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Sambhal News: दरोगा और तीन सिपाहियों के खिलाफ रिपोर्ट के आदेश
Sat, 10 Oct 2026 01:54 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:54 AM IST
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चंदौसी। न्यायालय ने थाना एचोड़ा कम्बोह के एक दरोगा और तीन सिपाहियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। इन पुलिसकर्मियों पर एक महिला के घर में घुसकर मारपीट और अभद्रता करने का आरोप है। न्यायालय ने संबंधित थाना पुलिस को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।
महिला इशरत ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। उसने बताया कि 12 मई 2025 की दोपहर करीब 12 बजे दरोगा सत्यदेव, कांस्टेबल सनी कुमार, राहुल कुमार और सुलभ राठी उसके घर आए। वे नरेंद्र के दिए गए प्रार्थनापत्र की जांच करने आए थे।
आरोप है कि पुलिसकर्मी घर में घुस गए और कीमती सामान की तोड़फोड़ की। इशरत को लात-घूसों से पीटा गया, जिससे उसे चोटें आईं। पीड़िता को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई। घटना का वीडियो भी बनाया और वायरल किया गया। सीओ असमोली अमन सिंह ने बताया, उन्हें अभी तक ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
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ये था विवाद
इशरत के भाई इश्तकार ने नरेंद्र और धर्मपाल के साथ साझेदारी में एक ट्यूबवेल कनेक्शन लगवाया था। इश्तकार ने 1,08,000 रुपये की आधी रकम दी थी। ट्यूबवेल लगने के बाद नरेंद्र ने पानी देने से मना कर दिया। इशरत ने थाने और आला अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
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महिला इशरत ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। उसने बताया कि 12 मई 2025 की दोपहर करीब 12 बजे दरोगा सत्यदेव, कांस्टेबल सनी कुमार, राहुल कुमार और सुलभ राठी उसके घर आए। वे नरेंद्र के दिए गए प्रार्थनापत्र की जांच करने आए थे।
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आरोप है कि पुलिसकर्मी घर में घुस गए और कीमती सामान की तोड़फोड़ की। इशरत को लात-घूसों से पीटा गया, जिससे उसे चोटें आईं। पीड़िता को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई। घटना का वीडियो भी बनाया और वायरल किया गया। सीओ असमोली अमन सिंह ने बताया, उन्हें अभी तक ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
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ये था विवाद
इशरत के भाई इश्तकार ने नरेंद्र और धर्मपाल के साथ साझेदारी में एक ट्यूबवेल कनेक्शन लगवाया था। इश्तकार ने 1,08,000 रुपये की आधी रकम दी थी। ट्यूबवेल लगने के बाद नरेंद्र ने पानी देने से मना कर दिया। इशरत ने थाने और आला अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।