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तीन तलाक पर अध्यादेश का पीड़िताओं ने किया स्वागत
अमर उजाला ब्यूरो/ संभल
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:42 AM IST
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संभल। तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाली संभल की महिलाएं अध्यादेश जारी होने पर स्वागत किया है। केंद्र सरकार इस अध्यादेश को अपना बड़ा हथियार मानकर चल रही है। उसे लग रहा है कि इस अध्यादेश के आने पर लोकसभा चुनाव में मुस्लिम महिलाओं को इसका फायदा होगा। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने भी इसके खिलाफ पहले ही अभियान चलाया है। इसके लिए मॉडल निकाहनामा भी लागू करने की बात कही है।
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संभल से सबसे पहली याचिका मार्च 2018 में डा. समीना ने दाखिल की थी। उनको निकाह के बाद दो बार तीन तलाक की तकलीफ से गुजरना पड़ा। वह इस मुद्दे पर 2012 से संघर्ष कर रहीं थीं। बुधवार को दोपहर उन्हें मीडिया के माध्यम से तीन तलाक पर अध्यादेश की जानकारी मिली तो उन्होंने इस पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि हमें यह उम्मीद तो थी कि केंद्र सरकार तीन तलाक पर बिल लाएगी लेकिन कब तक बिल पारित होगा? इस पर कोई आंकलन नहीं कर पा रहे थे लेकिन केंद्र सरकार इतनी जल्दी अध्यादेश ले आएगी, इसका हमें यकीन न था। फिर भी केंद्र सरकार अध्यादेश लाई। हालांकि अभी इस मामले में यह बात साफ नहीं हो सकी है कि तलाक पीड़िताओं को किस तरह मदद मिलेगी। अगर तलाक देने वाला शौहर जेल चला गया तो बच्चों और महिलाओं को गुजारा भत्ता कैसे मिलेगा। इसमें तीन तलाक देने वाले को जेल भेजने का प्रावधान किया गया है।
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इस अध्यादेश पर उलमा की अलग-अलग प्रतिक्रिया है। उनका कहना है कि मुसलमानों को तीन तलाक के मुद्दे पर बदनाम किया जा रहा है। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड समेत अन्य संगठन भी इसके खिलाफ जागरूकता फैला रहे हैं। ताकि लोग तीन तलाक से बचें। कुरान में जिस तरह से तलाक देने की बात कही गई है उस पर अमल किया जाए। अगर शौहर और बीवी में किसी तरह का मनमुटाव पैदा होता है और तलाक तक नौबत पहुंच जाती तो पहले दोनों ही परिवार के चुनिंदा लोग बैठकर मामले का हल निकालें। तलाक की नौबत भी आती है तो तीन महीने में एक-एक कर तलाक की प्रक्रिया पूरी की जाए। अधिवक्ता अब्दुल रहमान ने कहा कि अध्यादेश राजनीति से प्रेरित है। केंद्र सरकार अपने किए वादे पर खरी नहीं उतरी और अब जनता का ध्यान हटाकर राजनीतिक हित साधा जा रहा है।
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मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन
मुखालफत के बाद भी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने के लिए डटे रहे। इससे विपक्ष की राजनीति विफल हुई है। केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर विपक्ष के मुंह पर एक तमाचा मारा है। आज का दिन मेरे लिए नहीं बल्कि पूरे देश की मुस्लिम के लिए आजादी का ऐतिहासिक दिन है। डॉ. समीना, तीन तलाक पीड़ित।
अब न्याय की उम्मीद जगी
मैं भी तीन तलाक और हलाला पीड़िता हूं। मैं न्याय के लिए दर बदर भटक रही हूं। मेरा मुकदमा संभल जिले के नखासा थाने में एडीजी के हस्तक्षेप के बाद दर्ज कराया गया। वह भी तब जब बरेली से मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने पैरवी की है। अब मोदी जी ने अध्यादेश पारित कराया है उससे हमें न्याय की उम्मीद जगी है। तीन तलाक और हलाला पीड़िता का बयान।
हम सरकार के कानून का विरोध नहीं करते लेकिन हम अपनी शरीयत के रास्ते पर ही चलेंगे। तीन तलाक बिल और अध्यादेश से महिलाओं का भला नहीं होगा। आलम रजा खां नूरी, मुफ्ती ए सिरसी।