों को क्षतिपूर्ति करें।
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फसलों की क्षति 50 प्रतिशत से कम
धान की फसलों को क्षति तो हुई है पर यह क्षति पचास प्रतिशत से कम है। इससिए राजस्व विभाग से मुआवजा नहीं मिलेगा। लेकिन अगर फसल का बीमा है तो किसान बीमा कंपनी से क्लेम करें। फसल की क्षति का आंकलन कराए। मुआवजे के बारे में बीमा कंपनी फैसला लेगी। यह बात उप जिलाधिकारी ने कही। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान तहसील में प्रार्थना पत्र देता है तो उसके यहां हुई क्षति का आंकलन लेखपाल के माध्यम से करा लिया जाएगा। किसान को बीमा क्लेम करने में यह आख्या काम आएगी।